MrBeast का 2,000 लोगों को फिर से चलने में मदद करने का अभियान: कृत्रिम अंग, सर्जरी और बीमा पर सवाल

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अवलोकन

इस वीडियो में MrBeast और उनकी टीम दावा करती है कि उन्होंने दुनिया के कई देशों में 2,000 लोगों को फिर से चलने में मदद की, ज़्यादातर कृत्रिम अंग (प्रोस्थेटिक) देकर और कुछ मामलों में सर्जरी का खर्च उठाकर। वीडियो की शुरुआत में प्रस्तुतकर्ता कहते हैं कि यह ऐसा काम है जो उन्होंने पहले कभी नहीं किया। उनका तर्क है कि चलना-फिरना ज़्यादातर लोगों को सामान्य बात लगती है, पर दुनिया के करोड़ों विकलांग लोगों के लिए यह किसी सपने से कम नहीं। वीडियो अमेरिका के व्यक्तिगत मामलों से शुरू होकर ग्वाटेमाला, इक्वाडोर, केन्या और एशिया तक जाता है, और अंत में बीमा व्यवस्था पर प्रस्तुतकर्ता की नाराज़गी के साथ खत्म होता है।

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शुरुआती कहानियाँ: कोई 15 साल से नहीं चला, कोई 7 महीने से

वीडियो की शुरुआत में कुछ प्रतिभागी अपनी स्थिति बताते हैं। एक व्यक्ति कहते हैं कि 2020 में हुए एक्सीडेंट में उनकी दोनों एड़ियाँ टूट गईं। एक अन्य व्यक्ति के बारे में बताया जाता है कि पहली बार बीमार पड़ने पर डॉक्टरों को लगा था कि वे एक साल भी नहीं जी पाएँगे। एक और व्यक्ति बताते हैं कि 17 साल की उम्र में कार एक्सीडेंट के बाद उन्होंने अपने पैर खो दिए।

पहली प्रतिभागी स्टेफ़नी हैं, जो बताती हैं कि वे 2009 से अपने आप नहीं चलीं, यानी लगभग 15 साल से। उन्हें नया पैर दिया जाता है, उसे फ़िट किया जाता है, और वे खड़ी होकर चलती हैं। उनके पिता वहीं मौजूद हैं और कहते हैं कि उन्हें खुशी है कि अब वह वे काम कर पाएगी जो करना चाहती है, बिना किसी की मदद के। प्रस्तुतकर्ता टिप्पणी करते हैं कि अब पिता और बेटी एक-दूसरे की आँखों में देख सकते हैं, और जवाब आता है कि अब वे नाच भी सकते हैं, जो उन्होंने वहीं किया।

इसके बाद कॉलीन को पैर दिया जाता है, जो सात महीनों से नहीं चली थीं। वीडियो के अनुसार डेविड, एड्रियन, लिंडा और खारिद की भी इसी तरह मदद की गई। प्रस्तुतकर्ता यह भी स्वीकार करते हैं कि यह सब वे कुछ बेहतरीन लोगों की मदद के बिना नहीं कर पाते।

कृत्रिम अंग की कीमत और बीमा की कमी

वीडियो का एक केंद्रीय सवाल यह है कि लोग ये अंग खुद क्यों नहीं ले पाते। पूछे जाने पर बताया जाता है कि ऐसे एक कृत्रिम अंग की कीमत 5,000 से 50,000 डॉलर तक होती है। प्रस्तुतकर्ता के अनुसार इस वीडियो के ज़्यादातर लोग या तो बीमा खरीदने में सक्षम नहीं थे, या उनका बीमा कवरेज पर्याप्त नहीं था। उनके शब्दों में, अगर टीम मदद न करती तो ये लोग कभी चल नहीं पाते। जब पूछा गया कि बीमा कवर न करे तो कोई क्या करे, तो जवाब मिला कि लोगों को दान लेना पड़ता है या किसी ऐसे व्यक्ति की मदद लेनी पड़ती है।

एक प्रतिभागी बताते हैं कि वे यह अंग खुद लगभग दस साल में खरीद पाते। इस पर प्रस्तुतकर्ता उन्हें 10,000 डॉलर देने की घोषणा करते हैं। प्रतिभागी कहते हैं कि यह उनके जीवन का वह दिन है जिसे वे कभी नहीं भूलेंगे। प्रस्तुतकर्ता के शब्दों में, वे एक पैर के साथ आए थे और अब दो पैरों और पैसों से भरे ब्रीफ़केस के साथ जा रहे हैं। चलने के बाद प्रतिभागी कहते हैं कि पैर एकदम असली लगता है, जैसे शरीर का ही हिस्सा हो, और अब उन पर पैसों का बोझ भी नहीं रहेगा।

रोज़मर्रा के काम: ग्रेग का अनुभव

प्रस्तुतकर्ता इस बात पर ज़ोर देते हैं कि चल न पाने से जीवन के सामान्य काम भी नहीं हो पाते। इसका उदाहरण ग्रेग हैं, जो बताते हैं कि अब हर चीज़ बहुत मुश्किल लगती है। वे पहले परिवार के साथ लगातार टेनिस खेलते थे, पर अब उनके लिए इतना ही काफ़ी है कि खड़े होकर बर्तन धो सकें। नया पैर लगने के बाद वे कहते हैं कि खड़े होकर अच्छा लग रहा है और दिल में खुशी ही खुशी है।

ट्रैविस और बेटी की शादी का सपना

सबसे लंबी कहानी ट्रैविस की है। वे बताते हैं कि पहले वे बोर होने पर हफ़्ते में सातों दिन दौड़ा करते थे। 17 साल की उम्र में कार दुर्घटना के बाद उन्हें ऑस्टियोमाइलाइटिस हुआ और इसी वजह से उन्होंने अपने पैर खो दिए। कितने समय से नहीं चले, यह पूछने पर वे कहते हैं कि अब यह याद भी नहीं।

उनकी बेटी का बचपन से सपना था कि शादी में उसके पापा उसके साथ चलें, और यह मौका ऐसा था जो बैठकर पूरा नहीं हो सकता था। ट्रैविस को दाहिना और बायाँ, दोनों पैर लगाए जाते हैं। वे पहला कदम उठाते हैं और जल्द ही बिना हाथों के सहारे चलने लगते हैं। प्रस्तुतकर्ता मज़ाक में कहते हैं कि वे एक पैर वाले कुछ लोगों से बेहतर चल रहे हैं, और ट्रैविस कहते हैं कि वे निश्चित रूप से फिर से दौड़ना शुरू करेंगे।

इसके बाद प्रस्तुतकर्ता बताते हैं कि उन्होंने होने वाले पति से शादी का खर्च पूछा था, और उतनी रकम एक व्हीलचेयर पर रखकर घोषणा करते हैं कि टीम शादी का पूरा खर्च उठाएगी। जब वे पूछते हैं कि क्या उन्हें शादी में बुलाया जाएगा, तो जवाब मिलता है "हाँ", बशर्ते वे फ़ीस्टेबल्स लेकर आएँ। प्रस्तुतकर्ता बताते हैं कि वे वीडियो में बाद में सचमुच उस शादी में जाते हैं।

विकासशील देशों की ओर: ग्वाटेमाला और Range of Motion Project

प्रस्तुतकर्ता कहते हैं कि इस वीडियो में सारे प्रोस्थेटिक्स का खर्च टीम दे रही है, पर हमेशा ऐसा नहीं होगा। अमेरिका में भी कुछ लोगों के लिए 5,000 से 50,000 डॉलर बड़ी रकम है, और उनके अनुसार विकासशील देशों में यह काम और भी कठिन और महंगा है।

इसी कारण वे ग्वाटेमाला में डेविड से मिलने जाते हैं, जिन्होंने Range of Motion Project (ROMP) की स्थापना की है। यह संस्था गरीब लोगों को कृत्रिम अंग देती है। डेविड बताते हैं कि यह तकनीक महंगी है, पर वे सस्ती तकनीक के ज़रिए गरीबों तक अंग पहुँचा पाते हैं। प्रस्तुतकर्ता के अनुसार डेविड ने दस गुना सस्ती और अच्छी गुणवत्ता देने का तरीका निकाला है। इसका रहस्य रीसाइक्लिंग है: डेविड के अनुसार वहाँ दिख रहा सामान दुनिया भर से रीसाइकिल होकर आया है, और पुराने प्रोस्थेटिक्स के कई पुर्ज़े काम के होते हैं। वीडियो में दर्शकों से कहा जाता है कि वे अपने पुराने प्रोस्थेटिक्स संस्था की वेबसाइट के ज़रिए दान कर सकते हैं। प्रस्तुतकर्ता के अनुसार इसी वजह से संस्था अंग इतने सस्ते बना पाती है और दुनिया भर में मदद कर पाती है।

ग्वाटेमाला के क्लिनिक में नए अंग मिलने के बाद एक व्यक्ति मोटरसाइकिल चलाता है, कोई फ़ुटबॉल खेलता है, और कुछ लोग परिवार को गले लगाने जैसी छोटी खुशियाँ महसूस करते हैं। एक प्रतिभागी कहते हैं कि सबसे पहले वे अपने परिवार के साथ चलना चाहते हैं, और "आपने मेरी ज़िंदगी मुझे दे दी"। एक बच्चे को पहली बार चलते हुए भी दिखाया जाता है। प्रस्तुतकर्ता के अनुसार नया अंग पूरे जीवन को बदल देता है।

जो लोग क्लिनिक तक नहीं पहुँच पाते: ROMP का नया ट्रक

डेविड बताते हैं कि कई लोग क्लिनिक तक आ ही नहीं पाते, क्योंकि उन्हें पहाड़, नदियाँ और जंगल पार करने पड़ते हैं। चल न पाने के कारण वे अपने घरों में फँसे रहते हैं। इसलिए डेविड को कभी-कभी क्लिनिक छोड़कर मरीज़ों के घर जाना पड़ता है।

प्रस्तुतकर्ता को पता चलता है कि संस्था के पास इसके लिए कोई ट्रक नहीं है। उनके अनुसार ROMP को अपना पैसा प्रोस्थेटिक्स और स्टाफ़ पर खर्च करना पड़ता है, इसलिए मरीज़ों तक जाने के लिए कार तक नहीं थी। इस पर टीम संस्था को ROMP लिखा हुआ 65,000 डॉलर का ट्रक देती है, जो बहुत खराब रास्तों पर भी चल सकता है। डेविड को इसकी जानकारी नहीं थी, जबकि स्टाफ़ को पता था।

ग्वाटेमाला सिटी से दूर जाते हुए प्रस्तुतकर्ता कहते हैं कि उन्हें समझ आया कि डेविड इन इलाकों के बारे में सही कह रहे थे। वे जंगल में एक ज्वालामुखी के पास बने घर तक जाते हैं, जहाँ उनके अनुसार कोई आम कार नहीं चल पाती। वहाँ केविन रहते हैं, जिन्होंने 24 साल पहले जलने की वजह से दोनों पैर खो दिए थे। वहाँ घूमना-फिरना बहुत मुश्किल है, इसलिए किसी को उनकी व्हीलचेयर धकेलनी पड़ती थी। नए पैरों के साथ केविन ज्वालामुखी के किनारे पहला कदम उठाते हैं और अपनी माँ को पास बुलाते हैं। केविन कहते हैं कि उनके जैसे कई लोग हैं, और वे भगवान का शुक्रिया अदा करते हैं कि टीम वहाँ आई। प्रस्तुतकर्ता के अनुसार केविन 71वें व्यक्ति थे जिन्हें उन्होंने चलने में मदद की।

इक्वाडोर: केली, एडुआर्डो और 50 लोग

इसके बाद डेविड और प्रस्तुतकर्ता इक्वाडोर जाते हैं। वहाँ केली बोलिविया से छह दिन बस में सफ़र करके पहुँची थीं। वे बताती हैं कि उनके लिए यहाँ आना बहुत कठिन था, क्योंकि वे पहले कभी अपने देश से बाहर नहीं गई थीं। प्रस्तुतकर्ता कहते हैं कि इसी वजह से वे यह वीडियो बना रहे हैं। केली दो साल से नहीं चली थीं, और पैर लगने के बाद वे इतनी खुश थीं कि उन्होंने तुरंत डांस करने की इच्छा जताई और प्रस्तुतकर्ता को साथ नाचने के लिए कहा। प्रस्तुतकर्ता कहते हैं कि उन्हें डांस नहीं आता, पर परिवार को फिर से खुश देखना उनके लिए बड़ा पल था।

पाँच साल के एडुआर्डो ने अपने नए पैर को चूमकर उसका स्वागत किया। वे महीनों से नहीं चले थे। उनकी माँ के अनुसार वे घिसटकर चलते थे और पैर न होने की वजह से शर्म महसूस करते थे। एक और परिवार की बेटी एक साल से नहीं चली थी। फ़ेडे नाम के एक प्रतिभागी को बताया जाता है कि नया पैर "100% मुफ़्त" है, और वे इसे भगवान का वरदान कहते हैं। प्रस्तुतकर्ता इसी हिस्से में कहते हैं कि यह सचमुच उनका पसंदीदा वीडियो है। वीडियो के अनुसार इक्वाडोर में 50 लोगों की मदद की गई।

पहाड़ की चढ़ाई का मकसद

डेविड बताते हैं कि वे नए प्रोस्थेटिक पाने वालों को एक पहाड़ पर चढ़ाई के लिए ले जाते हैं। उनका तर्क है कि अगर वे यह पहाड़ चढ़ सकते हैं, तो रोज़मर्रा का जीवन भी जी सकते हैं। प्रस्तुतकर्ता मानते हैं कि चढ़ाई सचमुच कठिन थी और उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि जो लोग पहले चल नहीं पाते थे, वे अब पहाड़ चढ़ रहे हैं।

प्रस्तुतकर्ता स्वीकार करते हैं कि शुरू में उन्हें समझ नहीं आया था कि पहाड़ क्यों चढ़ा जा रहा है, पर बाद में बात समझ आ गई: मकसद यह एहसास कराना है कि हार न मानें, और पहाड़ चढ़ लेने के बाद वे प्रोस्थेटिक पैर के साथ कुछ भी कर सकते हैं। प्रस्तुतकर्ता कहते हैं कि इन लोगों ने जितना जज़्बा दिखाया, वैसा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। चोटी पर पहुँचकर वे सब पर गर्व जताते हैं और कहते हैं कि वहाँ का सुंदर नज़ारा ही उनका इनाम है।

केन्या: पैर हैं, पर सर्जरी चाहिए

केन्या में समस्या अलग थी। वहाँ कुछ बच्चों के पैर तो थे, पर उनका इस्तेमाल करने के लिए महंगी सर्जरी की ज़रूरत थी, और इसका खर्च टीम ने उठाया। प्रस्तुतकर्ता के अनुसार सर्जरी से पहले इनमें से कुछ बच्चे अपने पूरे जीवन में कभी नहीं चल पाए थे। एक बच्चा बताता है कि चलने की कोशिश में वह गिर जाता था, साथी छात्र उस पर हँसते थे और कभी-कभी वह स्कूल भी नहीं जा पाता था। अब वह कहता है कि वह दूसरे लोगों की तरह चल सकता है और इससे उसे बहुत खुशी होती है। सर्जरी के अलावा टीम ने बच्चों के खेलने के लिए एक प्लेरूम भी बनवाया।

अफ़्रीका से एशिया तक, और 2,000 का आँकड़ा

प्रस्तुतकर्ता के अनुसार केन्या के बाद टीम ने पूरे अफ़्रीका में लोगों की मदद की, और फिर फ़िलीपींस, कंबोडिया और श्रीलंका गई। इस हिस्से को वीडियो में तेज़ी से दिखाया गया है। एक प्रतिभागी कहते हैं कि उनका परिवार, उनकी आर्थिक स्थिति और जो कुछ वे जानते हैं, सब बदलने वाला है। एक अन्य प्रतिभागी इसे अपने लिए पुनर्जन्म जैसा बताती हैं। प्रस्तुतकर्ता कहते हैं कि कई देशों में जाकर 2,000 लोगों को पैर देने के बाद वे खुश हैं कि उन्होंने कई लोगों का जीवन बदला।

ट्रैविस की बेटी की शादी

वीडियो वादे के मुताबिक शादी पर लौटता है। प्रस्तुतकर्ता मज़ाक में पूछते हैं कि 24 घंटे पहले मिले लोगों की शादी में जाना अजीब है या नोलन की शर्ट, और जवाब मिलता है कि नोलन की शर्ट, सौ प्रतिशत। इसके बाद ट्रैविस नए पैरों के साथ अपनी बेटी को लेकर चलते हैं। बेटी दोहराती हैं कि उनका हमेशा से सपना था कि पापा शादी में उनके साथ चलें। समारोह में मिस्टर और मिसेज़ एंडरसन के लिए तालियाँ बजती हैं। ट्रैविस कहते हैं कि वे उसके साथ चल सके और उन्हें बहुत अच्छा लगा। प्रस्तुतकर्ता कहते हैं कि यह दृश्य देखकर उन्हें एहसास हुआ कि इस वीडियो में कितने लोगों का जीवन बदला गया।

अंत में: बीमा व्यवस्था पर सवाल, जिसका जवाब प्रस्तुतकर्ता के पास नहीं

प्रस्तुतकर्ता कहते हैं कि वे यह वीडियो आम वीडियो की तरह खत्म नहीं करेंगे। उनके अनुसार इनमें से कई लोगों के पास बीमा था, पर उन्हें पैसा नहीं दिया गया, और कुछ का कवरेज सही नहीं था। वे कहते हैं कि उन्हें यह समझ नहीं आता कि लोगों को फिर से चलने के लिए उनके जैसे एक यूट्यूबर की मदद लेनी पड़ी, और वे ही उनकी आखिरी उम्मीद थे। उनके शब्दों में यह "काफ़ी अजीब" है।

वे साफ़ मानते हैं कि उन्हें नहीं पता कि इसका उपाय क्या है। फिर भी वे कहते हैं कि वीडियो देखने वाले लगभग 10 करोड़ लोगों को प्रेरित करने के लिए उन्हें यह कहना ज़रूरी लगा, क्योंकि शूटिंग के दौरान जो उन्होंने देखा, उससे उनका मन दुखी है।