जंगल में 20 दिन: सर्वाइवल का ज्ञान जीतता है या सामान?

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अवलोकन

MrBeast ने सौ लोगों को जंगल के बीच छोड़ दिया और एक सवाल की परीक्षा ली: सर्वाइवल में ज्ञान ज़्यादा काम आता है या संसाधन? नीले कपड़ों में पचास सर्वाइवल एक्सपर्ट्स थे और लाल कपड़ों में पचास एमेच्योर्स, जिनके बारे में MrBeast ने कहा कि वे "शायद जंगल के लिए बने ही नहीं हैं।" नियम सरल था। चैलेंज से बाहर निकलने का एक ही तरीका था: अपना फ्लेयर जलाओ और रेस्क्यू का इंतज़ार करो। मदद आने तक जिस टीम के सबसे ज़्यादा सदस्य टिके रहेंगे, वह 2,50,000 डॉलर आपस में बाँटेगी। बीस दिनों में यह मुकाबला शेल्टर और भूख से आगे बढ़कर भरोसे, टीमवर्क और आपसी झगड़ों की परीक्षा बन गया।

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शुरुआत: एक टीम के पास अनुभव, दूसरी के पास सामान

ब्लू टीम से पूछा गया कि वे जंगल में सबसे ज़्यादा कितने दिन रहे हैं। जवाब था तीन महीने, और वह भी "मज़े के लिए।" रेड टीम में जब पूछा गया कि कितने लोग यहाँ एक महीना टिक सकते हैं, तो MrBeast की प्रतिक्रिया थी कि उधर तो इनका गेम खत्म है।

MrBeast को पता था कि ब्लू टीम को बढ़त मिलेगी। इसलिए शुरुआत से पहले उन्होंने रेड टीम को चैलेंज के बारे में बता दिया और उसे एक स्टोर ले गए, ताकि सर्वाइव करने के लिए जो चाहिए वह खरीद सके। रेड टीम के सदस्यों ने रस्सी, टार्प, पानी का पूरा चौबीस बोतलों वाला पैक और लाइटर लिया। किसी के हिस्से बच्चों वाला टेंट भी आया। एक सदस्य ने कहा कि वे "अपने तरीके से प्रोफेशनल्स" हैं और ब्लू टीम को हरा देंगे। एक और सदस्य ने माना कि वह बस वही कर रहा है जो फ़िल्मों में देखा है।

ब्लू टीम को सिर्फ़ इतना बताया गया था कि उन्हें MrBeast के एक वीडियो में मुकाबला करना है। जगह का पता नहीं था, इसलिए उन्होंने हर मौसम का सामान पैक किया। एक सदस्य ने सोचा था कि उन्हें अलास्का ले जाया जाएगा। उनकी योजना टहनियों और पत्तों से छोटे शेल्टर बनाने की थी, जिन पर ठंड से बचने के लिए मोटी परत डालनी होती है। करीब दस साल से यह सब सीख रहे एक सदस्य ने कहा कि सामान जुटाने के लिए दस लोग चाहिए। एक टिप्पणी में ब्लू टीम का वर्णन यूँ किया गया: "इनकी हॉबी जंगल में तकलीफ़ झेलना है।"

पहली रातें: अप्रत्याशित रूप से एक्सपर्ट्स पहले टूटे

पहली ही रात में साफ़ हो गया कि रेड टीम को मिले सामान ने उसके लिए चीज़ें बहुत आसान बना दी थीं। तापमान गिरा तो एक्सपर्ट्स के लिए आँखें बंद रखना भी मुश्किल हो गया। ब्लू टीम के एक सदस्य ने बताया कि ज़मीन बहुत ठंडी थी और सब कुछ गीला था, इसलिए नींद बिल्कुल नहीं आई। उसने थकान और डिहाइड्रेशन की शिकायत की और सवाल किया कि वह यहाँ कर क्या रहा है।

पहला फ्लेयर ब्लू टीम से जला। दूसरे व्यक्ति ने, जो 66 साल के हैं और जिनके दोनों घुटने रिप्लेस हो चुके हैं, माफ़ी माँगते हुए चैलेंज छोड़ दिया। MrBeast के शब्दों में हैरानी की बात यह थी कि पहले दोनों बाहर होने वाले ब्लू टीम के एक्सपर्ट्स थे। उधर रेड टीम अपने सामान के सहारे बाहर भी आराम से सो रही थी और सुबह की धूप का आनंद ले रही थी।

एक्सपर्ट्स समझ गए कि शेल्टर जल्दी ठीक नहीं हुए तो और लोग निकल जाएँगे। उनके मुताबिक ये शेल्टर सिर्फ़ लकड़ियों का ढेर नहीं थे। इनके ऊपर करीब एक फुट मोटी पत्तियों की परत डालनी पड़ती है, और बारिश आने पर यही परत बचाएगी। इस काम में सबको हाथ लगाना पड़ा। रेड टीम ने भी बारिश से बचने के लिए एक छत बनाई, ताकि खाना सुरक्षित और सूखा रहे। MrBeast ने मज़ाक में कहा कि अगला सर्वाइवल वीडियो करने से पहले इनसे टिप्स लेने पड़ेंगे।

तीसरा दिन: मेहनत का फल और खाली पेट

वीडियो के वर्णन के अनुसार एक्सपर्ट्स अपने सीमित संसाधनों का पूरा इस्तेमाल कर रहे थे, जबकि एमेच्योर्स अपनी बढ़त तेज़ी से गँवा रहे थे। एक्सपर्ट्स की मेहनत अब दिखने लगी थी। एक सदस्य ने अपने शेल्टर को "फोर सीज़न्स से भी बेहतर" बताया। तीसरे दिन ब्लू टीम ने बताया कि गर्म शेल्टर की वजह से वे "बच्चे की तरह सोए।" उस वक्त तक उन्होंने कुछ खाया नहीं था, फिर भी मज़े कर रहे थे।

रेड टीम ने अपने दिन की शुरुआत भूख से की। उसने पहले दो दिनों में अपने सारे स्नैक्स खत्म कर दिए थे। MrBeast ने टिप्पणी की कि पार्टी मिक्स ज़्यादा से ज़्यादा पैंतालीस मिनट टिकता है। रेड टीम खाना और पानी ढूँढने निकली।

दूसरी तरफ़ ब्लू टीम में वाइल्डरनेस सर्वाइवलिस्ट सेथ की "फ़ॉरेजिंग क्लास" शुरू हो गई। सेथ की जानकारी की वजह से ब्लू टीम ने जंगल को ही किराने की दुकान बना लिया। उन्होंने ऐसी चीज़ें पहचानीं जिन्हें रास्ते में तोड़कर स्नैक की तरह खाया जा सके, और पास की नदी के लिए लकड़ियों से फ़िश ट्रैप भी बनाया। एमेच्योर्स ने अपना फिशिंग गियर आज़माया, पर उनके हाथ सिर्फ़ कचरा लगा।

छिपा हुआ खाना और भरोसे का पहला संकट

चौथे दिन तक खाने की कमी मज़ाक की बात नहीं रही। रेड टीम ने रेडियो पर बताया कि उसका खाना खत्म हो चुका है। इसके लिए MrBeast ने पहले से योजना बना रखी थी। उन्होंने पूरे जंगल में खाने के छोटे-छोटे भंडार छिपा दिए थे, जिनमें चुकंदर और सेब जैसी चीज़ें थीं। उनके अनुसार खाना इतना था कि सही से चलाया जाए तो सर्वाइव किया जा सके। दोनों टीमों ने खाना बाँटने के लिए कम्युनिटी पैंट्री बनाई। रेड टीम के एक सदस्य ने कहा कि सबसे ज़रूरी यह है कि कोई किसी के खिलाफ़ न हो।

ब्लू टीम में जूलिया की योजना कुछ और थी। जूलिया ने मिला हुआ खाना छिपाने की बात कही। उनका तर्क था कि यह खाना दूसरों के नियंत्रण में गया तो वे उस पर टूट पड़ेंगे। तब न हफ़्ते भर भूखे रहने को तैयार लोगों के लिए कुछ बचेगा, न उनके लिए जो तैयार नहीं हैं। एक्सपर्ट्स ने भंडारों से मिले खाने से बड़ा डिनर बनाया, जिस पर कुछ सदस्यों ने इसे "पागलपन" कहा, और माहौल गरमा गया।

रैंडी के शक ने एक नई मुश्किल सामने रखी। कुछ सदस्य कैंप छोड़कर गए, तो उनके शेड में खाने का भंडार मिला, जिसमें आलू भी थे। मुश्किल यह थी कि खतरा अपने ही टीममेट्स से था। एक सदस्य ने कहा कि वे ग्रुप में योगदान नहीं दे रहे थे, इसलिए उनका जाना अच्छा रहा। रैंडी ने याद दिलाया कि गेम जीतने के लिए लोगों का टिके रहना ज़रूरी है। टीम पाँच लोग खो चुकी थी, और रैंडी ने सबसे वादा लिया कि अगले दिन कोई नहीं जाएगा।

यह पेप टॉक काम नहीं आई। एक सदस्य ने कहा कि वह कभी ऐसे गेम में नहीं रहा जहाँ अपने ही टीममेट्स पर भरोसा न किया जा सके। लोग खुद बाहर होते रहे और झगड़े चलते रहे, जैसे इस पर कि ग्यारह लोगों में सेब कैसे बँटेंगे। एक एक्सपर्ट ने अपनी टीम के बारे में कहा कि यहाँ पचास सर्वाइवलिस्ट हैं, यानी "कंट्रोल फ्रीक्स" और "टाइप ए" लोग, और हर कोई इंचार्ज बनना चाहता है। पाँचवें दिन तक एक्सपर्ट्स रेड टीम से नौ लोग पीछे थे। MrBeast के अनुसार अगर उन्हें यह गेम सर्वाइव करना था तो साथ रहना सीखना पड़ता।

रेड टीम: बाँटकर चलने की रणनीति, पर भूख भारी

रेड टीम ने साथ आकर संसाधन बाँटने की रणनीति अपनाई, और वीडियो के अनुसार इससे उसे टिके रहने में मदद मिल रही थी। हर किसी से एक ही सेब लेने को कहा गया। एक सदस्य ने बताया कि उसे सुबह छह अंडे खाने की आदत है और अब बस एक सेब खा रहा है।

पर हर कोई दिन में एक सेब पर जीने को तैयार नहीं था। सदस्यों ने ऊर्जा की कमी और तेज़ सिरदर्द की शिकायत की। कोई "वॉफल हाउस का बुफ़े" याद करने लगा। वीडियो के अनुसार इसी भूख की वजह से रेड टीम के पहले छह लोग बाहर हुए। उनसे पूछा गया कि सबसे मुश्किल क्या है, तो जवाब था खाना, धूप और कीड़े, "मतलब लगभग सब कुछ।"

फिर भी रेड टीम का आत्मविश्वास बना रहा। चार लोगों के "मैंशन" वाले समूह ने कहा कि उनका शेल्टर प्रोफेशनल्स से "सौ प्रतिशत बेहतर" है। जब MrBeast ने ढलान पर बारिश का पानी आने की आशंका जताई, तो एक सदस्य ने खुद को "हद से ज़्यादा पॉज़िटिव" बताया। एक और सदस्य का अनुमान था कि ज़्यादातर प्रोफेशनल्स घर जा चुके होंगे, क्योंकि सब एक्सपर्ट हैं तो सब इसी पर भिड़ रहे होंगे कि क्या करना है। वीडियो ने टिप्पणी की कि यह अनुमान "ज़्यादा गलत नहीं था।" ब्लू टीम में तभी बहस चल रही थी कि आज खाना न खाया जाए, क्योंकि पचास लोगों के लिए यह ज़्यादा दिन नहीं चलेगा। एक सदस्य ने कहा: "ये आराम नहीं है। ये सर्वाइवल है।"

लोगों को रोकने के लिए रेड टीम की शेफ़ ब्रिटनी ने अगली सुबह नाश्ता बनाने की कोशिश की, लेकिन उसकी समीक्षाएँ खराब रहीं। एक सदस्य ने कहा कि पेट खराब हो रहा है। ब्लू टीम ने कई दिनों की तनातनी के बाद एक ड्रम सर्कल से दिन शुरू किया, पर इससे भी आपसी लड़ाई नहीं रुकी। खाना बनाने से पहले काउंटर साफ़ करने जैसी बात पर बहस हुई। एक सदस्य ने स्वीकार किया कि टीम का हिस्सा बनना उनके लिए मुश्किल है, क्योंकि वह स्वभाव से हर बात के खिलाफ़ हो जाते हैं। नतीजा और एलिमिनेशन के रूप में निकला। रेड टीम के फल खत्म हुए और नाश्ता बंद हुआ, तो दो और सदस्य चले गए।

MrBeast ने यहाँ दर्शकों से कहा कि जैसे टीमों को नहीं पता कि दूसरी तरफ़ कौन बचा है, वैसे ही दर्शकों को भी वीडियो के अंत तक यह पता नहीं चलेगा।

सातवाँ दिन: पचास डिब्बों का धैर्य-परीक्षण

सातवें दिन MrBeast ने एक विमान से दोनों टीमों पर बैग गिराए। हर टीम को खाने के पचास डिब्बे मिले। शर्त यह थी कि बहत्तर घंटे बाद जो टीम ज़्यादा बिना खुले डिब्बे लौटाएगी, उसे इनाम मिलेगा। अगर दोनों बराबर रहीं तो किसी को कुछ नहीं मिलेगा।

रेड टीम में पहली प्रतिक्रिया थी "सब खा डालते हैं!" फिर एक सदस्य ने तर्क दिया कि ब्लू टीम सोचेगी कि वे भूखे हैं और डिब्बे खोल देंगे। इसलिए रेड टीम ने डिब्बे पूरी तरह ज़मीन में गाड़ने और अनुशासन रखने का फ़ैसला किया। ब्लू टीम ने भी डिब्बे जंगल में इस तरह छिपाए कि सिर्फ़ कुछ लोगों को उनकी जगह पता हो। टीम के एक सदस्य को आशंका थी कि डिब्बे न खोले जाने की बात पता चली तो कुछ लोग चले जाएँगे।

आठवें दिन रेड टीम को जंगल में एक पुराना चारकोल ग्रिल मिला और मौसम थोड़ा ठंडा हुआ। वीडियो के अनुसार थोड़ा खाना और मौसम का बदलना मनोबल पर साफ़ असर डाल रहा था। ब्लू टीम की हालत उतनी अच्छी नहीं थी। पॉइज़न आईवी फैल रही थी, ट्रैप अब तक खाली थे, और एक सदस्य ने कहा कि वह टूथपेस्ट तक खा ले। ऊपर पड़े पचास डिब्बे उन्हें लगातार ललचा रहे थे। क्रेफ़िश ढूँढते हुए एक सदस्य का सामना साँप से भी हुआ।

पहला तूफ़ान

दिन के आखिर तक एक बड़ा तूफ़ान आने की खबर मिली, जिसमें टोर्नेडो की आशंका भी थी। एक सदस्य के मुताबिक दस मिनट में तापमान करीब पंद्रह डिग्री गिर गया। तेज़ हवा चली तो शेल्टर हिलने लगे। ब्लू टीम ने अपने शेल्टर में सिमटकर तूफ़ान झेला, और एक सदस्य को लगा कि रेड टीम इसे उतने अच्छे से नहीं संभाल पा रही होगी।

रेड टीम में टेंट उड़ गए और कई लोगों को कैंप में मौजूद विमान के अंदर शरण लेनी पड़ी। एक सदस्य खुद को इस विचार से संभालता रहा कि वह सच में MrBeast के वीडियो में है और इतने पैसों के लिए मुकाबला कर रहा है। अगली सुबह पत्तों, पेड़ों और मनी बॉक्स पर पाला जमा था, विमान की कुर्सियाँ जम गई थीं, और रेड टीम का फ़ायर पिट पानी में डूब चुका था। ब्लू टीम में एक सदस्य ने तसल्ली दी कि उन्हें इतनी ठंड लग रही है तो रेड टीम को भी लगी होगी। इस बारिश के बाद रेड टीम के छह और ब्लू टीम के दो लोग घर चले गए।

इनाम का दिन: बराबरी, और उसकी कीमत

दोनों टीमें उम्मीद कर रही थीं कि तूफ़ान के बीच दूसरी टीम ने डिब्बे खोल दिए होंगे। MrBeast ने नतीजे बताए। ब्लू टीम ने पचास डिब्बे लौटाए, दो डिब्बे गिरे ज़रूर थे पर गिनती पचास ही रही। रेड टीम ने भी पचास डिब्बे लौटाए। नियम के मुताबिक किसी को इनाम नहीं मिला।

इसका असर तुरंत दिखा। MrBeast के अनुसार नतीजा बताते ही तीन लोग बाहर हो गए, और फिर संख्या पाँच तक पहुँच गई। ब्लू टीम के कुछ सदस्यों ने माना कि उन्हें डिब्बे न खाने का पछतावा है। वीडियो के अनुसार ब्लू टीम का मनोबल एकदम नीचे चला गया। अगली सुबह टीम ने बताया कि रात में तीन लोग गए, और नींद की कमी और भूख अब असर दिखा रही थी।

सेथ का जाना और बढ़ती रकम

सबसे बड़ा झटका सेथ का जाना था। सेथ ने बताया कि उन्होंने सबको हर मौसम झेलने लायक शेल्टर बनाना सिखाया और पूरी कोशिश की कि सब जीतने के लिए तैयार हों। उनका मानना था कि ब्लू टीम जीतेगी, पर वह अपने बिज़नेस से और दूर नहीं रह सकते थे। टीम ने उन्हें "द गोट" और "असली सर्वाइवलिस्ट" कहकर विदा किया। एक और सदस्य ने कहा कि परिवार, यानी पत्नी और बेटी, के पास लौटना है। किसी और ने रोज़ वज़न घटने की चिंता जताई, कि शरीर बंद होने से पहले बहुत देर टिकने लायक वज़न ही नहीं है। मायमोना के जाने पर टीम ने मज़ाकिया अंदाज़ में "रेस्ट इन पीस" कहा, और किसी ने तुरंत उनके हिस्से की बीन्स पर दावा कर दिया।

यहाँ से एक नया पहलू सामने आया। कुछ सदस्यों के लिए दूसरों का जाना "का-चिंग" था, क्योंकि हर व्यक्ति के जाने से जीतने पर बाकी लोगों का हिस्सा बढ़ता जाता है। MrBeast ने कहा कि दर्शकों को नहीं पता यह हिस्सा कितना है, क्योंकि उन्हें नहीं पता कितने लोग बचे हैं, पर रकम अब "हज़ारों डॉलर्स" तक पहुँच रही थी।

रेड टीम में लोग कम होने के साथ बचे हुए सदस्यों पर ज़िम्मेदारियाँ बढ़ीं। ब्रिटनी के जाने के बाद एक सदस्य ने आधी कुकिंग संभाली, दूसरे सदस्यों ने चाइव्स और गाजर काटीं, और उस सदस्य को लगा कि खाना अच्छा बना। एक सदस्य ने कहा कि उसने खुद को साबित कर दिया कि वह जितना सोचता था उससे कहीं ज़्यादा कर सकता है।

दूसरा तूफ़ान और टार्प का झगड़ा

एक और बड़ा तूफ़ान आया। ब्लू टीम में कोई अपने "एयरबीएन-बीस्ट" का दरवाज़ा मज़बूत कर रहा था और हॉली की पत्तियों से दरारें भर रहा था। फिर घंटों तेज़ बारिश हुई। करीब पाँच घंटे की बारिश के बाद ब्लू टीम के जूते, मोज़े और कपड़े भीग गए, सोने की जगहें भी गीली हो गईं। एक सदस्य की झोपड़ी में पानी घुस आया।

इसी बीच टार्प पर विवाद छिड़ा। कुछ सदस्यों ने टीम का इकलौता टार्प लेकर उसके नीचे सिर्फ़ बीन्स और चावल रखे थे और किसी को वहाँ खड़े होने नहीं दे रहे थे। उनका कहना था कि टार्प खाना सूखा रखने के लिए है और यह "हमारा इकलौता शेल्टर" है। दूसरा पक्ष कहता रहा कि वह कम्युनिटी शेल्टर था। एक सदस्य ने कहा कि अब सबकी सहनशक्ति जवाब देने लगी है।

उधर रेड टीम के एक सदस्य पानी भरकर टेंट में पढ़ने और झपकी लेने जा रहे थे। उनके लिए ये "सबसे आसान" और "फ़िलर डेज़" थे।

चौदहवाँ दिन: बटन वाला चैलेंज

चौदहवें दिन MrBeast ने दोनों टीमों के सामने बक्सों का एक जैसा सेट रखा। हर बक्से में एक ज़रूरी सर्वाइवल चीज़ थी। जो टीम पहले बटन दबाती, उसे वह चीज़ मिलती और दूसरी को कुछ नहीं। दोनों टीमें किसी चीज़ को ठुकरा देतीं तभी अगला बक्सा खुलता। अगर दोनों हर बक्सा ठुकरा देतीं, तो दोनों को सब कुछ मिल जाता।

पहला बक्सा फिशिंग गियर का था। एक टीम ने कहा कि उस नदी में मछली ही नहीं है, इसलिए यह बेकार है, और दोनों ने इसे छोड़ दिया। दूसरा बक्सा कास्ट आयरन के बर्तनों का था। रेड टीम में किसी ने सुझाव दिया कि बटन दबा दो ताकि उन्हें कुछ न मिले, पर "हमें सब मिल सकता है" वाला तर्क जीता। तीसरा बक्सा Feastables पीनट बटर कप्स का था। इसे छोड़ना सबसे मुश्किल लगा, पर यह भी पास हुआ। चौथा बक्सा बिल्डिंग सप्लाई का था, जिसे एक टीम ने "आसान पास" कहा क्योंकि शेल्टर पहले से बने थे।

आखिरी बक्से से पहले MrBeast ने चेताया कि अगर इस बार दूसरी टीम ने बटन दबाया तो तुम्हें कुछ नहीं मिलेगा। रेड टीम में राय बँटी हुई थी। कुछ का तर्क था कि कोई नहीं दबाएगा तो सब बराबर हो जाएँगे, और ब्लू टीम कम सामान वाली टीम को सब कुछ क्यों लेने देगी। दूसरों का कहना था कि पहले देखना पड़ेगा बक्से में क्या है। ब्लू टीम ने अपनी तरफ़ से यह निष्कर्ष निकाला कि दूसरी टीम आखिरी बटन दबाएगी, इसलिए उन्हें खुद अगले बक्से पर दबा देना चाहिए।

आखिरी बक्से में पूरी टीम के लिए स्टीक, Jack Link's और सीज़निंग्स थे। ब्लू टीम में पैट्रिक ने तुरंत बटन दबा दिया, जबकि रेड टीम अभी "रुको, रुको" कह रही थी। रेड टीम के एक सदस्य के अनुसार किसी ने बटन इसलिए नहीं दबाया क्योंकि सब पहले बात करना चाहते थे।

पैट्रिक की फुर्ती से ब्लू टीम को फ़ायदा मिला, पर वीडियो के अनुसार बाकी लोगों की राय नज़रअंदाज़ करने से टीम में तुरंत दरार भी पड़ गई। एक सदस्य ने विरोध में कहा "मैं वेजिटेरियन हूँ!" और जवाब मिला "किसे फ़र्क पड़ता है?!" फिर भी दो हफ़्ते से ज़्यादा समय में यह पहला मौका था जब ब्लू टीम को विरोधियों से ज़्यादा कुछ मिला। स्टीक को "क्रिसमस और थैंक्सगिविंग से भी बेहतर" कहा गया, और एक सदस्य ने बताया कि प्रोटीन खाने से ऊर्जा लौट आई।

रेड टीम में नाराज़गी रही। एक सदस्य ने कहा कि वे बर्तन चाहती थी और आइज़ैया से भरोसा करने की गुहार लगाई थी। अब खाने में काला-काला कुछ आ रहा था, क्योंकि पैन के लिए बटन नहीं दबाया गया था।

मांस खत्म, झगड़े शुरू

मांस खत्म होते ही ब्लू टीम के सामने नई समस्या खड़ी हुई। ट्रिंह ने अपना हिस्सा बढ़ाने के लिए एक योजना बनाई, और टीम में कुछ लोगों को ट्रिंह का रवैया खटकने लगा। टार्प पर "सेल्फ़िश" कहे जाने को लेकर फिर बहस हुई, इस बार उस शेल्टर को तोड़ने की बात पर जिसमें कुछ लोग रह रहे थे। एक सदस्य ने कहा कि अब सर्वाइवल वाला हिस्सा सबसे मुश्किल नहीं रहा।

पैट्रिक भी चले गए। पैट्रिक ने बताया कि उनका करियर "गुड एनर्जी और गुड वाइब्स" पर बना है और वह टीममेट्स के उदास होने पर उन्हें हँसाने के लिए बैकफ़्लिप करते हैं। पैट्रिक को लगा था कि उन्होंने जीतने लायक काफ़ी कर दिया है। दूर से रेड टीम ने चीखें और तालियाँ सुनीं और अंदाज़ा लगाया कि किसी ने फ्लेयर जलाया है और ब्लू टीम शायद टूटने वाली है।

सत्रहवें दिन ब्लू टीम में लंच को लेकर कहासुनी हुई। एक सदस्य ने कहा कि उसे किसी को जवाब देने की ज़रूरत नहीं। एक और बहस इस पर थी कि किसी को थोड़े चावल लेने देने पर सहमति बनी थी या नहीं। जोल ने कहा कि वह बस जीतकर जाना चाहते थे और जाते वक्त मन में कड़वाहट रह जाने का डर है। एक सदस्य ने खुलकर कहा कि कुछ लोगों के जाने से उसे अच्छा लग रहा है।

रेड टीम की एकजुटता, और उसकी सीमाएँ

वीडियो के अनुसार रेड टीम के लोग सच में एक-दूसरे को पसंद करते थे। वे कहते रहे कि साथ मिलकर काम करें तो अब भी ब्लू टीम को हरा सकते हैं, पर एक सदस्य ने माना कि लोग जितने कम होंगे, जीतने की संभावना उतनी घटेगी। MrBeast ने इस दौर का वर्णन यूँ किया कि ब्लू टीम टूट रही थी और रेड टीम एकजुट हो रही थी, सिर्फ़ सर्वाइव नहीं कर रही थी बल्कि मज़े से टिकी हुई थी। रेड टीम के सदस्य नदी पर आराम करने गए।

फिर भी कैंप में तीखे झगड़े दिखे। किसी को "फ़ेक" कहा गया, और किसी के बारे में कहा गया कि वह कुकिंग के अलावा कुछ नहीं करती और खाना भी बेस्वाद है। जिन पर ये बातें कही गईं, उनके साथियों ने कहने वालों को "बुलीज़" और "मीन गर्ल्स" कहा। इसी दौरान किसी ने एक बड़ी मछली पकड़ी, जिसे टीम ने मिलकर साफ़ करके पकाया। झगड़े से आहत एक सदस्य ने यह कहते हुए विदा ली कि वह जीत नहीं पाई, पर अपना सबसे अच्छा दिया। जाने वाले एक और सदस्य ने कहा कि जो चीज़ सही हो उसमें मन को शांति मिलती है, और यहाँ अब वह शांति नहीं मिल रही।

MrBeast ने इस दौर पर टिप्पणी की: जंगल में अकेले सर्वाइव करने की ट्रेनिंग होना एक बात है, और ग्रुप के साथ सर्वाइव कर पाना दूसरी।

इसके बाद लगातार पाँच दिन कोई फ्लेयर नहीं जला। ब्लू टीम में अमेलिया चली गईं, और एक सदस्य ने ट्रिंह को बहुत सेल्फ़िश बताया। उस सदस्य ने चेताया कि अगर रेड टीम सिर्फ़ एक व्यक्ति से आगे निकलकर जीत गई, तो दूसरों के जाने पर खुश होने वालों के पैसे भी डूबेंगे। कभी पचास लोगों वाली टीम में अब बहुत कम लोग बचे थे, और वे किसी चैलेंज या एक्सट्रैक्शन डे का इंतज़ार कर रहे थे।

अंतिम चैलेंज: फ्लेयर गन की खोज

तीन हफ़्ते बाद MrBeast एक नक्शा और एक फ्लेयर गन लेकर आए। टीमों को नक्शे पर वह जगह चिह्नित करनी थी जहाँ फ्लेयर गन छिपाई जाएगी। जो टीम पहले फ्लेयर गन ढूँढती, वही उसे चलाकर तय करती कि वीडियो कब खत्म होगा: आज, पाँच दिन बाद या दस दिन बाद। दूसरी टीम के हाथ में कुछ नहीं होता। पर MrBeast ने याद दिलाया कि फ्लेयर चलाने के वक्त दूसरी टीम के पास ज़्यादा लोग हुए तो फ्लेयर चलाने वाली टीम हार जाएगी।

छिपाने की रणनीति में एक टीम ने सोचा कि विरोधी सीमा के पास ढूँढेंगे, इसलिए उसे अंदर और दूर रखा जाए ताकि उन्हें ज़्यादा मेहनत करनी पड़े और खूब कैलोरी जले। एक सदस्य ने कहा कि अगर किसी टीम ने इसे दो हफ़्ते तक अपने पास रखा तो वे सच में "सनकी" होंगे।

आँखों की पट्टी हटते ही खोज शुरू हुई। MrBeast ने एमेच्योर्स से उनकी योजना पूछी तो वहाँ अफ़रा-तफ़री दिखी। किसी ने पूछा कि आँखों पर पट्टी के दौरान कोई योजना क्यों नहीं बनी। दूसरी तरफ़ एक टीम ने पूरे इलाके को ग्रिड में बाँटकर पहले से तय कर लिया था कि कौन कहाँ जाएगा। वीडियो की टिप्पणी थी: "इनके पास पूरा प्लान है।" खोज के बीच किसी ने "दिख गई!" कहकर मज़ाक भी किया।

आखिरकार टेलर ने फ्लेयर गन ढूँढ ली। टेलर की टीम से जब पूछा गया कि एमेच्योर्स में कितने लोग बचे होंगे, तो जवाब आए "नौ! आठ!" यानी फ्लेयर ब्लू टीम के हाथ लगी थी। रेड टीम उम्मीद कर रही थी कि ब्लू टीम जीत पक्की मानकर फ्लेयर चला दे और गिनती में रेड टीम आगे निकले। MrBeast ने ब्लू टीम से पूछा कि कल तक इंतज़ार क्यों न करें, तो जवाब था: "बीस दिन इंतज़ार कर लिया! बस।"

नतीजा

फ्लेयर चलने के बाद गिनती हुई। ब्लू टीम में ग्यारह लोग बचे थे और रेड टीम में नौ। ब्लू टीम ने 2,50,000 डॉलर जीते, और MrBeast के अनुसार इनमें से हर कोई 22,000 डॉलर लेकर घर जा रहा है। रेड टीम के एक सदस्य ने भावुक होकर कहा कि वे सर्वाइवल एक्सपर्ट्स हैं और उसे गर्व है कि उसकी टीम यहाँ तक टिकी। MrBeast ने घोषणा की कि रेड टीम के हर बचे सदस्य को इतने समय तक टिकने के लिए 4,000 डॉलर दिए जाएँगे, ताकि वे खाली हाथ न लौटें।

वीडियो का शुरुआती सवाल था कि ज्ञान जीतता है या संसाधन। इस पर MrBeast का निष्कर्ष था कि चाहे आपके पास स्किल हो या बहुत सारे संसाधन, आखिर में सबसे ज़रूरी चीज़ साथ मिलकर काम करना है।