टापू से निकलने के लिए जुगाड़ वाली सेलबोट: लगभग बारह घंटे की कोशिश, जो किनारे से आधा किलोमीटर पहले खत्म हुई

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अवलोकन

इस वीडियो में जिमी (MrBeast) और उनके दोस्त चैंडलर, नोलन, हेज़ और डेरियस पैसिफिक ओशन के एक टापू पर "फँसे" हैं। चुनौती की शर्त यह है कि यहाँ से निकलने का एक ही रास्ता है: खुद एक सेलबोट बनाओ और मीलों फैला समंदर पार करके दूसरे टापू तक पहुँचो। जिमी बताते हैं कि यह चुनौती इसलिए रखी गई क्योंकि वे हमेशा सोचते थे कि अगर वे और उनके दोस्त किसी टापू पर फँस जाएँ तो क्या निकल पाएँगे। वीडियो का सवाल यही है कि जिन लोगों ने कभी सेलिंग नहीं की, क्या वे समुद्र तट पर बहकर आए कचरे और जंगल के बम्बू से ऐसी नाव बना सकते हैं जो उन्हें पार ले जाए।

12 मिनट में पढ़ें

शुरुआत: सेलिंग का कोई अनुभव नहीं, पहले रहने की जगह

शुरू में ही साफ़ हो जाता है कि टीम में किसी ने न सेलिंग की है, न सेलबोट बनाई है। जिमी एक थ्रीडी एनीमेशन दिखाकर बताते हैं कि उन्हें कैसी नाव बनानी है, जिस पर बाकी लोग इसे "नामुमकिन" कहते हैं। इसी कमी की वजह से हेज़ को साथ लाया गया था, क्योंकि उन्होंने किसी पिछले वीडियो में एक सेलबोट बनाई थी।

नाव पर काम शुरू करने से पहले टीम को रहने का इंतज़ाम करना था। जिमी के शब्दों में, ऐसा न किया तो निकलने से पहले ही टापू पर मर जाएँगे। एक क्रेट में थोड़ा-बहुत सर्वाइवल का सामान और पानी मिला। जिमी के मुताबिक पानी भले ज़्यादा दिखे, पर इसे सेलबोट बनने तक चलाना है, और उन्हें खुद नहीं पता था कि इसमें कितना समय लगेगा, क्योंकि "हम बस कुछ यूट्यूबर्स हैं"। पहले दिन टीम ने ट्री-फोर्ट जैसा एक शेल्टर बनाया। स्क्रीन पर "घंटा 11" दिखता है। एक कैंप बनाने में ही इतनी मशक्कत देखकर जिमी कहते हैं, "सोचो, सेलबोट बनाने में क्या होगा।" सूरज ढलने से पहले आग जलाई गई और अगले दिन से नाव बनाने की योजना तय हुई।

हेज़ का मिनिएचर मॉडल और नाव का ढाँचा

दूसरे दिन की सुबह जब बाकी लोग आँखें मल रहे थे, हेज़ अकेले काम में जुटे थे। उन्होंने एक छोटा मिनिएचर बनाया था, जिसमें नाव की बनावट समझाई गई: दो हल्स होंगी, उनके ऊपर क्रॉस बीम्स जाएँगे और बीच में मास्ट होगा। सेल के लिए नोलन की शर्ट का एक टुकड़ा लिया गया। यह मॉडल पानी में तैर गया।

इस प्रोटोटाइप के बाद टीम ने लक्ष्य तय किया कि असली नाव इससे तीस-चालीस गुना बड़ी होनी चाहिए, जो करीब साढ़े चार सौ किलो वज़न संभाल सके और सबको दूसरे टापू तक ले जाए।

बम्बू की तलाश और जंगल के खतरे

नाव के लिए सबसे अच्छा सामान बम्बू बताया गया, क्योंकि वह बहुत हल्का होता है और पानी पर तैरता है। दिक्कत यह थी कि सारा बम्बू जंगल के काफ़ी अंदर था। अंदर जाने से पहले हेज़ ने "इमरजेंसी मीटिंग" बुलाकर तीन चीज़ों से सावधान रहने को कहा: फ़ेर-डे-लॉन्स साँप, येलो आईलैश वाइपर और वांडरिंग बनाना स्पाइडर। जंगल में किसी की शर्ट में चींटियाँ घुसीं, किसी ने मधुमक्खी का छत्ता छेड़ने की बात छेड़ी तो बाकी ने मना कर दिया। एक सदस्य ने कहा कि यहाँ हर चीज़ जानलेवा है। रात में एक बड़ी मकड़ी कैंप में आ गई, जिससे नोलन की नींद उड़ गई।

समुद्र तट का कचरा, नाव का कच्चा माल

नाव का दूसरा अहम स्रोत तट पर बहकर आया कचरा था। वीडियो में बताया जाता है कि यहाँ से बड़े शिप्स गुज़रते हैं और समंदर में कचरा फेंकते हैं, जो बहकर टापू तक आता है। टीम के हिसाब से कोई भी बंद कंटेनर यहाँ "सोने से भी कीमती" था, क्योंकि वही नाव को तैराएगा। टीम यह भी कहती है कि निकलने के साथ-साथ वे बीच की सफ़ाई भी कर रहे हैं।

तलाश में एक नीला कंटेनर टूटा हुआ निकला, पर दूसरे सही-सलामत मिले और पानी में तैरते भी थे। जिमी बताते हैं कि गर्मी से वे बेहोश होने वाले थे, पर ये मिलते ही मेहनत वसूल हो गई। फिर भी उस दिन निर्माण शुरू करने की ताकत किसी में नहीं बची थी। जब जिमी से पूछा गया कि क्या वे दिन के काम से खुश हैं, तो उनका जवाब था कि इसी रफ़्तार से चले तो महीना लग जाएगा।

गर्मी से लड़ाई और काम का बँटवारा

अगली सुबह टीम ने धूप में "पिघलने" के बजाय काम बीच से थोड़ा ऊपर छाँव में ले जाने का फ़ैसला किया। तर्क यह था कि छाँव में पूरे दिन काम हो सकेगा, वरना दो-चार घंटे ही हो पाएगा। रास्ते में चैंडलर को तीसरा बैरल मिला, जिससे नाव के तैरने की संभावना बढ़ी। आखिरकार इतना बम्बू और लकड़ी जमा हो गई कि ढंग की नाव बन सके। जिमी कहते हैं कि लकड़ियों और कचरे का यह ढेर देखने में खास नहीं, पर यही सेलबोट बनने वाला है।

काम के दौरान चैंडलर ने कैमरामैन डेरियस से कैमरा ले लिया और डेरियस को नाव बनाने में लगा दिया गया। इसके बाद राफ्ट आकार लेने लगी। टीम को लगातार यह डर था कि लहर के झटके से एक भी नॉट खुली तो वे बीच समंदर में डूब जाएँगे। हेज़ ने इसी वजह से कहा कि हर किसी से वही काम लो जिसमें वह सबसे अच्छा हो, और चूँकि यहाँ नॉट्स बाँधना हेज़ को शायद सबसे अच्छा आता है, इसलिए गाँठें हेज़ ही बाँधेंगे और जाँचेंगे। मज़ाक-मज़ाक में "पूप डेक" भी बना और चैंडलर ने नाव का नाम भी रखा।

हेज़ की ज्वार-भाटे वाली रणनीति

हेज़ ने टाइड्स में एक फ़ायदा देखा। उनके मुताबिक जब ज्वार ऊपर आकर नीचे जाता है तो पानी को किनारे से बाहर खींच ले जाता है, इसलिए अगर उसी समय निकला जाए तो वह उन्हें सीधे खुले समंदर की तरफ़ ले जाएगा। पर हेज़ ने यह चेतावनी भी दी कि अगर हवा उलटी हुई और करेंट भी साथ न दे, तो मोटर भी दे दो, फिर भी उस टापू तक नहीं पहुँचेंगे। यही वाक्य वीडियो के अंत में फिर लौटता है। हेज़ ने यह भी कहा कि उन्हें लगता है सबकी उम्मीदें उन पर टिकी हैं, और अगर कभी सेल न करने वाले लोगों के साथ यह कर दिखाया तो यह याद वे पूरी ज़िंदगी सँभालकर रखेंगे।

अगले दिन के लक्ष्य थे पूप डेक को बाँधना और पैडल्स के लिए सामान जुटाना। सेल बनाने से पहले नाव को पानी में टेस्ट करने का फ़ैसला हुआ: पहले देखेंगे तैरती है या नहीं, तभी सेल बनेगी।

चौथा बैरल, डिहाइड्रेशन और टीमवर्क का सबक

ढाँचे के लिए चौथा बैरल ज़रूरी था। तीन से संतुलन नहीं बन रहा था और एक सिरा गड़बड़ करता। जिमी बताते हैं कि अब तक वीडियो का ज़्यादातर हिस्सा कचरा खंगालने में गया है, पर निकलने की उम्मीद इसी पर टिकी थी। तापमान करीब चालीस डिग्री बताया गया। चौथे दिन दो घंटे पूरा बीच छानने के बाद आखिरकार चौथा नीला बैरल मिला। उसे पथरीले रास्ते से वापस ढोना था, और नोलन पानी साथ न लाने की गलती की कीमत चुकाने लगे: उँगलियों में झनझनाहट और धुंधला दिखना। उसी दौरान किनारे पर मिली एक धातु की चीज़ के नीचे आग जलाकर प्लास्टिक उबालने और उससे पैडल बनाने की योजना बनी।

डेरियस बैरल और एक पतवार दोनों लेकर लौटे, और नोलन को हेज़ ने संभालकर पानी पिलाया। जिमी के अनुसार यही वह पल था जब टीम को समझ आया कि निकलना है तो सबको मिलकर काम करना होगा। तब तक आधे से ज़्यादा पानी खत्म हो चुका था, इसलिए टापू पर ज़्यादा दिन रुकने की गुंजाइश नहीं बची थी।

फ्लोट टेस्ट और जिमी का निजी विचार

सारे बैरल्स एक क्रेडल में कसकर फिट किए गए। फिर क्रॉसबीम्स की लैशिंग शुरू हुई, जो बाकी सत्रह बीम्स पर दोनों तरफ़ करनी थी। टीम के सामने दो रास्ते थे: बनाते रहो और दुआ करो कि सब ठीक निकले, जबकि आखिरी दिन टूटने का खतरा बना रहे, या रुककर पहले पानी में परखो। उन्होंने परखना चुना, और राफ्ट तैर गई।

इसी मोड़ पर जिमी ने एक निजी बात कही। उनके चैनल पर अक्सर बड़े सेट्स, सैकड़ों कंटेस्टेंट्स और लाखों डॉलर के इनाम वाले वीडियो बनते हैं, पर कभी-कभी चार दोस्तों के साथ टापू पर अटककर सेलबोट बनाना भी काफ़ी होता है। गर्मी और कीड़ों की वजह से वे इसे मुश्किल वीडियो मानते हैं, फिर भी उन्हें इसमें बहुत मज़ा आ रहा था। वे बताते हैं कि पहले ऐसे वीडियो वे हर समय करते थे और उन्हें नहीं पता कि वे क्यों बंद हो गए। योजना यह बनी कि अगले दिन तक पूरा फ़ोकस रखा तो नाव तैयार हो सकती है, और परसों करेंट सही रहा तो निकल पड़ेंगे। पर अभी उनके पास सेलबोट नहीं, सिर्फ़ एक राफ्ट थी।

पाँचवाँ दिन: सेल, स्केग और नाकाम प्रयोग

पाँचवें दिन पानी कम बचा था और नोलन की हालत चिंता बढ़ा रही थी। नोलन के मुताबिक सिर्फ़ उनकी बाँह और हाथ पर साठ से ज़्यादा कीड़ों के काटने के निशान थे, और अगर अगले दिन न निकले तो वे नहीं जानते कि और कितने दिन झेल पाएँगे।

प्लास्टिक पिघलाकर पैडल बनाने का प्रयोग नाकाम रहा। पानी उबल रहा था, पर प्लास्टिक नहीं पिघला। इस पर टीम ने खुद पर ही मज़ाक किया कि इसी वजह से लोग मार्क रॉबर को देखते हैं, उन्हें नहीं। इसके बाद स्केग पर काम हुआ। हेज़ ने समझाया कि स्केग का काम नाव को सीधा चलाना है, भले वह खुद टेढ़ी जाने की कोशिश करे। पैडल का पहला प्रोटोटाइप "पैडल से ज़्यादा फ़्लैग" जैसा दिखा, फिर भी चार पैडल बनाने की योजना बनी। सेल के लिए हेज़ ने पतले पर मज़बूत बम्बू से एक "क्रैब सेल" बनाई, जिसे उन्होंने पुराने पॉलिनेशियंस की शैली जैसा बताया। सेल के हिंज के लिए छेद करना अगला जोखिम भरा काम था, क्योंकि उसके फेल होने पर पूरी सेल टूट सकती थी।

समय का दबाव न्यू मून की वजह से था। हेज़ के अनुसार उस वजह से ज्वार बहुत ऊँचे थे, और हाई टाइड से लो टाइड की ओर जाते वक्त निकलने पर पानी उन्हें सीधे टापू की दिशा में खींचेगा। टाइड बदलने में बारह घंटे से भी कम बचे थे। सेल चढ़ाई गई, उसमें हवा भरी और रस्सी खींचकर उसे उतारने का तरीका भी परखा गया। टीम आधी रात तक काम करती रही। चैंडलर को तब यह भी पक्का नहीं था कि वे जो बना रहे हैं वह रडर ही है या नहीं।

रवानगी: "पैडल चलाते रहेंगे"

करीब एक हफ़्ते की मेहनत के बाद नाव तैयार थी। निकलने से पहले सबने एक वादा दोहराया: थकोगे तो क्या करोगे, उससे ज़्यादा थकोगे तो क्या करोगे, और जब मन करे कि अब नहीं, तब क्या करोगे? हर बार जवाब था: "पैडल चलाते रहेंगे।"

शुरुआत में करेंट उन्हें बाहर की तरफ़ खींच रहा था। सेल खोलने पर रफ़्तार करीब डेढ़ किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई, जिसे टीम ने कम से कम पहुँचने लायक माना। पर दूरी अब भी आठ किलोमीटर से ज़्यादा थी, और टापू ठीक से दिख भी नहीं रहा था। हेज़ ने पहले से चेताया था कि कुछ घंटों में वे एक चैनल में पहुँचेंगे जहाँ पानी उन्हें तिरछा बहाकर खुले समंदर में फेंकना चाहेगा, इसलिए उससे पहले जितना हो सके टापू के करीब पहुँचना ज़रूरी था।

बीस मिनट में ही किसी को उल्टी जैसा लगने लगा। नाव सीधी अपविंड जा रही थी, जिसे हेज़ ने अपने-आप में पागलपन कहा। हेज़ ने पंद्रह मिनट की रोटेशन शुरू की: राइट साइड पर तीन लोग, और एक को बारी-बारी से आराम। करीब पैंतालीस मिनट बाद अंदाज़ा था कि वे सिर्फ़ बीस प्रतिशत पहुँचे हैं। फिर नोलन का पैडल टूटा, नाव का एक हिस्सा गिरा, हेज़ फिसल गए और नाव दिशा से भटककर मुड़ने लगी। सबने एक साथ लंबे स्ट्रोक मारकर उसे वापस लाइन पर लाया।

चैनल में फँसना

जैसे-जैसे वे चैनल के करीब पहुँचे, हालात उलटे पड़ने लगे। टीम बताती है कि वे पिछले छह दिन से रोज़ बारह घंटे नाव बना रहे थे, इसलिए शरीर पहले से थके थे। किसी के कंधे जवाब दे गए, चैंडलर ने घबराहट की बात कही, और धूप में "लॉबस्टर की तरह सिकने" की शिकायत हुई। चैनल में पानी उछलने लगा। एक जगह डेरियस से रुकने को कहा गया, तो डेरियस ने कहा कि पाँच सेकंड भी रुके तो नाव घूम जाएगी। हेज़ ने समझाया कि यहीं सबसे तेज़ करेंट और सबसे ज़्यादा हवा है, और पैडल मारने वालों की ताकत ही उन्हें ज़्यादा दक्षिण बहने से रोक रही है।

वीडियो के मुताबिक घंटों तक करेंट उन्हें कभी बाईं ओर खींचता रहा, कभी दाईं ओर, और गोल-गोल घुमाता रहा। फिर समझ आया कि वे आगे बढ़ ही नहीं रहे, अटक गए हैं। वापस लौटना संभव नहीं था और आगे बढ़ना उससे भी मुश्किल। छह घंटे होते-होते जिमी बीमार थे, चैंडलर सो गए थे, हेज़ सेल और स्टीयरिंग संभाल रहे थे, और डेरियस पूरे समय पैडल चला रहे थे। जिमी के शब्दों में, जब वे और चैंडलर लगभग बेकार हो चुके थे, मिशन पूरी तरह हेज़, नोलन और डेरियस के भरोसे था।

टापू तब साढ़े पाँच किलोमीटर दूर था। हेज़ का कहना था कि अगर वे टापू के हिसाब से सही हवा की दिशा में आ जाएँ तो करेंट और हवा दोनों साथ देंगे, पर शुरुआत अच्छी न होने की वजह से अभी "पहले चढ़ाई, फिर ढलान" वाली स्थिति थी। सात घंटे बाद किसी ने कहा कि वे बिना रुके पैडल मार रहे हैं और अब और नहीं कर सकते, और सबसे बुरा यह है कि टापू "लिटरली यहीं है", फिर भी हाथ नहीं आ रहा। फ्लेयर निकालने की बात भी उठी। अधमरी हालत में पड़े जिमी को वही बात याद आई जो उन्होंने दो दिन पहले कही थी, कि कभी-कभी चार दोस्तों के साथ टापू पर फँसकर सेलबोट बनाना भी काफ़ी होता है।

उम्मीद की वापसी और आखिरी किलोमीटर

तभी नाव बिना कुछ किए टापू की ओर मुड़ने लगी। हेज़ के मुताबिक ज्वार चढ़ रहा था और वह उन्हें ज़मीन की ओर खींच रहा था। टीम कहती है कि तब तक वे बिना समझे ही चैनल से बाहर निकल चुके थे। जीपीएस पर दूरी साढ़े चार किलोमीटर दिखी। सबने एक आखिरी ज़ोर लगाने का फ़ैसला किया। आठ घंटे से ज़्यादा की रोइंग के बाद, धूप से झुलसे, भूखे और कम होते पानी के बीच, दूरी चार किलोमीटर से 2.7, फिर 1.6, फिर 1.4, 1.2, 1.1 और 1 तक आई। किसी ने खुशी में "लैंड हो!" चिल्लाया।

पर हेज़ के अनुसार आगे आखिरी टाइड शिफ्ट इंतज़ार कर रहा था और ज्वार बदलने में बीस मिनट बचे थे। उन्होंने फिर वही चेतावनी दोहराई कि हवा उलटी पड़ी और करेंट भी खिलाफ़ गया तो मोटर से भी नहीं पहुँचेंगे। करीब आधा किलोमीटर बचा था, पर नाव ज़्यादा दाईं ओर बह रही थी। तेज़ क्रॉस-ब्रीज़ चलने लगी और टीम में मतभेद हुआ। एक राय थी कि सेल उन्हें और दक्षिण की ओर धकेल रही है, दूसरी कि उसके बिना वे हवा को काट नहीं पाएँगे। किसी के पास पैडल न बचने पर वे हाथ से पानी काट रहे थे।

अंत: जीत से आधा किलोमीटर पहले

जिमी बताते हैं कि जब वे लगभग पंचानवे प्रतिशत रास्ता तय कर चुके थे और किसी में कुछ नहीं बचा था, तभी ज्वार बदला और उन्हें सीधे पीछे खींच लिया। जो पानी अब तक पीछे से धक्का दे रहा था, वही सामने से अड़ गया। दूरी बढ़कर 0.8 किलोमीटर हो गई। किसी ने कहा कि इतनी दूरी तो तैरकर भी पार हो जाती। जब पूछा गया कि क्या अब कोई चांस नहीं है, तो जवाब था, "बस… हो गया।"

करीब बारह घंटे पैडल मारने और सेल करने के बाद टीम ने फ्लेयर छोड़ा। एक सदस्य ने कहा कि अगर वे बस बीस मिनट तेज़ होते तो टापू पर होते, और सबने माना कि वे और अच्छा कर सकते थे। जिमी ने इसे अपने चैनल का अब तक का सबसे मुश्किल चैलेंज बताया। उनके मुताबिक इतना पास आकर चूकना, और वह भी सिर्फ़ इसलिए कि आखिरी पाँच प्रतिशत में ज्वार बदल गया, हार को और भारी बना देता है। उन्होंने कहा कि उन्हें हारना पसंद नहीं और लगता है उन्होंने सबको निराश किया। फिर उन्होंने वादा किया कि अगले चैलेंज वीडियो में वे नहीं हारेंगे, और हेलीकॉप्टर में चढ़ गए। स्क्रीन पर लिखा उद्देश्य, "द्वीप तक पहुँचें", अधूरा रह गया।