एक वीडियो, कई भोजन: व्यूज़ से भूख मिटाने की मिस्टर बीस्ट की कोशिश

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अवलोकन

इस वीडियो में मिस्टर बीस्ट (जिमी) एक सीधा दावा रखते हैं: जो भी इस वीडियो को पूरा देखता है, उससे पैसा बनता है, और वह पैसा ज़रूरतमंद लोगों को खाना खिलाने में लगाया जाता है। वीडियो केन्या और घाना के स्कूलों से होते हुए अमेरिका के फिलाडेल्फिया तक जाता है। हर जगह वे यह दिखाने की कोशिश करते हैं कि भूख की समस्या अलग-अलग देशों में अलग रूप में सामने आती है। कहीं कमी खाना उगाने की क्षमता में है, कहीं बच्चों के बाल श्रम में, और कहीं ज़रूरत से ज़्यादा पैदा हुए खाने की बर्बादी में।

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व्यू से भोजन तक की व्यवस्था

वीडियो की शुरुआत में ही मिस्टर बीस्ट समझाते हैं कि यह कैसे काम करता है। जब कोई, दर्शक समेत, यह पूरा वीडियो देखता है तो उससे पैसा बनता है। वीडियो जितना बढ़ेगा, यह रकम भी उतनी बढ़ेगी और उतने ज़्यादा लोगों को खाना मिलेगा। उनके मुताबिक इसका असर सिर्फ भोजन बाँटने तक नहीं रहेगा। यह पैसा किसानों की मदद करेगा, बड़े किचन बनवाएगा, स्कूलों में छात्रों के लिए खाना पहुँचाएगा और बच्चों को बाल श्रम से निकालेगा। शुरुआती दृश्य में वे बताते हैं कि अब तक 1500 लोगों को खाना खिलाया जा चुका है।

बाद में यह व्यवस्था और ठोस होती है। वीडियो के अंत में बताया जाता है कि टोनी रॉबिंस और डोरडैश के योगदान की वजह से हर 20 व्यूज़ का मतलब किसी ज़रूरतमंद के लिए एक भोजन है।

केन्या: भोजन कार्यक्रम से बढ़ी उपस्थिति और पत्थरों पर बैठे छात्र

केन्या के एक स्कूल में मिस्टर बीस्ट बताते हैं कि उनके भोजन कार्यक्रम की वजह से स्कूल में उपस्थिति बहुत बढ़ गई। इतने नए छात्र आने से नई समस्या खड़ी हुई। स्कूल में डेस्क इतनी कम थीं कि कुछ छात्रों को सचमुच पत्थरों पर बैठना पड़ता था। एक डेस्क पर चार बच्चे बैठ रहे थे, जबकि स्कूल की ओर से बात करने वाली व्यक्ति ने पुष्टि की कि उस पर सिर्फ दो बच्चों को बैठना चाहिए। मिस्टर बीस्ट के तर्क में यह अगला कदम स्वाभाविक था: अगर भोजन से छात्र बढ़े हैं, तो क्लासरूम को भी अपग्रेड करना होगा।

छात्रों से पूछा गया कि क्या उन्हें नई डेस्क चाहिए, और उनके "हाँ" कहने के बाद टीम नई डेस्क अंदर ले आई। मिस्टर बीस्ट के अनुसार अब इतने नए छात्रों के बावजूद सबके पास बैठने की जगह है। टीम के एक सदस्य ने इस पल पर टिप्पणी की कि यह दिखाता है कि अमेरिका और यूरोप में लोग किन चीज़ों को हल्के में लेते हैं। उनके शब्दों में, एक नई डेस्क जैसी साधारण चीज़, ताकि बच्चों को पत्थरों पर न बैठना पड़े, सचमुच उनका हफ़्ता बना रही है।

किचन, कुआँ, ग्रीनहाउस और खेत

मिस्टर बीस्ट ने स्कूल के पुराने "किचन" को दिखाते हुए कहा कि उससे हर स्कूल के दिन इतने बच्चों को नाश्ता और दोपहर का भोजन खिलाना ज़ाहिर तौर पर संभव नहीं है। इसलिए उनकी टीम ने एक बिल्कुल नया किचन बनवाया। स्कूल को नया रूप देने के अलावा वहाँ पानी के भंडारण के साथ एक कुआँ खोदा गया, एक ग्रीनहाउस बनाया गया और एक खेत भी तैयार किया गया। उनके शब्दों में, वे इस स्कूल को "हर ज़रूरी चीज़ से जोड़ रहे हैं।"

ओलेलेश्वा फार्म और नया ट्रैक्टर

पड़ोसी स्कूलों में भी छात्रों की संख्या बढ़ रही है। इसके लिए मिस्टर बीस्ट की टीम एक विशाल खेत के साथ साझेदारी कर रही है, जिसे जस्टिस चलाते हैं। जस्टिस ने ओलेलेश्वा फार्म का परिचय कराया। उनके मुताबिक खेत के दो भाग हैं। एक भाग की उपज सीधे स्कूलों को जाती है। दूसरा भाग खास तौर पर पास के समुदायों को बेचने के लिए उगाया जाता है, और उससे होने वाली आय गैर-लाभकारी संस्था को चलाने में मदद करती है।

मिस्टर बीस्ट ने यहाँ एक कमज़ोरी पहचानी। ये खेत अभी हाथ की मेहनत पर चल रहे थे, जो स्कूलों की ज़रूरत के हिसाब से ज़्यादा खाना उगाने के लिए पर्याप्त कुशल नहीं है। इसलिए वे खेत के लिए एक नया ट्रैक्टर लाए। उनका दावा है कि जिस काम में पहले 45 मिनट लगते थे, उसमें अब सिर्फ 45 सेकंड लगेंगे।

इस प्रसंग में वे अपने पूरे मॉडल की एक अहम बात पर ज़ोर देते हैं। व्यूज़ से पैसा लेकर स्कूल भोजन कार्यक्रमों को देने का मतलब यह नहीं कि खाना हवा से प्रकट हो जाता है। खाना कहीं से आना ही चाहिए, और इस मामले में वह इस विशाल खेत में ट्रैक्टर से बढ़ी उपज से आ रहा है। इसी वजह से उन्होंने कहा कि यह ट्रैक्टर दर्शक जितना सोच रहे हैं उससे ज़्यादा ज़रूरी है।

समुदाय के लिए ट्रक, एक बकरी और दस लाख भोजन का लक्ष्य

खाना ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचे, इसके लिए मिस्टर बीस्ट ने स्कूल को समुदाय के लिए एक नए ट्रक की चाबियाँ सौंपीं। उनके अनुसार यह ट्रक स्कूल को पूरे समुदाय के परिवारों तक अतिरिक्त भोजन पहुँचाने में सक्षम करेगा, और ट्रक के अंदर 100,000 से ज़्यादा लोगों के लिए पर्याप्त खाना था। मिस्टर बीस्ट बताते हैं कि समुदाय इतना आभारी था कि उन्होंने उन्हें एक बकरी उपहार में दी।

केन्या वाले हिस्से के अंत में वे बड़ा लक्ष्य घोषित करते हैं। अगर दर्शकों को 100,000 भोजन बहुत लगते हैं, तो वीडियो के अंत तक, दर्शकों के देखने की वजह से, वे दस लाख भोजन दान करेंगे।

घाना: नया किचन, पानी की टंकी और पत्तागोभी का खेत

घाना में भी टीम ने एक और किचन और पानी की टंकी के निर्माण के लिए धन दिया, और साथ ही एक स्थानीय स्कूल के लिए नया खेत बनवाया। वहाँ लगाई जा रही पत्तागोभी करीब ढाई महीने में तैयार हो जाएगी। वीडियो में बताया गया कि सिर्फ इस छोटे से पत्तागोभी के खेत से छात्रों को खाना खिलाया जा सकता है।

कोकोआ की खेती और बाल श्रम

घाना वाले हिस्से का असली विषय बाल श्रम है। मिस्टर बीस्ट कहते हैं कि इस खेत के विपरीत घाना भर के लाखों अन्य खेतों की कहानी इतनी सकारात्मक नहीं है। स्कूल से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि यह एक कृषि समुदाय है, ज़्यादातर माता-पिता कोकोआ किसान हैं, और दुख की बात है कि बच्चे भी परिवार की आय में अहम भूमिका निभाते हैं। मिस्टर बीस्ट के पूछने पर उन्होंने पुष्टि की कि स्कूल के पाँच में से चार छात्र दाखिला लेने से पहले कोकोआ के खेत में काम करते थे।

इस बातचीत में यह भी सामने आया कि अब ये बच्चे कोकोआ के खेत के बजाय स्कूल में हैं, और मिस्टर बीस्ट के अनुसार इसकी वजह यह है कि उन्हें मुफ्त भोजन मिल रहा है। स्कूल की ओर से कहा गया कि इस भोजन से नामांकन बढ़ रहा है और यह बच्चों को स्कूल लाएगा और वहाँ टिकाए भी रखेगा।

वीडियो में एक आँकड़ा भी दिया गया है: घाना में कोकोआ की खेती करने वाले परिवारों के 45 प्रतिशत बच्चे गैरकानूनी बाल श्रम में काम करते हैं। मिस्टर बीस्ट बताते हैं कि इससे लड़ने के लिए उनकी चॉकलेट कंपनी फ़ीस्टेबल्स किसानों के साथ मिलकर बाल श्रम निगरानी और सुधार प्रणालियाँ स्थापित कर रही है, ताकि बच्चों को बाल श्रम से निकालकर स्कूल भेजा जा सके। स्कूल के एक प्रतिनिधि ने कहा कि वे लंबे समय से प्रार्थना कर रहे थे कि शिक्षार्थियों के लिए स्कूल में भोजन हो, और अब यह उनके पास है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह वर्षों तक चले। मिस्टर बीस्ट ने जवाब दिया कि उन्हें उम्मीद है यह हमेशा चलेगा।

यहाँ एक हल्का पल भी था। मिस्टर बीस्ट ने बच्चों से चॉकलेट के स्वाद के बारे में पूछा और उन्हें ड्रोन कैमरा दिखाया, जिसमें वे खुद को देख सकते थे।

परिवारों को जानवर, ताकि बच्चे स्कूल जा सकें

बच्चों को स्कूल में बनाए रखने के लिए टीम ने एक और तरीका अपनाया। उन्होंने दर्जनों जोड़े जानवर खरीदे, जिनमें गायें और बकरे शामिल थे, और ये परिवारों को उपहार में दिए गए। मिस्टर बीस्ट का तर्क है कि इससे परिवारों को अतिरिक्त आय मिलेगी, और उस आय की बदौलत वे बच्चों को खेतों में काम करवाने के बजाय स्कूल भेज पाएँगे। एक परिवार के बारे में पुष्टि हुई कि अगले दिन उनके बच्चे का स्कूल में पहला दिन होगा।

इतने जानवर बाँटने के लिए मिस्टर बीस्ट को अपनी टीम के तरीक पर निर्भर रहना पड़ा, और वे मज़ाक में इसे "एक गलती" बताते हैं। तरीक ने दस बकरों को एक साथ बाहर निकाला और वे भाग गए। मिस्टर बीस्ट ने मज़ाक में कहा, "तरीक, तुम्हारी नौकरी गई।"

अमेरिका की अलग समस्या: खाने की बर्बादी

घाना के बाद वीडियो संयुक्त राज्य अमेरिका लौटता है। मिस्टर बीस्ट के अनुसार वहाँ भूख मिटाने के लिए एक बिल्कुल अलग समस्या हल करनी होगी। उनका दावा है कि अमेरिका इतना ज़्यादा खाना पैदा करता है कि उसका लगभग 40 प्रतिशत यूँ ही फेंक दिया जाता है। अगर उसमें से सिर्फ दस प्रतिशत भी बचा लिया जाए, तो उनके शब्दों में "सैद्धांतिक रूप से" अमेरिका में भूख मिटाई जा सकती है।

फिलाडेल्फिया का थोक बाज़ार और शेयरिंग एक्सेस

इस तर्क को समझाने के लिए टीम फिलाडेल्फिया होलसेल प्रोड्यूस मार्केट पहुँचती है, जिसे मिस्टर बीस्ट अमेरिका के सबसे बड़े खाद्य बाज़ारों में से एक बताते हैं। उनके अनुसार वहाँ हर साल दस मिलियन पाउंड तक बिना बिका खाना बर्बाद होने के खतरे में रहता है। यहीं एवन और उनकी गैर-लाभकारी संस्था शेयरिंग एक्सेस काम करती है।

बातचीत में बताया गया कि अगर विक्रेताओं के पास खाना बेचने की जगह न हो, तो उसे फेंकना सबसे आसान विकल्प होता है। आलू का उदाहरण दिया गया: कुछ खुदरा विक्रेता कह सकते हैं कि अगर आलू एक्सपायर होने से एक महीने के अंदर हैं तो उन्हें नहीं चाहिए। मिस्टर बीस्ट ने पूछा कि ऐसे में उसे भूखे लोगों को क्यों न दे दिया जाए, और एवन ने कहा कि यह तो सोचने वाली बात ही नहीं है। मिस्टर बीस्ट के अनुसार शेयरिंग एक्सेस लाखों पाउंड ऐसा खाना इकट्ठा करती है जो "बेवकूफी भरे कारणों" से फेंक दिया जाता।

छँटाई का तरीका भी दिखाया गया, जो जान-बूझकर सरल रखा गया है। जो चीज़ अच्छी दिखे वह अच्छे डिब्बे में जाती है, और जो ठीक न लगे वह कूड़ेदान में। एवन ने इसकी वजह बताई कि अगर प्रक्रिया को ज़्यादा जटिल बनाया जाए तो लोग इसे करेंगे ही नहीं। इस दौरान टीम के सदस्य तरीक और नोलन के बीच मिर्च के आकार को लेकर मज़ाक भी चला।

एक और ट्रक की कीमत

मिस्टर बीस्ट बताते हैं कि दिखाया गया सारा खाना उसी दिन उसी इमारत से दान किया गया था, और बाहर इससे कहीं ज़्यादा उपलब्ध है। उनके अनुसार इस बाज़ार और इसके जैसे दूसरे बाज़ारों में इतना खाना है कि शेयरिंग एक्सेस भी उसे खराब होने से पहले पूरा वितरित नहीं कर पाती। समस्या खाने की नहीं, उसे उठाने के लिए ट्रकों की कमी की है। वे बताते हैं कि सिर्फ एक और ट्रक से संस्था हर साल अतिरिक्त सात मिलियन पाउंड तक खाना बचा सकती है।

इसके बाद उन्होंने एवन की आँखों पर पट्टी बाँधकर उन्हें एक नए ट्रक का सरप्राइज़ दिया। उन्होंने यह भी कहा कि इस वीडियो को देखकर दर्शक शेयरिंग एक्सेस को और पैसा देने में मदद कर रहे हैं, ताकि आने वाले वर्षों में यह ट्रक खाने से भरता रहे।

एक दिन में एक अतिरिक्त ट्रक का असर

यह दिखाने के लिए कि एक अतिरिक्त ट्रक एक दिन में क्या कर सकता है, टीम ने सबसे पहले डबल ट्रेलिस फूड किचन को आपूर्ति की, जहाँ हर दिन ज़रूरतमंदों के लिए भोजन पकाया जाता है। वहाँ बताया गया कि दिख रहा सारा सामान फेंक दिया जाता, लेकिन अब वह किसी ज़रूरतमंद का भोजन बन रहा है। मिस्टर बीस्ट के अनुसार वहाँ पकाए गए भोजन से 600 लोगों का पेट भरा।

इसके बाद भी एक ट्रक में हज़ारों पाउंड ताज़ी उपज बची थी। उसका इस्तेमाल कई सामुदायिक रेफ्रिजरेटर भरने, सड़कों पर सीधे लोगों को देने और उत्तरी कैरोलिना में अपना खुद का खाद्य अभियान चलाने में हुआ, जहाँ मिस्टर बीस्ट के अनुसार सैकड़ों लोगों को पौष्टिक भोजन की ज़रूरत थी।

डोरडैश की भागीदारी

वीडियो में डोरडैश के साथ साझेदारी का भी ज़िक्र है। मिस्टर बीस्ट बताते हैं कि सीमित समय के लिए डोरडैश के डैशमार्ट पर विशेष रूप से मिलने वाली एक हूडी खरीदने पर ज़रूरतमंदों के लिए सौ भोजन दान करने में मदद होगी। उनके अनुसार डोरडैश के प्रोजेक्ट डैश ने कुछ ही सालों में सौ मिलियन से ज़्यादा भोजन पहुँचाने में मदद की है। इसी हिस्से में एक मज़ाकिया दृश्य भी है, जिसमें एवन डोरडैश हूडी पर शेयरिंग एक्सेस की ब्रांडिंग लगाते दिखते हैं और मिस्टर बीस्ट कहते हैं कि इसे "निपटाने" के लिए उन्हें खाद्य अभियान रोकना पड़ा।

दो चेक: एक तय, एक खाली

खाद्य अभियान खत्म होने के बाद मिस्टर बीस्ट ने एवन को दो चेक दिए। पहला छह लाख भोजन का था। उन्होंने समझाया कि वीडियो अपलोड होने से पहले वे दस लाख भोजन देने की बात कह चुके थे, और उनमें से छह लाख वे शेयरिंग एक्सेस के ज़रिए करवाना चाहते हैं। एवन ने कहा कि वे इस पर काम कर रहे हैं।

दूसरा चेक खाली था। मिस्टर बीस्ट ने साफ़ कहा कि वीडियो अपलोड होने के बाद रकम कितनी होगी, यह उन्हें अभी नहीं पता। यह इस पर निर्भर करेगा कि कितने लोग वीडियो देखते हैं। जैसे-जैसे लोग वीडियो देखेंगे, वे चेक भरते जाएँगे ताकि शेयरिंग एक्सेस ज़रूरतमंदों को खाना खिलाती रहे।

टोनी रॉबिंस का मैचिंग वादा

मिस्टर बीस्ट बताते हैं कि इन भोजनों के लिए धन देने में डोरडैश के अलावा टोनी रॉबिंस ने भी मदद की। अपने संदेश में टोनी रॉबिंस ने कहा कि यह काम बहुत महत्वपूर्ण है और हर व्यू से और भोजन मिलेगा। उन्होंने साथ जुड़ने वालों के लिए मैचिंग फंड के तौर पर दस मिलियन भोजन देने का वादा किया और दर्शकों से वीडियो दोस्तों के साथ शेयर करने को कहा।

वीडियो इसी अपील पर खत्म होता है: टोनी रॉबिंस और डोरडैश की वजह से हर 20 व्यूज़ किसी ज़रूरतमंद के लिए एक भोजन के बराबर है, इसलिए वीडियो शेयर करें ताकि किसी को खाना मिल सके। खाली चेक में आख़िर कितनी रकम भरी जाएगी, यह वीडियो के अंत तक खुला सवाल ही रहता है, जिसका जवाब मिस्टर बीस्ट के अनुसार दर्शकों पर निर्भर है।