मिस्र के पिरामिडों में 100 घंटे: मिस्टरबीस्ट और उनकी टीम ने किन कक्षों, सुरंगों और सबूतों को देखा

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अवलोकन

इस वीडियो में मिस्टरबीस्ट (जिमी) और उनके साथी कार्ल, चैंडलर, नोलन और टरीक को गिज़ा के पिरामिडों और आसपास की कब्रों में घूमने के लिए 100 घंटे मिलते हैं। इनमें से कई जगहें आम लोगों के लिए बंद हैं और वीडियो के अनुसार वहाँ जाना सामान्यतः अवैध है, क्योंकि वे बेहद खतरनाक हैं। वीडियो दो सवालों के इर्द-गिर्द चलता है। पहला, क्या खुफू जैसे फिरौन का असली शव अब भी किसी अनदेखे कक्ष में छिपा हो सकता है? दूसरा, पिरामिड किसने बनाए: प्राचीन मिस्रवासियों ने, जैसा मिस्रविद कहते हैं, या एलियंस ने, जैसा इंटरनेट पर कुछ लोग मानते हैं? जिमी शुरुआत में ही कहते हैं कि वीडियो के अंत तक वे इसका पता लगाने की कोशिश करेंगे।

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ग्रेट पिरामिड: ग्रैंड गैलरी और राजा का कक्ष

यात्रा ग्रेट पिरामिड से शुरू होती है। गाइड रामी बताते हैं कि यह पिरामिड लगभग 4,500 साल पुराना है। जिस मार्ग से टीम गुज़रती है, वह उस जगह तक जाता है जिसे मिस्रविद राजा खुफू की कब्र मानते हैं। वीडियो के अनुसार खुफू वह फिरौन थे जिन्होंने शायद पिरामिड बनवाने का आदेश दिया था। रास्ते में "ग्रैंड गैलरी" नाम का लंबा कक्ष आता है।

जिमी पूछते हैं कि इस पिरामिड का कितना प्रतिशत हिस्सा अब तक देखा जा चुका है। जवाब मिलता है कि इस सवाल का उत्तर शायद कभी नहीं मिलेगा। इसके बाद टीम राजा के कक्ष में पहुँचती है। गाइड के अनुसार करीब 4,600 साल पहले राजा का ममीकृत शरीर यहीं रखा गया होगा। गाइड बार-बार "हम मानते हैं" कहते हैं, इसलिए जिमी पूछते हैं कि यह पक्के तौर पर क्यों नहीं पता। जवाब में गाइड अपनी राय रखते हैं कि पिरामिड के भीतर शायद कोई और कक्ष है जो अभी तक खोजा नहीं गया और जिसमें राजा का शव हो सकता है। यहीं से वीडियो का घोषित लक्ष्य तय होता है: पिरामिड के सैकड़ों फीट नीचे से लेकर उसके सबसे ऊँचे भीतरी बिंदु तक जाना।

बेस कैंप और एलियन बनाम मिस्रवासी का सवाल

टीम पिरामिडों के पास बेस कैंप बनाती है। वहाँ खाने की मेज़ और सोने के तंबू हैं, और ऐसी रोशनी भी लगाई गई है कि रात में कैंप से पिरामिड दिखे। जिमी इसे मज़ाक में "शायद अब तक का सबसे महंगा नाइटलाइट" कहते हैं। अगले दिन का काम सुबह 5 बजे शुरू करने की योजना बनती है।

इसी हिस्से में वीडियो का केंद्रीय विवाद सामने रखा जाता है। वीडियो के अनुसार पिरामिड अपने समय के हिसाब से इतने तकनीकी रूप से उन्नत थे कि कुछ लोग इनका श्रेय प्राचीन मिस्र की सभ्यता को देते हैं, जबकि कुछ एलियंस जैसे सिद्धांतों की ओर इशारा करते हैं। मिस्र के विद्वान इस बात पर स्पष्ट हैं कि पिरामिड प्राचीन मिस्रवासियों ने अपने राजाओं की कब्रों के रूप में बनाए थे।

खाफरे का पिरामिड: बाहरी परत, औज़ारों से भरा कक्ष और दफ़न कक्ष

अगला पड़ाव खाफरे का पिरामिड है। इसकी खासियत यह बताई जाती है कि इसी पिरामिड से पता चला कि हर पिरामिड की बाहरी परत मूल रूप से कैसी दिखती थी। जब जिमी मज़ाक में पूछते हैं कि क्या यह "एलियंस के बनाने के समय" जैसा दिखता था, तो जवाब मिलता है: "कोई एलियन नहीं!"

रामी टीम को सतह से लगभग 100 फीट नीचे खाफरे के पिरामिड के भीतर ले जाते हैं। वीडियो के अनुसार आधुनिक दुनिया में शायद ही कोई यहाँ गया हो। रास्ते में एक कक्ष मिलता है जिसे लंबे समय तक खाफरे का दफ़न कक्ष माना जाता था, पर अब वहाँ सामान रखा है। जिमी को यह अजीब लगता है। रामी बताते हैं कि पिरामिड की मरम्मत चल रही है, इसलिए औज़ार रखने की जगह चाहिए। इसका मतलब यह था कि असली दफ़न कक्ष आगे है।

असली दफ़न कक्ष की बड़ी छत देखकर जिमी इसे अब तक की सबसे शानदार चीज़ कहते हैं। दीवार पर एक तारीख के साथ ग्रैफिटी दिखती है। बताया जाता है कि यह उस व्यक्ति की है जिसने इस कब्र को खोजने का दावा किया था। टीम में से कोई पूछता है कि क्या फिरौन की कब्र में लेटना अपमानजनक होगा। जवाब आता है कि अपमान से ज़्यादा चिंता "श्राप" की है, और टीम हँसी-मज़ाक के बीच वहाँ से निकल जाती है। जिमी मानते हैं कि राजा की इस कब्र से उनके कई सवालों के जवाब नहीं मिले।

ओसिरिस की कब्र: गहराई, कम ऑक्सीजन और एक अनजान शाफ्ट

इसके बाद टीम पिरामिडों के नीचे "भगवान ओसिरिस की कब्र" में जाती है। वीडियो में इसे अंडरवर्ल्ड का पोर्टल कहा गया है, जहाँ बहुत कम लोग कभी गए हैं। इसका रास्ता एक बहुत लंबी और गहरी सीढ़ी है। जब पूछा जाता है कि गिरने पर क्या होगा, तो जवाब मिलता है कि आदमी निश्चित रूप से मर जाएगा।

रास्ते में टीम को लगभग 3,000 साल पुराने मानव अवशेष मिलते हैं, जिनमें एक खोपड़ी भी है। आगे बताया जाता है कि इतनी गहराई पर ऑक्सीजन की कमी से बेहोश होने का खतरा है। नीचे पानी भरा है। चैंडलर उसमें उतरते हैं और बताते हैं कि हवा पतली महसूस हो रही है। कक्ष के बीच में ओसिरिस का शवगृह (सार्कोफ़ैगस) है। वीडियो के अनुसार इसे कथित तौर पर अंडरवर्ल्ड का द्वार माना जाता है और लगभग कोई इंसान यहाँ नहीं आया।

ऊपर दाईं ओर एक शाफ्ट दिखता है, जिसके बारे में कहा जाता है कि किसी को नहीं पता वह कहाँ जाता है। बाकी लोगों के मना करने पर भी कार्ल उसमें चढ़ते हैं। अंदर एक मोड़ पर रास्ता सँकरा होता जाता है और कार्ल बताते हैं कि वे फँस गए हैं और उनके पास लगभग एक इंच की जगह बची है। तभी चेतावनी आती है कि ऑक्सीजन का स्तर सुरक्षित सीमा से बाहर जा चुका है। टीम जल्दी से बाहर निकल जाती है, और यह शाफ्ट कहाँ जाता है, इसका कोई जवाब नहीं मिलता।

मेनकौरे का पिरामिड: पहली सजावटी नक्काशी और गुंबददार छत

ऊँट की सवारी के बाद गिज़ा पठार के निदेशक अशरफ टीम के साथ तीसरे पिरामिड, मेनकौरे के पिरामिड, पर आते हैं। वे दिखाते हैं कि नीचे अब भी कुछ ग्रेनाइट बचा है जो करीब 4,600 साल पुराना है। एक चित्रण से वे समझाते हैं कि पिरामिड पहले कैसा दिखता था और अब लगभग 5,000 साल बाद उसमें से क्या बचा है। विशेष अनुमति से नोलन को पिरामिड पर थोड़ा चढ़ने दिया जाता है, जो सामान्यतः अवैध है। नीचे से उन्हें उतरने के लिए डाँटा जाता है, पर बाद में पता चलता है कि यह मज़ाक था।

भीतर की सीढ़ियाँ टीम को ज़मीन में लगभग 100 फीट नीचे एक ऐसे कक्ष तक ले जाती हैं जिसे वीडियो प्राचीन मिस्र के इतिहास का पहला सजावटी नक्काशी वाला कक्ष बताता है। अशरफ के अनुसार यह "झूठे दरवाज़ों" की सजावट है और उस दौर के किसी अन्य पिरामिड के भीतर ऐसी सजावट नहीं थी। उनके अनुसार यह लगभग 4,600 साल पुरानी है।

आगे एक शाफ्ट एंटीचैम्बर तक जाता है। वहाँ एक बगल वाले कमरे के बारे में अशरफ बिना अंदर गए कहते हैं कि उसमें कुछ नहीं है, क्योंकि वह यहीं से दिखता है, बस एक सुरंग है। जिमी इस पर "हमेशा संदेह में रहो" कहते हैं। आखिर में एक नीचे जाता शाफ्ट दफ़न कक्ष तक पहुँचता है, जिसकी छत गुंबददार है। अशरफ बताते हैं कि यह छत वज़न को कम करती है। जिमी पूछते हैं कि उस समय यह कैसे पता था, तो अशरफ का जवाब है कि अगर आप पिरामिड बना सकते हैं, तो कुछ भी बना सकते हैं।

बाहर निकलते हुए तीन छोटे पिरामिडों के बारे में अशरफ बताते हैं कि वे मेनकौरे की तीन रानियों के मकबरे हैं। इस पर नोलन की कुंवारी ज़िंदगी को लेकर हल्का मज़ाक होता है।

अशरफ का तर्क: "मिस्र में 124 पिरामिड हैं"

विदा होने से पहले जिमी अशरफ से सीधे पूछते हैं कि क्या एलियंस ने पिरामिड नहीं बनाए। अशरफ इस विचार पर नाराज़गी जताते हैं और कहते हैं कि मिस्र में 124 पिरामिड हैं। उनका तर्क है कि यह संभव नहीं कि हर बार एलियंस को बुलाकर पिरामिड बनवाया गया हो। उनके अनुसार पिरामिड मिस्रवासियों ने बनाए। जब टरीक फिर से एलियंस का ज़िक्र करते हैं, तो उन्हें मज़ाक में डाँट पड़ती है।

स्फिंक्स: "सोने से भरे छिपे मंदिर" की जाँच

इसके बाद जिमी, डॉ. ज़ाही हवास के साथ स्फिंक्स पर जाते हैं। वीडियो डॉ. ज़ाही को वह व्यक्ति बताता है "जिसने यहाँ सब कुछ खोजा"। जिमी कहते हैं कि उन्होंने ऑनलाइन पढ़ा है कि स्फिंक्स के नीचे सोने से भरा एक मंदिर दफ़न है, और वे जानना चाहते हैं कि डॉ. ज़ाही सही हैं या इंटरनेट के षड्यंत्र सिद्धांत।

डॉ. ज़ाही उन्हें स्फिंक्स के एक सँकरे प्रवेश द्वार से अंदर जाने देते हैं। जिमी भीतर झाँककर बताते हैं कि उन्हें बस एक खाली छेद दिख रहा है। डॉ. ज़ाही उनसे कैमरे पर औपचारिक बयान दिलवाते हैं, और जिमी कहते हैं: "स्फिंक्स के अंदर कुछ नहीं है।" इसी दौरान बाकी साथी मिस्र की सेना और सरकार की अनुमति से हेलीकॉप्टर में उड़ान भरते हैं। डॉ. ज़ाही यह भी कहते हैं कि ग्रेट पिरामिड के शीर्ष वाले हिस्से में वे कैमरे पर ऐसी चीज़ें दिखाएँगे जो पहले कभी नहीं दिखाई गईं।

इयमेरी का मकबरा: 4,600 साल पुराने रंग और रोज़मर्रा की ज़िंदगी

ग्रेट पिरामिड पर चढ़ने से पहले रामी टीम को इयमेरी के मकबरे में ले जाते हैं। यह भी उन जगहों में से है जहाँ आम लोगों का जाना पूरी तरह वर्जित है। अंदर जाने से पहले सबको सख्त हिदायत दी जाती है कि दीवारों को न छुएँ।

रामी बताते हैं कि यह उस समय के उच्च पुजारी की कब्र है, जिनकी तुलना वे आज के पोप से करते हैं। दीवारों पर रंगीन चित्र हैं, जिन्हें 4,600 साल पुराना बताया जाता है। आम लोगों को यहाँ इसलिए नहीं आने दिया जाता ताकि ये रंग सुरक्षित रहें। रामी के अनुसार ऐसी कब्रें कभी-कभी पिरामिडों से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण होती हैं, क्योंकि ये प्राचीन मिस्रियों के दैनिक जीवन को समझाती हैं। उदाहरण के तौर पर वे एक चित्र दिखाते हैं जिससे यह समझ आया कि प्राचीन मिस्री शराब कैसे बनाते थे। उसमें लोग अंगूर कुचल रहे हैं और शराब तैयार करने के चरणों से गुज़र रहे हैं। जिमी इसे 5,000 साल पुराना "कैसे करें" वाला यूट्यूब वीडियो कहते हैं। एक अन्य दीवार पर आम लोग उच्च पुजारी इयमेरी को भेंट चढ़ा रहे हैं, जिनमें "ता" और "हेंकेट" नाम की ब्रांडी और बीयर शामिल हैं।

कामगारों के मकबरे: कंकाल और पीठ पर तनाव के निशान

चौथे दिन टीम एक सक्रिय खुदाई में शामिल होने के लिए कामगारों के मकबरों पर जाती है। डॉ. ज़ाही के अनुसार यह वही जगह है जहाँ 4,600 साल पहले पिरामिड बनाने वाले लोग दफ़नाए गए थे। वे बताते हैं कि दूसरे मकबरों में सुंदर चित्र दिखते हैं, लेकिन ये लोग गरीब थे। वे एक व्यक्ति का नाम भी पढ़ते हैं, जो सुनाई देने में "नेफिर थिस" जैसा है।

जिमी खुद यह संदेह उठाते हैं कि दीवार पर लिखा होना यह साबित नहीं करता कि बनाने वाले सचमुच यहीं दफ़न हैं। फिर उन्हें एक खोपड़ी दिखती है। वे सीधे पूछते हैं कि कहीं डॉ. ज़ाही ने इसे यहाँ रखा तो नहीं। डॉ. ज़ाही कहते हैं कि यह कंकाल अपनी मूल जगह पर है और इसे बिल्कुल नहीं हिलाया गया। खुदाई में एक रीढ़ भी दिखती है। डॉ. ज़ाही के अनुसार यहाँ मिले सभी पुरुषों और महिलाओं के कंकालों की पीठ पर तनाव के निशान हैं। जिमी अनुमान लगाते हैं कि ऐसा दो टन के पत्थर के ब्लॉक ढोने से हुआ होगा, और डॉ. ज़ाही इसकी पुष्टि करते हैं। जिमी इसी आधार पर समझते हैं कि डॉ. ज़ाही बार-बार क्यों कहते हैं कि पिरामिड एलियंस ने नहीं बनाए: कामगारों के शव सचमुच यहाँ मौजूद हैं।

ग्रेट पिरामिड का सबसे निचला बिंदु: 300 फीट की सुरंग और "धोखे का कक्ष"

शीर्ष पर जाने से पहले गाइड सुझाव देते हैं कि पहले पिरामिड के सबसे निचले बिंदु तक जाया जाए, जो पिरामिड के सैकड़ों फीट नीचे है। रास्ता लगभग 300 फीट लंबी सँकरी सुरंग है। जब पूछा जाता है कि फिरौन ने सीधी सीढ़ी क्यों नहीं बनाई, तो जवाब मिलता है कि वे अपनी ममी और खज़ाने की रक्षा करना चाहते थे, और यही पिरामिड का पूरा उद्देश्य है। 6 फुट 5 इंच लंबे जिमी को झुककर चलने में काफ़ी परेशानी होती है। करीब एक घंटे तक घुटनों के बल चलने के बाद टीम नीचे पहुँचती है। एक साथी कहते हैं कि यह ज़िंदा दफ़न होने जैसा लगता है, और जिमी को हल्का चक्कर आता है।

नीचे एक बड़ा कक्ष है। गाइड बताते हैं कि जब इसे पहली बार खोजा गया था, तो यह खाली मिला था। उनके अनुसार यह एक "धोखे का कक्ष" है, जिसे लुटेरों को भटकाने के लिए बनाया गया था। इससे एक बड़ा सवाल उठता है: अगर इतनी मेहनत से एक नकली कक्ष बनाया गया, तो क्या जिसे राजा का कक्ष माना जाता है वह भी धोखा हो सकता है? अगर ऐसा है, तो खुफू का शव अब भी पिरामिड में कहीं हो सकता है। साथ ही गाइड का कहना है कि यह सब इस बात को पुष्ट करता है कि पिरामिड राजाओं की कब्रों के रूप में बनाए गए थे। इसी कक्ष में पिरामिड का सबसे गहरा बिंदु है, जहाँ जिमी खड़े होते हैं।

सबसे ऊपर के छिपे कक्ष: 50 से कम लोग

ऊपर जाने के लिए डॉ. ज़ाही के साथ केवल पाँच लोगों को अनुमति मिलती है। रॉक-पेपर-सीज़र्स से फ़ैसला होता है और नोलन बाहर रह जाते हैं। टीम पहले दिन वाले गलियारे से राजा के कक्ष तक पहुँचती है और फिर उसके ऊपर छिपे कक्षों की ओर बढ़ती है। वीडियो के अनुसार पिछले 5,000 वर्षों में जितनी जानकारी है, उसके हिसाब से 50 से कम लोग यहाँ आए हैं। चढ़ाई सीढ़ी और सँकरी गुफाओं से होकर जाती है। इसी बीच एक साथी स्वीकार करते हैं कि उन्हें ऊँचाई से डर लगता है।

टीम एक-एक कर ऊपर के कक्षों से गुज़रती है। बताया जाता है कि नीचे दो कक्ष हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कक्ष तीन, चार और पाँच हैं। जिमी डॉ. ज़ाही से पूछते हैं कि वे वहाँ तक कैसे पहुँच गए, तो वे हँसकर कहते हैं कि उन्हें कोई अंदाज़ा नहीं। सबसे ऊपर वाले कक्ष में बहुत सारे चमगादड़ हैं। समय भी लगभग खत्म हो चुका है, और जिमी के अनुसार उनके पास करीब दो मिनट बचे हैं।

निर्माताओं की ग्रैफिटी: "खुफू के दोस्त"

इसी सबसे ऊँचे कक्ष में डॉ. ज़ाही दीवार पर लिखी वह चीज़ दिखाते हैं जिसे वीडियो सबसे अहम सबूत के रूप में पेश करता है। उनके अनुसार यह पिरामिड बनाने वाली कामगार टोलियों ("गैंग") में से एक का नाम है। वे समझाते हैं कि "हेबर" का अर्थ "टीम" है, "सिम्सु" का अर्थ "दोस्त", और साथ में कार्टूश में खुफू का नाम लिखा है। इस तरह पूरा अर्थ बनता है "खुफू के दोस्तों का दल", और डॉ. ज़ाही के अनुसार यह 4,600 साल पहले लिखा गया था।

निष्कर्ष: मिस्रविदों के सबूत, पर खुफू का शव अब भी एक सवाल

अंत में जिमी अपनी बात समेटते हैं कि टीम ने पिरामिडों की उत्पत्ति के बारे में जितना हो सका सीखा, और मिस्र के विद्वानों ने उन्हें जो सबसे अच्छे सबूत मिल सके वे दिखाए। इनमें कामगारों के मकबरे, श्रम से प्रभावित कंकाल और स्फिंक्स में छिपे कमरे व खज़ाने की जाँच शामिल हैं, जहाँ कुछ नहीं मिला। जिमी का निष्कर्ष है कि "वहाँ नीचे एलियंस नहीं हैं"। वीडियो के अनुसार शोधकर्ताओं के लिए यह ग्रैफिटी उन लोगों के लिए अंतिम सबूत है जो संदेह करते हैं कि प्राचीन मिस्रवासियों ने ये पिरामिड अपने फिरौन की कब्रों के रूप में बनाए।

हालाँकि वीडियो की शुरुआत में उठाया गया दूसरा सवाल, यानी खुफू का असली शव कहाँ है, अनसुलझा रहता है। गाइड की यह आशंका कि कोई अनदेखा कक्ष मौजूद हो सकता है, धोखे वाले कक्ष के बाद और मज़बूत होती है। ओसिरिस की कब्र में मिला शाफ्ट कहाँ जाता है, यह भी अज्ञात रहता है। जिमी यह कहते हुए यात्रा खत्म करते हैं कि उन्हें नहीं पता मिस्र ने उन्हें यह सब करने की अनुमति क्यों दी, लेकिन वे इसके लिए हमेशा आभारी रहेंगे।