आर्कटिक में सात दिन: बर्फ़ की गुफ़ा, जमती उंगलियाँ और एक मछली की तलाश

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अवलोकन

इस वीडियो में जिमी और उनके पाँच दोस्त सात दिन आर्कटिक में बिताने की कोशिश करते हैं। जिमी के मुताबिक़ उनका पिछला सर्वाइवल वीडियो नाकाम रहा था, इसलिए यह चुनौती उनके लिए "रिडेम्पशन" की कोशिश है। शुरुआत में ही बता दिया जाता है कि बचने के लिए उनके पास बस वही है जो उन्होंने पहन रखा है। जिमी कहते हैं कि वीडियो की पहली प्राथमिकता यह है कि कोई मरे नहीं। वीडियो बार-बार इसी सवाल पर लौटता है: क्या यह टीम ठंड, भूख और ख़राब मौसम के बीच सातों दिन टिक पाएगी, या इस बार भी नाकाम रहेगी?

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चुनौती की शर्तें

समूह करीब आधा मीटर बर्फ़ पर खड़ा होकर चुनौती शुरू करता है। जिमी ने किसी को टेंट लाने को नहीं कहा था। रहने के लिए उन्हें बर्फ़ में खुद घर खोदना है। पहले दिन के दो काम तय हैं: शेल्टर बनाना और आग जलाना।

दूसरे दिन बाहर निकलने का नियम भी सामने आता है। हर दिन एक बार एक प्लेन ऊपर से गुज़रेगा। जो फ्लेयर चलाएगा, वह घर जा सकता है, लेकिन उससे पहले उसे अपना सिर शेव करवाना होगा। पूरे वीडियो में यह फ्लेयर एक लगातार लालच की तरह मौजूद रहता है, और कई बार अलग-अलग लोग इसे चलाने के बहुत क़रीब पहुँच जाते हैं।

पहला दिन: बर्फ़ का किला और पहली आग

वीडियो में दावा किया जाता है कि रात में वहाँ इतनी ठंड होती है कि हवा में सिर्फ़ दस मिनट रहने से फ्रॉस्टबाइट हो सकता है, और उस रात तापमान शून्य से नीचे जाने वाला था। इसलिए अंधेरा होने से पहले अंदर पहुँचना ज़रूरी था। बाकी लोग "स्नो फोर्ट" खोदने में लगे रहे। जैसा वीडियो में बताया गया, इसका मकसद आर्कटिक की हवा से बचना और सबकी बॉडी हीट को एक जगह रोककर रखना था। खुदाई के दौरान उन्होंने पाया कि नीचे जाने पर बर्फ़ और सख्त होती जा रही थी।

इस बीच हेज़ फायरवुड ढूँढने गए। उन्हें सूखी, मरी हुई लकड़ी मिल गई, जिसे उन्होंने अपनी अच्छी किस्मत बताया। जब सब पहली बार किले में घुसने की कोशिश करते हैं तो जगह बहुत तंग निकलती है। कोई अंदर आ ही नहीं पाता, और बाकी तभी आराम से रह सकते हैं जब पैर सीधे न फैलाएँ। दिन की रोशनी के बस दो घंटे बचे थे, इसलिए खुदाई और आग जलाने का काम साथ-साथ चलता रहा।

आग जलने के बाद उसके फ़ायदे तुरंत दिखे। दस्ताने सुखाए जा सकते थे और बर्फ़ पिघलाकर पीने का पानी बनाया जा सकता था। उन्होंने बताया कि पानी में बर्फ़ डालते जाने की वजह से वह ठंडा ही रहता है। इसी दौरान एक हादसा भी हुआ। किसी की जैकेट और फिर पैंट्स में आग लग गई, जिसे जल्दी बुझाया गया।

आधी रात तक, यानी तकनीकी रूप से दूसरे दिन की शुरुआत तक, घर इतना बड़ा नहीं हुआ था कि सब उसमें आ सकें। हेज़ और कैमरामैन डेरियस अंदर फिट नहीं हो रहे थे, और एक ने बाहर सोने की बात कही। जिमी के शब्दों में, सब अपनी छोटी, बेआराम गुफ़ा में "मछलियों की तरह ठूँस गए", और वह उनकी सबसे ख़राब नींद थी।

दूसरा दिन: पहला प्रलोभन, शौच की समस्या और घटता खाना

सुबह तक बैग्स और बाकी हर चीज़ पर पाला जम चुका था। कैमरा लगभग जम गया था। एक व्यक्ति के पास दस्ताने नहीं थे और उनका हाथ जम रहा था। किसी और को अपने पैरों की उंगलियाँ महसूस नहीं हो रही थीं। इसी बीच पहली बार प्लेन आया और जिमी ने फ्लेयर वाला नियम समझाया। एक व्यक्ति ने माना कि पिछली रात बहुत बुरी थी, फिर भी उस दिन किसी ने फ्लेयर नहीं चलाया।

इसके बाद शेल्टर बढ़ाना ज़रूरी हो गया। एक सदस्य ने कहा कि पिछली रात जैसी एक और रात हुई तो वे नहीं जानते कि टिक पाएँगे या नहीं। छह लोगों के लिए लक्ष्य रखा गया कि दोनों तरफ़ साथ-साथ सोने की जगह बन जाए। घंटों खुदाई के बाद नई जगह को देखकर एक सदस्य ने इसे "कमाल" बताया।

फिर एक नई समस्या सामने आई: शौच का इंतज़ाम। एक सदस्य को उम्मीद थी कि इसके लिए अलग टेंट होगा। वह पैकिंग लिस्ट में था, लेकिन जिसे लाना था उसके बैग में जगह नहीं थी। एक सदस्य को इसके लिए जगह ढूँढने भेजा गया, क्योंकि कैंप के पास शौच करने से भालू आ सकते थे। उस सदस्य ने बताया कि उन्हें इस पूरे अनुभव की सबसे डरावनी बात यह लगती है कि जानवरों के निशान हमेशा दिखते हैं, पर जानवर कभी नहीं दिखता, जिससे लगता है कि वह लगातार उन्हें देख रहा है। उन्होंने यह भी माना कि उन्होंने फ्लेयर चलाने के बारे में गंभीरता से सोचा है, और यह सिर्फ़ दूसरा दिन होने के बावजूद किसी सामान्य चैलेंज के छठे-सातवें दिन जैसा लग रहा है।

जिमी ने बताया कि वे सिर्फ़ तीन, शायद चार दिन का खाना लाए हैं, और अगर मछली पकड़ना और शिकार शुरू नहीं किया तो वे टिक नहीं पाएँगे। स्क्रीन पर खाने की सप्लाई "दो दिन" दिखाई गई। एक सदस्य को लगा कि उनकी नाक पर फ्रॉस्टबाइट शुरू हो रहा है, क्योंकि वह कुछ जगहों से बैंगनी होने लगी थी। अंधेरा होते-होते तापमान 17°F तक गिरा। वीडियो के मुताबिक़ इतनी ठंड में शेल्टर भी फ्रॉस्टबाइट के ख़तरे से पूरी तरह नहीं बचा पा रहा था।

तीसरा दिन: चैंडलर के पैर, न उड़ने वाला प्लेन और गीली लकड़ी

तीसरे दिन चैंडलर को अपने पैरों की उंगलियाँ महसूस नहीं हो रही थीं। दूसरों ने देखा कि वे सफ़ेद पड़ चुकी थीं, "कोई रंगत ही नहीं"। उन्हें गरम करने के लिए किसी की बगल में रखा गया। टीम ने अनुमान लगाया कि यह शायद फ्रॉस्टनिप है और जल्दी गरम न किया गया तो फ्रॉस्टबाइट बन सकता है। जब पूछा गया कि कोई सिर शेव कराकर जाना चाहता है या नहीं, तो एक व्यक्ति ने कहा कि वह सच में सोच रहा है। तभी ख़बर आई कि बर्फ़ ज़्यादा होने की वजह से पायलट उड़ान नहीं भर सकता। एक सदस्य ने इस विडंबना पर कहा कि जिन दिनों चोट लगने का ख़तरा सबसे ज़्यादा होता है, उन्हीं दिनों प्लेन नहीं आ पाता।

रातभर की बर्फ़बारी से कैंप का नज़ारा बदल गया था। उनकी "किचन" बर्फ़ में दब गई और खाना बनाने का ज़्यादातर सामान खो गया। आग जलाना सबसे बड़ी प्राथमिकता थी, लेकिन सारी लकड़ी गीली थी। एक सदस्य ने लकड़ी को छीलकर पतली परतें, यानी "फ़ेदर्स", निकालीं। उनसे चिंगारी पकड़ी और आख़िरकार आग जल गई।

झील पर पहली कोशिश: ड्रिल छोटी पड़ गई

गरमी के बाद असली सवाल खाने का था। एक सदस्य ऑगर (बर्फ़ में छेद करने का औज़ार) लाए थे। कैंप के पास जमी हुई झील थी, और योजना यह थी कि बर्फ़ में छेद करके मछली पकड़ी जाए। जाने से पहले चैंडलर की हालत देखी गई, जिनका रंग अब लौट रहा था। नोलन ने उनकी देखभाल की "डॉक्टर ड्यूटी" संभाली। जिमी और हेज़ मछली पकड़ने निकले, जबकि बाकी लोग शेल्टर पर काम करते रहे।

उन्होंने झील पर गहरे रंग वाले हिस्से चुने, इस उम्मीद में कि वहाँ बर्फ़ पतली होगी। तेज़ हवा में ड्रिल करते हुए सिखाया गया कि ऑगर को ज़ोर से नीचे नहीं दबाना है, ब्लेड्स को काटने देना है। करीब ढाई फ़ीट खोदने के बाद अनुमान था कि पानी तक करीब एक इंच बचा है, लेकिन ऑगर इससे आगे घूम नहीं पा रहा था। ड्रिल छोटी पड़ गई थी। उसी समय कपड़े पूरी तरह भीग चुके थे और हाइपोथर्मिया का ख़तरा था, इसलिए उन्हें ख़ाली हाथ लौटना पड़ा।

बिना खाने के लौटते हुए जिमी अपने पिछले सर्वाइवल वीडियो के बारे में सोचते रहे, जहाँ वे "सच में फ़ेल" हुए थे। उन्होंने वादा किया कि अगले चैलेंज में वे फिर फ़ेल नहीं होंगे। कैंप में सबका हौसला गिरा हुआ था। एक सदस्य ने मज़ाक में पूछा कि क्या कोई उन्हें बेहोश करके सीधे सातवें दिन जगा सकता है।

स्प्रूस की टहनियाँ: रात बचाने वाला बिस्तर

अब सबसे बड़ा ख़तरा भीगे कपड़े थे। एक सदस्य ने समझाया कि जब यही पानी शरीर के पास जमता है तो जान जा सकती है, और कुछ न किया गया तो किसी को हाइपोथर्मिया हो जाएगा। उपाय के तौर पर पास के स्प्रूस पेड़ की टहनियाँ काटकर बिस्तर बनाया गया। उनका तर्क था कि रात की ज़्यादातर ठंड ज़मीन छूने से आती है, और टहनियाँ इन्सुलेशन देंगी।

जब हेज़ टहनियाँ लेकर आए, तो जिमी ने इसे ऐसे बताया जैसे "क्रिसमस गिफ्ट जल्दी मिल गया हो"। उनके मुताबिक़ पहली बार लगा कि वे रातभर गरम रह पाएँगे। किसी ने इसे "जान बचाने वाली चीज़" कहा।

चौथा दिन: ड्रोन से नदी की खोज

चौथे दिन धूप निकली और मौसम बेहतर लगा, पर जल्द ही आसमान में एक अंधेरा हिस्सा दिखा, जिसका मतलब ब्लिज़र्ड था। साथ ही स्क्रीन पर खाने की सप्लाई "एक दिन" दिखाई गई। जिमी ने कहा कि मछली नहीं पकड़ी तो उस दिन खाना ख़त्म हो जाएगा।

इस बार मछली पकड़ने की जगह ढूँढने के लिए डेरियस का ड्रोन इस्तेमाल हुआ। उनका तर्क था कि जिस बर्फ़ के नीचे पानी बह रहा हो, वहाँ बर्फ़ पतली होगी, और बड़ी नदी में ज़्यादा मछलियाँ होंगी। ड्रोन से एक बड़ी नदी दिखी, लेकिन वह दूर थी: पहले झील, फिर जंगल पार करना था, और लौटते वक़्त मछली भी साथ लानी थी।

झील पार करने के लिए वे क्रॉस-कंट्री स्की लाए थे। जिमी ने माना कि उन्हें स्की करना नहीं आता। उन्हें "शफ़ल, शफ़ल, ग्लाइड" का तरीका सिखाया गया, और डेरियस बार-बार गिरते रहे। जंगल पार करने के लिए उन्होंने स्नोशूज़ पहने। रास्ते में मूज़ के बड़े-बड़े पैरों के निशान मिले, तो उन्होंने वह रास्ता चुना जहाँ मूज़ न हो। थकान इतनी बढ़ी कि पूछे जाने पर एक सदस्य ने कहा कि वे "टूट चुके" हैं। आख़िरकार नदी दिखी। उसी दौरान जिमी का पैर एक गड्ढे में फँस गया और एक टहनी ने उन्हें गिरने से रोका।

कैंप में बाकी लोग शेल्टर बड़ा करते रहे। चैंडलर ने छत से बड़े टुकड़े गिराने का एक नया तरीका निकाला। दूसरों ने इसकी तारीफ़ की, पर यह भी कहा कि छत ही मत गिरा देना। उनका मज़ाक था कि जिमी ने जगह बड़ी करने को कहा था, तो वे उन्हें "मैंशन" देंगे।

नदी पर नाकामी और दूसरा फ्लेयर-प्रलोभन

नदी पर ड्रिल करते हुए जिमी ने खुद को हिम्मत देने के लिए कहा कि आज और आगे के दिनों में भी अच्छा खाना मिलेगा। फिर माना कि उन्हें डर है कि उन्होंने बहुत सारा समय, ऊर्जा और कैलोरी बर्बाद कर दी है।

इसी बीच प्लेन आया। कैंप में मौजूद समूह ने फ्लेयर उठा लिया। एक सदस्य का तर्क था कि वे शेल्टर बना चुके हैं और काफ़ी काम कर चुके हैं, अब चाहें तो फ्लेयर चलाकर घर जा सकते हैं। एक ने कहा कि उनकी उंगली ट्रिगर पर थी और वे चलाने ही वाले थे। दूसरे ने कहा कि यह तकलीफ़ अभी ख़त्म की जा सकती है, बस बाल कटवाने पड़ेंगे। फिर भी किसी ने फ्लेयर नहीं चलाया। नदी पर जिमी उम्मीद कर रहे थे कि उस प्लेन में कोई गंजा नहीं हो रहा होगा, हालाँकि कैंप इतना दूर था कि उन्हें पता भी नहीं चलता।

नदी पर हालात बिगड़ते गए। छेद जिमी के पूरे हाथ जितना गहरा हो चुका था, पर पानी नहीं मिला। उन्होंने कहा कि "साइंस के हिसाब से" नदी पर बर्फ़ पतली होनी चाहिए, लेकिन ऐसा लग नहीं रहा था। नदी के पास गिरते समय जिमी के बूट में गीली बर्फ़ भर गई थी और उनके पैरों की उंगलियाँ लाल और बैंगनी होने लगीं। उन्होंने गरम करने के लिए अपना पैर डेरियस की बगल में रखा। ठंड में करीब तीन घंटे बिताने के बाद जिमी ने फ़ैसला किया कि अब लौटना होगा, वरना सच में किसी को चोट लग सकती है। उन्होंने माना कि शायद वे फिर फ़ेल हो गए हैं।

कैंप लौटकर उन्होंने बताया कि करीब दो मीटर खोदा, चार घंटे मेहनत की, फिर सूरज डूबने लगा। स्क्रीन पर लिखा आया "चौथा दिन, नो फ़ूड"। एक सदस्य ने कहा कि उन्हें फ्लेयर चला देना चाहिए था। हौसला बढ़ाने के लिए सबको बड़ा किया गया शेल्टर दिखाया गया, जहाँ अब इतनी जगह थी कि कोई किसी से नहीं टकराएगा। फिर भी किसी ने कहा कि उन्हें "एक जीत" चाहिए, क्योंकि एक के बाद एक मार पड़ रही है।

पाँचवाँ दिन: आख़िरी दाँव

पाँचवें दिन उनके पास आख़िरी खाना बचा था। जिमी के मुताबिक़ ऐसे हालात के लिए वे कुछ स्नैक्स लाए थे, लेकिन उनके बाद खाना लगभग ख़त्म था। ब्लिज़र्ड आ रहा था, कोई प्लेन या बचाव नहीं आने वाला था। बर्फ़ गीली थी, इसलिए बाहर जाने का मतलब पूरी तरह भीगना था। जिमी ने कहा कि मछली मिल भी जाए, तब भी यह बहुत ख़तरनाक होगा। उन्होंने कैंप में रुकने वालों से गरम पानी तैयार रखने को कहा, यानी एक तरह का "इमरजेंसी स्टेशन", क्योंकि लौटते वक़्त किसी को हाइपोथर्मिया हो सकता है।

जिमी ने साफ़ कहा कि अगर मछली नहीं मिली तो उनके हिसाब से कल सब फ्लेयर चला देंगे। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले वीडियो में वे "आईलैंड के पास तक" पहुँचे थे पर कर नहीं पाए थे, और वे एक और वीडियो फ़ेल नहीं करना चाहते। ब्लिज़र्ड की वजह से इस बार स्की छोड़ दी गई ताकि कम सामान उठाना पड़े, हालाँकि इससे सफ़र लंबा होना था। पिछले दिन बनाया रास्ता बर्फ़ से मिट चुका था। जिमी उसी जगह फिर फँस गए जहाँ पिछले दिन फँसे थे।

कैंप में बचे लोगों के सामने अलग चुनौती थी। जिन्हें आग जलाना आता था, वे सब चले गए थे, और लकड़ी पूरी तरह भीगी थी। उन्हें एक सूखा पेड़ मिला जो अंदर से सूखा था। उसे पतला-पतला काटकर उन्होंने आग शुरू करने का सामान बनाया।

नदी पर ऑगर वहीं पेड़ के पास मिला जहाँ छोड़ा गया था। किसी ने इसकी तुलना "एक्सकैलिबर" से की। वह शायद जम गया था, लेकिन पुराना छेद मौजूद था। जिमी ने सोचा कि जहाँ नदियाँ मिलती हैं वहाँ पानी ज़्यादा हिलता होगा और बर्फ़ पतली हो सकती है। जिमी ने कहा कि उनका तर्क सीधा है: खाना मतलब गरमी, न खाने से ठंड, ठंड से हाइपोथर्मिया, "और फिर गेम ख़त्म"। आख़िरकार हेज़ ने पानी तक पहुँचने की ख़बर दी। वहाँ बर्फ़ करीब बीस सेंटीमीटर ही थी। चारे के लिए थोड़ा जमा हुआ खाना इस्तेमाल किया गया।

सात घंटे बाद दो मछलियाँ

चार घंटे बाद भी कुछ हाथ नहीं आया था। जिमी ने माना कि उन्हें बहुत ठंड लग रही है और भरोसा कम हो रहा है। उन्हें डर था कि कैलोरी की कमी से रात में सब बहुत ठंडे पड़ जाएँगे, और अगर बर्फ़बारी बढ़ी तो शायद चैलेंज रोकना पड़े। उन्होंने कहा कि वे लगातार दो चैलेंज फ़ेल नहीं करना चाहते, उन्हें फ़ेल होना बिल्कुल पसंद नहीं, इसलिए जितना समय लगे बैठे रहेंगे।

इसी "मोनोलॉग" के बीच मछली फँस गई। ऊपर आते समय वह बगल से निकल रही थी और होंठ पर अटकी थी। एक सदस्य ने उसे हाथ से पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह छूटकर वापस चली गई। उस सदस्य ने बताया कि उन्होंने पहले कभी नंगे हाथों से मछली नहीं पकड़ी थी। साथियों ने कहा कि ऐसा होता है, और याद दिलाया कि ये मछलियाँ झुंड में रहती हैं, यानी एक है तो आसपास और भी होंगी। इसके बाद जिमी के धागे पर फिर मछली फँसी और उन्होंने उसे धीरे-धीरे छेद से निकाल लिया। कुछ देर बाद हेज़ के धागे में हलचल हुई और "टेंशन बनाए रखो, धीरे खींचो" की हिदायत के बीच दूसरी मछली भी निकल आई। एक सदस्य ने बताया कि उन्होंने घंटों से पानी नहीं पिया और सिर दर्द कर रहा है। वीडियो के मुताबिक़ सात घंटे की फिशिंग के बाद दो मछलियाँ हाथ आईं।

कैंप में इस बीच आग जल चुकी थी और पानी तैयार था। लौटकर जिमी ने पहले ऐसा जताया जैसे कुछ न मिला हो, फिर बैग से मछली निकाली। पहली मछली पकाकर सबने खाई। एक सदस्य ने कहा कि उन्होंने शायद कभी इतनी ताज़ा मछली नहीं खाई। दूसरी मछली छठा दिन निकालने के लिए बचाई गई।

छठा दिन: मज़े का दिन और दस साल पर चिंतन

छठे दिन प्लेन आने पर जिमी ने मज़ाक में फ्लेयर चलाने की बात कही। उनके मुताबिक़ पाँच "जानलेवा" दिनों के बाद बॉयज़ थोड़ा मज़ा डिज़र्व करते थे, और सातवें दिन तक पहुँचने पर उनके लिए एक सरप्राइज़ था। एक सदस्य ने माना कि मछली मिलने से पहले वे निकलने वाले थे और यह उनका अब तक का सबसे मुश्किल चैलेंज था।

यहाँ वीडियो पुराने पलों की झलकियों के साथ पीछे मुड़कर देखता है। जिमी कहते हैं कि वे करीब दस साल से ऐसे सर्वाइवल वीडियो बना रहे हैं। इनमें ज़िंदगी के कुछ सबसे बुरे पल रहे हैं, पर कुछ सबसे अच्छे पल भी। उनके मुताबिक़ ऐसे वीडियो फ़िल्म करते हुए, दोस्तों के साथ दुनिया से कटी गुफ़ा में मज़ाक करते हुए, उन्हें सबसे ज़्यादा मज़ा आता है। उन्होंने कहा कि जो वीडियो "थ्योरी में बहुत बेकार होना चाहिए था", उसमें अच्छे पल इन्हीं दोस्तों की वजह से आते हैं। उन्होंने दोस्तों और दर्शकों दोनों का आभार जताया और कहा कि बचपन में वे जिस ज़िंदगी का सपना देखते थे, वही आज जी रहे हैं।

दिन का बाकी हिस्सा खेल में बीता: स्नोबॉल, बर्फ़ पर फिसलना और भीगना। एक सदस्य ने छठे दिन को "दस में से दस" कहा। आख़िरी रात के लिए बचाकर रखे गए स्मोर्स निकाले गए और सबने चॉकलेट के साथ दिन ख़त्म किया। सोने से पहले जिमी ने इशारा किया कि कल वे हेलीकॉप्टर से नहीं जाएँगे। जब पूछा गया कि जा तो रहे हैं ना, तो जवाब मिला: "डिपेंड करता है।"

सातवाँ दिन: वापसी का सरप्राइज़

सातवें दिन जिमी ने पहले मज़ाक किया कि वे एक हफ़्ता और यहीं रहेंगे। फिर शर्त रखी कि जब तक हर कचरा साफ़ नहीं होगा, कोई नहीं निकलेगा। सफ़ाई के बाद पता चला कि फ्लेयर एक "सीक्रेट सिग्नल" था, और लेने के लिए हेलीकॉप्टर नहीं बल्कि आर्कटिक कुत्तों का एक झुंड आया था। जिमी ने इसे इससे ज़्यादा "आर्कटिक वाली चीज़" बताया जो हो ही नहीं सकती। डॉग स्लेज पर सवार होकर समूह घर की ओर निकला। किसी ने गरम शावर का इंतज़ार न कर पाने की बात कही।

इस बार की कहानी पिछली नाकामी के उलट ख़त्म होती है। फ्रॉस्टनिप, ख़त्म होता खाना, मोटी बर्फ़ पर दो नाकाम कोशिशें और फ्लेयर चलाने के कई लगभग-फ़ैसलों के बावजूद किसी ने सिर शेव कराकर चुनौती नहीं छोड़ी, और छहों लोग सातवें दिन तक पहुँचे।