एकांत कारावास में सात दिन: बिना घड़ी, बिना लोगों के एक सफ़ेद कमरे में जिमी का अनुभव
MrBeast ミスタービーストइस वीडियो में जिमी (MrBeast) यह परखने निकलते हैं कि क्या कोई इंसान पूरे 168 घंटे, यानी सात दिन, एक साउंडप्रूफ़ सफ़ेद कमरे में बिना किसी इंसानी संपर्क के रह सकता है। शुरुआत में यह एक अजीब और कुछ हद तक मज़ेदार प्रयोग लगता है। लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते हैं, वीडियो समय का अंदाज़ा खोने, ऊब, भूख और अकेलेपन के असर का सिलसिलेवार रिकॉर्ड बन जाता है। आख़िर में जिमी खुद मानते हैं कि अगर उन्हें पता होता कि यह इतना मुश्किल होगा, तो वे यह कभी नहीं करते।
चुनौती की शर्तें और डॉक्टर की चेतावनी
जिमी को सात दिन एक सफ़ेद, साउंडप्रूफ़ कमरे में रहना था, बिना किसी इंसानी संपर्क के। टीम ने इसे मानसिक रूप से ख़तरनाक माना, इसलिए एक डॉक्टर बाहर से उनकी हालत पर नज़र रख रहे थे। डॉक्टर बताते हैं कि उन्होंने तेईस साल मानसिक रोगियों के बीच काम किया है, और उनकी नज़र में यह स्थिति उससे भी कहीं ज़्यादा भयानक है।
वीडियो में बताया गया कि ऐसे सफ़ेद कमरे में पचास घंटे से ज़्यादा रहना स्थायी मनोवैज्ञानिक नुकसान कर सकता है, जबकि जिमी को 168 घंटे रहना था। यह भी कहा गया कि अगर वे आपा खोकर "साइकोसिस" जैसी स्थिति में पहुँच जाते, तो टीम को उन्हें बाहर निकालना पड़ता।
जिमी पहले सात दिन ज़मीन के नीचे दफ़न रह चुके हैं। जब डॉक्टर से पूछा गया कि क्या यह उससे भी मुश्किल है, तो उन्होंने कहा कि "बहुत मुश्किल", क्योंकि यहाँ कोई सामाजिक संपर्क नहीं है। डॉक्टर के मुताबिक़ जब दिमाग़ तक कोई जानकारी नहीं पहुँचती, तो पागलपन जैसी हालत पैदा होती है, जिसमें मतिभ्रम (हैलुसिनेशन) और पैरानोया भी शामिल हो सकते हैं।
कमरे में क्या था और खाना कैसे पहुँचता था
पूरे हफ़्ते के लिए जिमी के पास गिनी-चुनी चीज़ें थीं:
- सोने के लिए एक बेड
- एक नोटबुक और पेन
- दोबारा भरी जा सकने वाली एक बोतल
- टूथब्रश, टूथपेस्ट और साबुन
- टॉयलेट वाला बाथरूम और पानी के लिए एक सिंक
खाना लगभग सौ फ़ुट लंबे कन्वेयर बेल्ट से आता था, ताकि किसी इंसान से आमना-सामना न हो। जिमी यह भी बताते हैं कि पूरा सेट धातु की ज़ंजीरों से बंद था। उन्हें यह ख़याल डराता था कि अगर सेट में आग लग जाए, तो दरवाज़ा खुलने से पहले ही वे ज़िंदा जल जाएँगे। फिर उन्होंने खुद ही इस बारे में सोचना छोड़ने का फ़ैसला किया।
पहले घंटे: टाइल्स की गिनती और भूख
जिमी को जल्दी समझ आ गया कि यहाँ अपना मन बहलाना बहुत मुश्किल होगा। नौवें घंटे के आसपास उन्होंने दीवारों की टाइल्स गिन डालीं। उनके हिसाब से दीवारों पर 1,900 टाइल्स थीं, और छत व फ़र्श मिलाकर कुल 2,860।
इससे भी बड़ी चिंता खाने की थी। करीब चौदह घंटे बीतने के अपने अनुमान पर वे कहते हैं कि समय अभी से लंबा लगने लगा है और अब तक खाना नहीं आया। वे सोचते हैं कि आने से पहले ज़्यादा खा लेना चाहिए था।
बाहर टीम जानबूझकर खाना अनियमित समय पर भेज रही थी, ताकि जिमी को वक़्त का पता न चले। मसलन, सुबह छह बजे के आसपास नाश्ता भेजा गया। लेकिन कमरा साउंडप्रूफ़ था, इसलिए जिमी को खाना आने की आवाज़ नहीं सुनाई दी। लगभग दो घंटे बाद जाँचने पर उन्हें पता चला। खाना ठंडा और पिलपिला था, फिर भी उन्होंने कहा कि कम से कम खाने को कुछ तो मिला।
उत्तेजना की कमी पर डॉक्टर की टिप्पणी
अगले कुछ घंटों में जिमी ने खुद को ज़्यादा से ज़्यादा व्यस्त रखने की कोशिश की। डॉक्टर ने देखा कि उनके पास वक़्त बिताने का कोई साधन नहीं है। उनका कहना था कि अगर बुनियादी स्टिमुलेशन की कमी में ही यह हाल है, तो उन्हें नहीं लगता कि जिमी सात दिन टिक पाएँगे।
डॉक्टर ने एक दिलचस्प बात भी कही: जब किसी से सब कुछ छीन लिया जाए, तो एक साधारण धातु की प्लेट भी आईफ़ोन जितनी मज़ेदार लगने लगती है। उन्होंने अंदाज़ा लगाया कि इस बोरियत से जिमी जल्द ही चिड़चिड़े हो जाएँगे। उधर जिमी कह रहे थे कि उन्हें लगता है जैसे उनके भीतर का इंसान मर रहा है, और वे सोने चले गए।
समय का अंदाज़ा कैसे बिगड़ा
यहीं से वीडियो का केंद्रीय विषय सामने आता है: बाहर का समय और जिमी का अनुमान अलग-अलग होने लगते हैं। जिमी को लगा कि चालीस घंटे हो चुके हैं। टीम के अनुसार वे असल से छह घंटे आगे का समय मान रहे थे, और उस वक़्त दूसरे दिन के लगभग चार बज रहे थे। जिमी हैरान थे कि अभी नौ बजने चाहिए थे, चार कैसे बजे होंगे।
समय की गड़बड़ी से दूसरी दिक्कतें भी पैदा हुईं। जिमी को नींद नहीं आ रही थी और वे कहते हैं कि कमरे की रोशनी उनके दिमाग़ पर बहुत असर डाल रही है। डॉक्टर का आकलन था कि उन्हें नींद इसलिए नहीं आ रही क्योंकि शरीर को उसकी ज़रूरत नहीं है, वे बस सोकर वक़्त काटना चाहते हैं। डॉक्टर की राय में उन्हें जागते हुए कोई ऐसा काम करना चाहिए जिसमें ध्यान लगा रहे। जब जिमी दीवार पर चढ़ने की कोशिश करते दिखे, तो डॉक्टर ने कहा कि ऐसी जगह से आज़ाद होने की कोशिश करना इंसान के लिए स्वाभाविक है।
खाने के मामले में भी यही उलझन रही। पहला खाना बहुत ठंडा था और जिमी ने कहा कि वे इसे खाने के बजाय भूखे रहना पसंद करेंगे। फिर जब अगला खाना आया तो उन्हें लगा कि बस कुछ ही मिनट हुए हैं, और वे सोचने लगे कि क्या दोनों खाने होंगे। नैरेशन में वे बताते हैं कि यह दूसरे दिन का "दूसरा नाश्ता" था और उन्हें बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि खाना कितनी देर से बेल्ट पर पड़ा था। डॉक्टर के मुताबिक़ यह हल्का पागलपन था, जो वक़्त के साथ बढ़ता जाएगा।
गिनती, बोरियत और एक नई तरह की बेचैनी
कुछ करने को न पाकर जिमी ने हज़ार तक गिनती की। डॉक्टर का कहना था कि जब करने को कुछ न हो, तो उस स्थिति को अपनाना ही पड़ता है, लेकिन जैसे-जैसे समय बढ़ेगा, जिमी के पास करने को कुछ नहीं बचेगा। बाद में जिमी ने माना कि डॉक्टर बिल्कुल सही थे, क्योंकि आगे चलकर उनकी हद पार हो गई थी।
जिमी कहते हैं कि सोकर वक़्त काटने की उनकी रणनीति से समय तो कटा, लेकिन उससे दूसरी समस्याएँ भी पैदा हुईं। सोते रहने की वजह से एक बार खाना सात घंटे तक बेल्ट पर पड़ा रहा। उसके साथ आई आइसक्रीम पिघलकर बेकार हो चुकी थी और वे फिर भूखे रह गए।
इसी दौर में जिमी ने अपनी मनःस्थिति पर एक दिलचस्प बात कही। आम तौर पर वे एक साथ कई वीडियो पर काम करने की वजह से बहुत तनाव में रहते हैं। यहाँ वह तनाव नहीं था, लेकिन भारी बेचैनी थी कि बाहर दुनिया में कई अच्छी चीज़ें हो रही होंगी जो वे मिस कर रहे हैं। उन्होंने इसे एक अलग भावना बताया जिसकी उन्हें आदत नहीं है, और कहा कि कुछ न कर पाना कितना मुश्किल होता है, यह अजीब है।
कल्पना का सहारा और 447 चावल के दाने
अपने हिसाब से पैंसठवें घंटे के आसपास जिमी सोचने लगे कि हाथों के बल कैसे खड़े होते हैं, और अफ़सोस जताया कि यहाँ आने से पहले उन्होंने इसकी बुनियादी बातें नहीं सीख लीं। डॉक्टर ने कहा कि अब उन्हें अपने दिमाग़ में ख़याल गढ़ने होंगे, ताकि वे गहरे डिप्रेशन में जाने से बच सकें।
जिमी ने ठीक यही किया। वे कल्पना करने लगे कि वे एक पार्क में टहल रहे हैं, जहाँ हरी घास है, कोई मछली पकड़ रहा है, आसमान साफ़ है और पंछियों की आवाज़ें आ रही हैं। फिर किसी चीज़ ने यह कल्पना तोड़ दी और वे बोले, "तुमने मेरा सपना बर्बाद कर दिया।" बाहर बैठी टीम का कहना था कि वे उन्हें पागल होते देख रहे हैं।
इसके बाद चावल, शकरकंद और स्टेक वाला खाना आया, जिसे जिमी ने अब तक का सबसे अच्छा खाना कहा। लेकिन उन्होंने कहा कि कोई आम इंसान इसे खा लेता, जबकि वे चावल के दाने गिनेंगे। उनकी गिनती में ट्रे में 447 दाने निकले।
आधा रास्ता, जो उन्हें पता ही नहीं चला
थकान महसूस होने पर जिमी ने मान लिया कि यह पाँचवें दिन की रात होगी। नैरेशन बताता है कि असल में चुनौती आधी भी नहीं हुई थी और वे पूरे एक दिन आगे का समय मान रहे थे। रोशनी से बचने के लिए उन्होंने बाथरूम पर परदे लगा दिए, जिसे वे अपनी अब तक की सबसे समझदारी भरी चाल बताते हैं। वे उस बाथरूम में लगातार बारह घंटे सोए।
84 घंटे पर, यानी आधिकारिक रूप से आधे रास्ते पर, टीम ने जिमी को यह बात खाने के ज़रिए बताने की योजना बनाई। उन्होंने अक्षरों वाला पास्ता (स्पघेटीओस) भेजा, जिसके अक्षर जोड़कर संदेश पढ़ा जा सकता था। जिमी पहले तो यह पहचान ही नहीं पाए कि यह क्या है और इसे सॉस वाला कोई रोल समझ बैठे। एक "N" दिखने पर भी उन्होंने अक्षर अलग करने के बजाय उन्हें खा लिया। टीम हैरान थी कि उन्होंने अक्षर देखे कैसे नहीं। जिमी ने खुद ही मज़ाक में कहा कि उम्मीद है इनसे कोई शब्द नहीं बनाना था जिससे ज़्यादा खाना मिलता। टीम का कहना था कि बाहर आकर यह देखने पर वे खुद को बहुत बेवकूफ़ समझेंगे।
भूख, बीस मिनट की खुशी और फिर डिप्रेशन की लहर
इस समय तक तेज़ रोशनी जिमी को बहुत परेशान कर रही थी। उनके सिर में दर्द था और भूख बहुत लग रही थी। डॉक्टर का कहना था कि पर्याप्त कैलोरी मिलने के बावजूद उनका शरीर और खाना माँग रहा है, क्योंकि वे बहुत कम उत्तेजित महसूस कर रहे हैं और यह कमी भूख जैसी लगती है। जिमी बार-बार जाँचते रहे कि खाना आया या नहीं। ख़ाली समय में उन्होंने कमरे में घूमना भी आज़माया, फिर यह सोचकर रुक गए कि इससे चक्कर आ सकते हैं।
फिर मैकडॉनल्ड्स का एक बैग आया। हल्का होने की वजह से उन्हें डर था कि कहीं यह ख़ाली न हो, लेकिन उसमें सच में खाना था। जिमी बताते हैं कि जब भी खाना मिलता है, उन्हें बीस मिनट की असली खुशी मिलती है और वे फिर से इंसान जैसा महसूस करते हैं। लेकिन खाना ख़त्म होते ही डिप्रेशन की एक लहर आ जाती थी और सवाल उठता था कि अब क्या करें। उनके शब्दों में हर पल बिताना बहुत मुश्किल हो गया था और उन्हें लग रहा था कि उनका दिमाग़ धीरे-धीरे बेवकूफ़ी की ओर बढ़ रहा है।
व्यस्त रहने के लिए उन्होंने चीज़बर्गर के रैपर और टूथब्रश वाले कप से बास्केटबॉल का खेल बनाया। फिर एक कांटे और प्लेट से "बेसबॉल" जैसा खेल खेलने और चीज़ें दूर फेंकने की कोशिश की। फिर भी नतीजा वही रहा: "मैं बोर हो गया हूँ।"
"चौथा दिन" और कैमरों पर ग़ुस्सा
जिमी को लग रहा था कि अब बस दो दिन बचे हैं, लेकिन नैरेशन में बताया गया कि यह चौथा दिन था। पहले ही उन्होंने टीम से कह रखा था कि वे चाहे जितना चिल्लाएँ, भीख माँगें या विनती करें, उन्हें समय से पहले बाहर न निकाला जाए।
अपने अनुमान से वे 113 घंटे पूरे कर चुके थे और मान रहे थे कि सिर्फ़ 55 घंटे बचे हैं। उन्होंने वीडियो एडिट करने वाले से कहा कि असल बचा हुआ समय दिखाया जाए। टीम का अंदाज़ा था कि सच जानकर वे ग़ुस्सा होंगे।
इसी दौर में जिमी का ध्यान बार-बार कैमरों पर गया। उन्होंने पूछा कि क्या इंसान को प्राइवेसी भी नहीं मिल सकती, और कहा कि चौबीसों घंटे उन पर कैमरे लगे हैं, इससे वे पागल हो जाएँगे। उन्होंने कन्वेयर पर कुछ फेंकने का "जीनियस" आइडिया आज़माया, उसे बॉलिंग की तरह फेंका और इसमें अपनी उँगली ज़ख़्मी कर बैठे। वे कहते हैं कि उन्होंने सच में नहीं सोचा था कि यह वीडियो इतना मुश्किल होगा, और उन्हें अब एक जानवर जैसा महसूस हो रहा है, जैसे उनके सारे इंसानी अधिकार छिन गए हों।
अपना हिसाब लगाने की कोशिश
अपने अंदाज़े से पाँचवें दिन के बीच में जिमी ने कहा कि उन्हें अपनी गर्लफ्रेंड और अपनी टीम की याद आ रही है, "यहाँ तक कि नोलन की भी।" मानसिक रूप से वे अपनी हद तक पहुँच चुके थे और इसे "बहुत अमानवीय" बता रहे थे। वे इतने समय से वहाँ थे कि सपनों में भी खुद को उसी कमरे में देखते थे, सोचते थे कि यह पाँचवाँ-छठा दिन है, और फिर जागकर पता चलता था कि वह सपना था। उन्होंने यहाँ तक कहा कि बस समय बता दिया जाए तो वे बहुत पैसे दे देंगे।
फिर जिमी ने अपने इस अनुमान के कारण गिनाए कि चुनौती में 33 घंटे बचे हैं:
- वे अब तक पाँच बार सो चुके हैं।
- वे आम तौर पर दिन में एक बार टॉयलेट जाते हैं और यहाँ आने के बाद पाँच बार जा चुके हैं।
- उनकी गर्दन पर उतने बाल उग आए हैं जितने आम तौर पर एक हफ़्ते में उगते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर किसी वजह से यह पाँचवाँ दिन निकला, और भगवान न करे चौथा दिन, तो वे अपना आपा खो देंगे।
एक सपने में उन्होंने एक लाख तक गिनती की थी, इसलिए जागकर उन्होंने तय किया कि कमरे के हज़ार चक्कर लगाएँगे। बाद में फ़ुटेज देखते हुए वे बताते हैं कि यह सब दिमाग़ को ठिकाने पर रखने के लिए था। चक्कर शुरू करते ही उन्हें लगा कि हज़ार बहुत ज़्यादा है, क्योंकि सिर घूमने लगा था। अंत में उन्होंने माना कि मनोरंजन के लिए सब कुछ आज़मा लिया, पर कुछ काम नहीं कर रहा।
बेली और सूज़ी का "बदला"
चक्कर ख़त्म होने के बाद कार्ल "100 दिन एक साथ फँसे हुए" वाली चुनौती से दो प्रतिभागियों, बेली और सूज़ी, को ले आए। उन्हें जिमी का हाल दिखाते हुए कहा गया कि यह उस आदमी का चेहरा है जिसने तुम्हें सौ दिन क़ैद में रखा था। तुलना के सवाल पर सूज़ी ने कहा कि अगर वे वहाँ होतीं, तो चाहतीं कि उनके साथ कोई हो। ग़ौरतलब है कि उनकी चुनौती में लोग साथ थे, जबकि जिमी पूरी तरह अकेले थे।
इस बार बाज़ी पलट चुकी थी और सफ़ेद कमरे में जिमी थे। बेली और सूज़ी ने बदले के तौर पर कन्वेयर से एक ख़ाली ट्रे भेज दी और कहा कि उन्हें बिल्कुल बुरा नहीं लग रहा, जिमी इसी लायक़ हैं। जिमी ने अंदाज़ा लगाया कि यह कार्ल का काम है और बार-बार कहते रहे, "तुम ऐसा नहीं कर सकते।" बाहर से कहा गया कि अब उन्हें बहुत तकलीफ़ होने लगी है। फिर भी जिमी ने ख़ुद माना कि शायद वे इसी लायक़ हैं।
सबसे अंधेरा दौर
इस हिस्से में जिमी के विचार और गहरे होते जाते हैं। वे सोचते हैं कि अगर मरने के बाद इंसान हमेशा के लिए ऐसे ही सफ़ेद कमरे में चला जाता हो, तो वह कितना बुरा होगा। वे बताते हैं कि सोते समय वे खुद को बाहर की दुनिया में देखते हैं और जागने पर अकेलेपन में डिप्रेस हो जाते हैं। इसलिए जितना ज़्यादा सोते हैं, उतना खुश रहते हैं।
अपनी पिछली चुनौतियों से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि वे सात दिन राफ़्ट पर बिता चुके हैं, सात दिन ज़िंदा दफ़न रह चुके हैं, और अब सात दिन एकांत कारावास में। उनके मुताबिक़ अगर उन्हें पता होता कि यह इतना मुश्किल होगा, तो वे इसे कभी नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा कि अगर स्क्रीन के ऊपर बाएँ कोने में दिखने वाला घंटों का आँकड़ा बीस से थोड़ा भी ज़्यादा निकला, तो वे आपा खो देंगे। उन्होंने बहुत अकेलापन महसूस होने और गर्लफ्रेंड की याद आने की बात दोहराई और इसे "बस टॉर्चर" कहा।
बाहर टीम सवाल कर रही थी कि क्या वे रो रहे हैं। उनका कहना था कि जिमी की हालत ठीक नहीं है: वे ज़मीन पर सो रहे हैं, चीज़ें फेंक रहे हैं, ग़ुस्सा कर रहे हैं और खाना मिलने पर बिल्कुल बच्चे की तरह खुश हो जाते हैं।
आख़िरी दिन: आठ घंटे का भ्रम
जिमी मान रहे थे कि अब बस आठ घंटे बचे हैं, फिर दरवाज़ा खुलेगा और वे आज़ाद होंगे। टीम के मुताबिक़ वे सोच रहे थे कि आख़िरी कुछ घंटे सो रहे हैं, जबकि असल में 24 घंटे बचे थे। टीम ने कहा कि सच का अहसास होने पर उनका दिल टूट जाएगा, और उन्होंने इसे गंभीर स्थिति माना।
जिमी ने यह सोचकर एक खाने को "आख़िरी खाना" कहा और उसका आनंद लिया कि अगले दो-तीन घंटों में दरवाज़ा खुल जाएगा। फिर उन्होंने कमरे की सफ़ाई शुरू की और माना कि वे सफ़ाई का बहाना कर रहे हैं, असल में बस ऊब चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद थी इस प्रयोग से मानसिक स्पष्टता मिलेगी और शायद वे अपने बारे में कुछ सीखेंगे। लेकिन असल में वे बस यह हुनर लेकर जा रहे हैं कि कन्वेयर बेल्ट के दरवाज़े में चीज़ें कैसे फेंकी जाती हैं, "या शायद वह भी नहीं।"
कुछ समय बाद उन्होंने ज़िद के साथ कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं हो सकता कि चौबीस घंटे से ज़्यादा बचे हों, वे यहाँ और चौबीस घंटे नहीं रह सकते, उनकी हद हो चुकी है, और वे यह मानने से इनकार करते हैं। फिर उन्होंने वक़्त काटने के लिए दोबारा गिनती शुरू की और 5,425 तक पहुँचे। एक बार उन्हें लगा कि बाहर कोई आवाज़ सुनाई दी है। फिर वे बार-बार दोहराते रहे "मैं दुखी हूँ" और "मुझे यहाँ से बाहर निकालो।"
बाहर से टीम ने कहा कि वे मुश्किल से इंसान लग रहे हैं: बेड पर लेटे हैं, आँखें ढकी हैं, कोई उत्तेजना नहीं। उन्हें चिंता थी कि बाहर आकर जिमी कैसा बर्ताव करेंगे, क्या वे बदले हुए इंसान होंगे, या ऐसे इंसान बन जाएँगे जो कुछ भी करने लायक़ नहीं बचा। टीम ने कहा कि उन्होंने आज तक किसी वीडियो में जिमी पर इतना दबाव नहीं डाला, क्योंकि इस बार उनका इंसानी संपर्क पूरी तरह तोड़ दिया गया था।
बाहर निकलना
आख़िर में टीम ने तय किया कि जिमी को बहुत आराम से जगाया जाए, जैसे किसी बच्चे को जगाते हैं। उन्हें बताया गया कि बस दस मिनट बचे हैं। उलटी गिनती के बीच जिमी को याद आया कि उन्होंने पैंट नहीं पहनी है। दरवाज़ा खुलने पर उन्होंने माफ़ी माँगी कि वे पैंट पहन रहे थे।
बाहर आकर उन्होंने बताया कि उनका सिर थोड़ा हल्का लग रहा है। उन्होंने कहा कि यह अजीब है, लेकिन इस चुनौती के बाद वे भूल गए हैं कि लोगों से कैसे मिलते हैं। आँखों के सामने वह तेज़ रोशनी न होने से उन्हें अच्छा लग रहा था और बाहर की छत भी उन्हें "कमाल की" लगी। उन्होंने माना कि उन्हें लग रहा था वे आख़िरी चौबीस घंटे कभी ख़त्म नहीं होंगे। वे सूरज देखना चाहते थे, लेकिन बाहर निकलने पर अँधेरा था। फिर भी उनका कहना था कि बाहर की दुनिया देखकर अच्छा लग रहा है।
मैं अगले सात दिनों तक कैद में अकेले रहने की कोशिश करूँगा। मुझे सील कर दो।
बाय जिमी।
उम्मीद है मैं पागल ना हो जाऊँ।
अगले सात दिनों तक मुझे इस साउंडप्रूफ वाइट रूम में किसी भी ह्यूमन कॉन्टैक्ट या उम्मीद के बिना जिंदा रहना होगा। और क्योंकि ये मानसिक रूप से खतरनाक है, इसलिए एक डॉक्टर बाहर से ध्यान रखेंगे कि कहीं मैं पागल न हो जाऊँ।
मैंने तेईस साल पागलों के बीच काम किया है और ये उससे भी बहुत ज्यादा भयानक है।
ऐसे वाइट रूम में पचास घंटों से ज्यादा रहना एक परमानेंट साइकोलॉजिकल डैमेज भी कर सकता है। और मैं यहाँ रहूँगा पूरे एक सौ अड़सठ घंटे। और ऐसा भी हो सकता है कि मैं अपना आपा खो दूँ और साइकोसिस नाम की एक स्टेट में पहुँच जाऊँ। फिर उन्हें मुझे बाहर निकालना होगा, क्योंकि उससे मुझे परमानेंट डैमेज हो सकता है।
उसे 7 दिन जमीन के अंदर दफनाया। क्या ये उससे भी मुश्किल है?
बहुत मुश्किल, क्योंकि सोशल कॉन्टैक्ट नहीं है। जब हमारे दिमाग में जानकारी नहीं आती, तब क्रेजीनेस पैदा होती है। हैलुसिनेशन होते हैं, पैरानोइया भी होता है।
और पूरे हफ्ते बचे रहने के लिए मेरे पास है मेरे सोने के लिए एक बेड, एक नोटबुक और एक पेन, एक पुनः भरने योग्य बोतल, एक टूथब्रश और टूथपेस्ट और एक सोप, टॉयलेट जाने के लिए बाथरूम और पानी के लिए एक सिंक।
इस पॉइंट पर मैं समझ गया था कि इस चैलेंज में खुद का मन बहलाना बहुत ही मुश्किल होगा, खासकर नौवें घंटे पर जब मैंने ये किया।
आप सोच रहे होंगे कि इन दीवारों पर कितनी टाइल्स हैं? और सही जवाब है पूरी उन्नीस सौ। और अगर छत और फ्लोर को मिलाया जाए तो ये हैं पूरी दो हजार आठ सौ साठ।
पर इन सबसे भी ज्यादा जरूरी है, जो कि मेरे पेट की राय है, वो है मेरे खाने का वक्त। तो अगर आप सोच रहे हो कि मुझे खाना कैसे मिलेगा, तो यहाँ एक कन्वेयर बेल्ट है जो पूरी सौ फीट की दूरी तक फैला है, ताकि मुझे ह्यूमन इंटरेक्शन के बिना ही खाना मिल सके।
शायद मुझे अंदर चौदह घंटे हो चुके हैं। कमाल की बात है ना, मुझे अभी से दो घंटे ज्यादा लगने लगे हैं। और चैलेंज का सबसे मुश्किल पार्ट, अब तक मेरा खाना नहीं आया। सोच रहा हूँ यहाँ आने से पहले ज्यादा खा लेना चाहिए था। जल्द ही कोई मुझे खाना खिला दे तो बहुत अच्छा होगा। तुम्हारा दोस्त बहुत भूखा है।
क्या तुमने अपने हाथ धोए?
हाँ, बिल्कुल ही धोए थे।
नहीं धोए।
हम उसे खाना रैंडमली भेज रहे हैं, जैसे अभी छह बजे हैं, ताकि उसे वक्त का पता न चले। अभी छह बजने वाले हैं और हम उसे ब्रेकफास्ट भेज रहे हैं।
मेरे दोस्त मुझे कब खिलाएँगे? बहुत भूख लगी है। बहुत भूख लगी है।
अब चूँकि ये रूम साउंडप्रूफ है, खाना आने के बावजूद भी दो घंटे बाद चेक करने पर अहसास हुआ कि खाना आया है।
मैं चल भी नहीं पा रहा। अब ये थोड़ा ज्यादा ही हो रहा है।
तो जब मैंने फाइनली चेक किया…
मैंने सोचा ही था कि खाना आएगा। इसका टेस्ट कमाल है। ये ठंडा और पिलपिला है, पर खाने के लिए कुछ तो मिला है। ये सच में, ये बढ़िया है।
सॉलिटरी कन्फाइनमेंट सेट लिटरली मेटल चेन्स से बंधा हुआ है। अगर इस सेट में आग लगती है, तो इसे खोलने से पहले ही मैं जिंदा जलकर मर जाऊँगा। जाने दो, मैं उसके अलावा कुछ सोचना चाहूँगा।
अगले कुछ घंटों के लिए मैंने खुद को ज्यादा से ज्यादा स्टिम्युलेटेड रखने की कोशिश की।
वो तो कमाल का था।
उसके पास कुछ नहीं है। वक्त बिताए तो कैसे बिताए? अगर बुनियादी अनुकरण में ही उसका ये हाल है, तो मुझे नहीं लगता वो सात दिन तक टिक पाएगा।
दिलचस्प है, जब आप किसी से सब कुछ ले लेते हो, तब एक आम सी मेटल प्लेट भी एक आईफोन जितनी मजेदार लगती है।
वो जल्द ही चिड़चिड़ा हो जाएगा इस बोरियत की वजह से।
जैसे कि मेरे अंदर का इंसान मर रहा है। मैं बस सोने जा रहा हूँ, देखते हैं क्या होता है।
शायद मुझे चैलेंज में चालीस घंटे हो चुके होंगे।
जिमी जितना सोच रहा है, उससे छह घंटे पीछे है।
मतलब अभी चार बज रहे होंगे दूसरे दिन के।
मुझे लगा आज ट्रैक पर आ जाएगा।
वक्त का अंदाजा खोने से दूसरी प्रॉब्लम्स खड़ी हो गईं।
मैं चाहे कुछ भी कर लूँ, मुझे बस नींद नहीं आ रही। ये लाइट्स मेरे दिमाग पर बहुत असर कर रही हैं। शायद अगले पाँच दिनों तक ऐसे ही पड़े रहना चाहिए।
उसे इसलिए नींद नहीं आ रही क्योंकि उसे उसकी जरूरत नहीं है। वो बस सो-सोकर वक्त बिताना चाहता है। पर उसे कुछ ऐसा करना चाहिए जो कि जागते हुए उसका ध्यान उस चीज पर आकर्षित कर सके।
वो दीवार चढ़ रहा है।
इंसानों के लिए वो स्वाभाविक है, वहाँ से आजाद होने की कोशिश करना।
मैंने सोचा कैसे चार बजे होंगे? या अभी नौ बजने चाहिए ना?
और जब मैंने मेरा पहला खाना खाना पूरा किया, तब साढ़े चार बज चुके थे।
गलत मत समझना, खाना बढ़िया लग रहा है, पर ये बहुत ही ठंडा है। और खाने से अच्छा मैं भूखा ही रहूँगा।
और जब मेरा दूसरा खाना आया, तब लगा बस कुछ ही मिनट्स हुए हैं।
अब कन्वेयर बेल्ट पर क्या आया है? रुको, अभी कितना वक्त हुआ है? क्या मुझे दोनों खाने होंगे या… वो बेशक ही डे टू होगा जब मुझे सेकंड ब्रेकफास्ट मिला। शायद उन्हें बुरा लगा होगा कि मैंने ब्रेकफास्ट नहीं किया। शायद नहीं…
इस वक्त मुझे कोई अंदाजा नहीं था कि वो खाना कन्वेयर बेल्ट पर कब से पड़ा हुआ था।
देखा, वो थोड़ा पागल हो रहा है? और यही चीज वक्त के साथ-साथ बढ़ती जाएगी। ये बस दूसरा दिन है।
समझ नहीं आ रहा क्या करूँ। देखते हैं मैं कहाँ तक गिन सकता हूँ। 1, 2, 3, 4।
ये पागलपन लग रहा है।
565, 566, 567।
पर जब हम ऐसे हालात में होते हैं, जब करने को कुछ नहीं होता…
999।
तब हमें बस उसे अपनाना होता है।
1,000।
जैसे-जैसे ये बढ़ेगा, तब उसके पास करने के लिए कुछ भी नहीं बचेगा।
और मुझे मानना ही होगा, डॉक्टर बिल्कुल सही थे। क्योंकि आगे इस चैलेंज में मेरी हद खत्म हो चुकी थी।
क्या तुम्हें लगता है? क्या तुम्हें लगता है…
और पूरे चैलेंज के दौरान सोने की मेरी स्ट्रेटेजी ने मेरा टाइम तो पास कर दिया, लेकिन आखिर में उससे दूसरी दिक्कतें भी हुईं।
वहाँ खाना दिख रहा है। ये बहुत पिलपिला और ठंडा है। ये यहाँ पर कब से पड़ा है?
वो खाना वहाँ सात घंटों से पड़ा है।
मैं कुछ भी देकर ये आइसक्रीम खाना चाहता। इसमें खाने लायक कुछ बचा होता तो बहुत अच्छा होता। पर मैं फिर से भूखा रह जाऊँगा।
नॉर्मली चूँकि हम एक साथ कई वीडियोज पर काम करते हैं, तब मैं आम तौर पर बहुत स्ट्रेस्ड होता हूँ। पर अभी की बात करूँ, मुझे उतना स्ट्रेस्ड नहीं लग रहा, पर बहुत एंग्जायटी हो रही है। क्योंकि कई सारी कूल चीजों को मैं मिस कर रहा हूँ, जो अभी दुनिया में हो रही होंगी। ये अजीब है। ये एक अलग इमोशन है जिसकी मुझे आदत नहीं है।
ये बहुत ही अजीब है, कुछ ना कर पाना कितना मुश्किल है। मुझे सच में बहुत बोर हो रहा है। ये मेंटली बहुत मुश्किल होता जा रहा है। मैं बोर हो गया हूँ। मदद करो।
मैं एक सौ अड़सठ घंटे के मार्क के करीब भी नहीं था। तो पैंसठवें घंटे पर मैं ये सोचने लगा।
हाथों पर कैसे खड़े होते हैं? काश यहाँ आने से पहले मैं किसी से बेसिक्स सीख लेता कि हाथों पर कैसे खड़े होते हैं।
उसे अपने दिमाग में मौजूदा खयालों को इन्वेंट करना होगा, ताकि वो खुद को इंटेंस डिप्रेशन में जाने से बचा सके।
मैं सोचूँगा जैसे मैं एक पार्क में चल रहा हूँ। यहाँ हरी घास है, कोई फिशिंग कर रहा है।
वो लिटरली अपने दिमाग में परिदृश्य बना रहा है।
ओह माय गॉड।
आज आसमान बहुत साफ है। पंछियों की आवाज़ें।
तुमने मेरा सपना बर्बाद कर दिया। ओह माय गॉड। हम उसे पागल होते देख रहे हैं।
उन्होंने और खाना भेजा है। शायद यहाँ है थोड़ा राइस, स्वीट पोटैटो और स्टेक। ये इस चैलेंज में अब तक सबसे बढ़िया खाना है।
अगर आप यहाँ देखोगे तो थोड़ा राइस दिखेगा। और कोई भी आम इंसान होता तो इसे खा लेता, पर मैं इसे गिनने वाला हूँ। 13, 14, 15, 16, 17। 97, 98, 99, 100, 101। 265, 266, 267। 307, 308, 309, 310। 421, 422, 423, 424। 445, 446, 447। इस मेटल ट्रे में पूरे 447 राइस ग्रेन्स हैं। इस जानकारी ने आपको एक गंभीर रूप से बदल दिया होगा।
मुझे बहुत थकान हो रही है। मतलब ये ज़रूर पाँचवें दिन की रात होगी।
अभी चैलेंज आधा भी नहीं हुआ था और मैं एक पूरा दिन पीछे था।
मैं बाथरूम पर थोड़े पर्दे लगा देता हूँ। ये बहुत ही ब्राइट है। जो मेरा अब तक का स्मार्टेस्ट मूव है, क्योंकि मैं उस बाथरूम में पूरे बारह घंटे तक सोया था।
हम चैलेंज में ऑफिशियली आधे तक आ गए हैं। 84 घंटे। मतलब जिमी। और हम उसे ये उसके अगले खाने से बताएँगे। उसके लिए मिक्स कर देते हैं। वो लेटर्स को फिर से जोड़ सकता है।
मुझे भूख लगी है। भूख लगी है मुझे। देखते हैं इस बार क्या है। ये क्या है?
उसने स्पघेटी कभी नहीं देखी? और मैं सिर्फ इसका नाम नहीं भूल रहा था?
इसे क्या कहते हैं? ये है… एक रोल है। एक रोल के लिए ये बहुत ज़्यादा सॉस है। ये केचप जैसा लग रहा है।
आखिर उसने वो लेटर्स देखे कैसे नहीं?
ये एक एन है। हाँ। हाँ। तुम इन स्पघेटीओस को बाहर निकालना भूल गए। नहीं। जब भी उसे कोई लेटर मिलता है, उसे खा लेता है।
उम्मीद है उनसे कुछ भी स्पेल नहीं करना था, कि उन्हें खाने से पहले मुझे जादू से उन्हें जोड़ना था और ज़्यादा खाना पाने के लिए कोई वर्ड बनाना था। मुझे यकीन है वो वैसा नहीं चाहते होंगे।
जब वो बाहर आकर इसे देखेगा तो खुद को बहुत बेवकूफ समझेगा।
डिप्रेशन। इस पॉइंट पर ये ब्राइट लाइट्स मुझे बहुत परेशान कर रही थीं।
अभी मेरे सिर में बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा है और मुझे बहुत भूख लगी है। मेरी बॉडी के साथ क्या हो रहा है?
वो और खाना माँग रहा है, पर्याप्त कैलोरीज़ मिलने के बावजूद भी, क्योंकि वो बहुत कम उत्तेजित फील कर रहा है और उसे लग रहा है कि उसे भूख लगी है।
और आखिर में मैंने बार-बार खाना आया या नहीं चेक किया।
अजीब तरह से अच्छा लग रहा है। क्या ऐसा करने से मुझे चक्कर आएँगे? शायद तुम्हें रुकना चाहिए। सही कहा। शायद मुझे रुकना चाहिए।
यहाँ पर मैकडॉनल्ड्स का एक बैग है, पर ये बहुत ही हल्का है। अगर इस बैग में मैकडॉनल्ड्स नहीं हुआ तो मैं डिप्रेस हो जाऊँगा। ये तो सच में है। लेट्स गो।
जब भी मुझे खाना मिलता है, तब मुझे बीस मिनट की असली खुशी मिलती है। फिर से इंसानों जैसा लगता है। मैं खुशी रोक नहीं पा रहा। मैं बहुत खुश हूँ।
और जैसे ही खाना खत्म हुआ, डिप्रेशन की एक लहर सी आ गई। सोचा, अब मैं क्या करूँगा? हर एक पल बिताना बहुत मुश्किल हो गया था।
मैं सोचता था वक्त क्या हुआ होगा, पर मुझे कोई अंदाज़ा नहीं है। मेरा दिमाग धीरे से बढ़ रहा है बेवकूफी की ओर। मुझे खुद को बिज़ी रखना होगा।
अब हम लेंगे ये मैकडॉनल्ड्स चीज़बर्गर रैपर और उसके साथ ही ये कप जिसमें मेरा टूथब्रश था। और अब ये बना बास्केटबॉल। लेब्रोन, स्टीफन, कोबे। शायद बास्केटबॉल मेरे लिए नहीं है। मैं हमेशा से बेसबॉल में बेटर था। मारो। मैं ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहता था।
और फिर मुझे याद आया। इसमें एक फोर्क भी था। कि पहला खाना मुझे एक अक्षय प्लेट में मिला था। मैं इसे फेंकने वाला हूँ, बहुत दूर। बहुत मज़ा आएगा।
मैं बोर हो गया हूँ। अब भी इस रूम में दो दिन बिताने हैं और अब लग रहा है, एक पॉइंट पर मैं बाहर चला जाऊँगा।
ये डे फोर है। चाहे मैं कितना भी चिल्लाऊँ, भीख माँगूँ या विनती करूँ या डकारूँ, वक्त से पहले बाहर मत आने देना। ओके जिमी, समझ गया।
मेरा दिल कह रहा है, अब तक मैंने 113 घंटे पूरे किए हैं। मतलब कि अभी पचपन घंटे ही बचे हैं। जो भी एडिट कर रहा है, इन्हें दिखाओ असल में कितने घंटे बचे हुए हैं। उम्मीद है वो पचपन घंटों के ही आसपास होगा।
वो शायद गुस्सा करेगा और पागल हो जाएगा, जो हो रहा है उससे।
क्या इंसान को प्राइवेसी भी नहीं मिल सकती? वहाँ पर एक कैमरा है। वहाँ ऊपर एक कैमरा है। वहाँ कैमरा है। कैमरा, कैमरा, कैमरा, कैमरा, कैमरा, कैमरा। मेरे ऊपर बहुत से कैमरे लगे हैं ट्वेंटी फोर सेवेन। मैं पागल हो जाऊँगा।
क्या होगा अगर हम कैमरा को फेंकूँगा कन्वेयर पे? जीनियस। इसे बॉलिंग जैसे फेंकता हूँ। मैंने उँगली को ज़ख्मी कर दिया।
मैंने सच में नहीं सोचा था ये वीडियो इतना मुश्किल होगा। सोच रहा हूँ ये मुझे कैसे तोड़ रहा है, पर मुझे अभी एक जानवर जैसा लग रहा है। जैसे मैंने मेरे सारे इंसानी अधिकार खो दिए हैं।
अंदाज़े से पाँचवाँ दिन आधा हो चुका होगा। मुझे गर्लफ्रेंड की याद आ रही है और मेरी गैंग की भी याद आ रही है। यहाँ तक नोलन भी। यहाँ तक नोलन भी।
मेंटली अभी कहा जाए तो कहूँगा, मेरी हद पूरी हो चुकी है। ये बहुत अमानवीय है। मैं यहाँ पर इतने लंबे वक्त से कि मेरे कुछ सपनों में मैं खुद को रूम में देखता हूँ और सोचता हूँ ये पाँचवाँ, छठा दिन है। और फिर जाग जाता हूँ और पता चलता है सपना है।
अभी वक्त क्या हुआ है? मैं बहुत सारे पैसे दूँगा। बस बता दो आखिर वक्त क्या हुआ है।
चलो देखते हैं मैं ऐसा क्यों सोचता हूँ, चैलेंज में ३३ घंटे बचे हैं। मैंने 5 बार नींद ली। रीजन नंबर टू, मैं दिन में एक बार टॉयलेट जाता हूँ और यहाँ आने के बाद मैं पाँच बार टॉयलेट गया हूँ। वजह नंबर तीन, मेरी गर्दन पर यहाँ बहुत से बाल आए हैं, जो कि आम तौर पर एक हफ्ते में होता है। और अगर किसी वजह से… और अगर किसी वजह से ये डे फाइव होगा, और ईश्वर न करे किसी वजह से ये डे फोर होगा, तो मैं मेरा आपा खो दूँगा।
जब मैं सो रहा था तो मैंने सपना देखा, जिसमें मैंने एक लाख तक गिनती की थी। इसलिए जागने पर मैं इस रूम के हज़ार चक्कर लगाऊँगा। पता है ना, पुराने दिनों के नाम। और ये होगा मार्कर। 1, 2, 3।
ये फुटेज अब देखकर कमाल लग रहा है। मैं दिमाग जगह पर रखने के लिए चक्कर लगा रहा था।
एक हज़ार बहुत ज़्यादा है। अभी से सिर घूम रहा है।
इस पूरे चैलेंज में मैं पानी ले रहा था इस वाले सिंक से और मैं सच कहूँगा… मुझे नहीं… ब्रो…
Cirkul एक फ्लेवर्ड कार्ट्रिज, जिसको हम पानी की बोतल पर लगा सकते हैं और सादा पानी भी टेस्टी लगता है। इस बोतल पर सौ से भी ज़्यादा फ्लेवर्स फिट होते हैं, जो कि सभी 0 कैलोरीज़ और 0 शुगर हैं।
इस तिपाई को घुमाना बेकार है।
आपको फ्लेवर कितना इंटेंस चाहिए वो चुनिए और बस पीना शुरू कर दें। ये इतना फ्लेवर ऐड करता है कि बता नहीं सकते कि ये सिंक का पानी है। मैं पूरे चैलेंज के दौरान फ्रूट पंच पीते आ रहा हूँ और ये सच में पानी का टेस्ट कमाल कर देता है।
मैं इन दो दीवारों के बीच चक्कर लगाऊँगा।
ये कारतूस आपकी पानी की बोतलों के एकाधिक पुनःभरण तक बचे रहते हैं। जो कि बढ़िया है, क्योंकि बॉयज़ इन्हें बार-बार नहीं भेजते और कभी-कभी मुझे इसे दिन भर चलाना पड़ता है। अगर आप ज़्यादा पानी पीना चाहते हो या बस अपने पानी का स्वाद थोड़ा टेस्टी करना चाहते हो, तो drinkcirkul.com पर जाओ या वॉलमार्ट में जाकर इसे ट्राय करें।
सब कुछ किया।
खुद को मनोरंजन करने के लिए, और मैं सच बता रहा हूँ, कुछ काम नहीं कर रहा।
और मेरे चक्कर खत्म होने के बाद कार्ल '100 दिन एक साथ फँसे हुए' से दो लोगों को ले आया।
हम आ गए।
ज़रा इसे देखो, तुम्हें ये बहुत पसंद आएगा। ये उस आदमी का चेहरा है जिसने तुम्हें सौ दिन कैद में रखा था।
क्या कहते हो, ये तुम्हारे वाले चैलेंज से आसान लग रहा है या मुश्किल? अगर कम्पेयर करें तो।
मैं होती तो चाहती कि मेरे साथ वहाँ कोई हो।
और अब जो बाज़ी पलट गई थी और इस बार वाइट क्यूब में मैं था, बेली और सूजी ने बदला लेने की सोची।
कन्वेयर बेल्ट ऐसे काम करता है।
उन्होंने एक खाली ट्रे भेजी।
वो अब सोच में पड़ने वाला है…
बिल्कुल बुरा नहीं लग रहा। वो इसी लायक है।
मैं मेरा हर एक डॉलर दाँव पर लगाता हूँ, ये कार्ल का काम है।
नहीं।
तुम भूखे हो, जिमी? ये खाओ।
तुम ऐसा नहीं कर सकते, ऐसा नहीं कर सकते। ऐसा नहीं कर सकते।
अब इसे बहुत ज़्यादा तकलीफ होने लगी है।
उसे दाद तो देनी ही होगी। शायद मैं इसी लायक हूँ।
सोचो अगर मरने के बाद ऐसा होता होगा तो। हम हमेशा के लिए एक वाइट रूम में चले जाते हों। वो बहुत ही बेकार होगा।
जब मैं सोता हूँ, तब मैं खुद को बाहर की दुनिया में देखता हूँ, और जागने के बाद बस डिप्रेस होता हूँ, अकेला। और सच कहूँ तो बुरा लगता है। तो जितना ज़्यादा मैं सोता हूँ, उतना ही ज़्यादा खुश होता हूँ।
मुझे बाहर निकालो।
मैं बैटमैन हूँ।
जैसे मर चुका हूँ। मुझे सच में यहाँ से निकलना है।
हमने राफ्ट पर सात दिन बिताए हैं। मैं सात दिन ज़िंदा दफन रहा हूँ। और अब एकान्त कारावास में पूरे सात दिन। अगर मुझे पता होता ये इतना मुश्किल होगा तो मैं ये कभी भी नहीं करता।
अगर टॉप लेफ्ट पर जो ऑवर का नंबर है, अगर वो बीस से थोड़ा भी ज़्यादा है, तो मैं अपना आपा खो दूँगा। मुझे बहुत अकेला महसूस हो रहा है। मुझे गर्लफ्रेंड की याद आ रही है। ये बस टॉर्चर है।
वो रो रहा है? उसका हाल सही नहीं है। वो बस ज़मीन पर सो रहा है, चीज़ें फेंक रहा है, गुस्सा कर रहा है। खाना मिलने पर खुश हो रहा है, बिल्कुल बच्चे जैसा।
शायद अब बस आठ घंटे बचे हैं। और फिर उसके बाद वो वाला दरवाज़ा खोलेंगे। और फिर मैं आज़ाद। मुझे ऐसी उम्मीद तो है, बस आठ घंटे बचे हों।
उसे लग रहा है वो अभी आखिर के कुछ घंटे सो रहा है। उसे ऐसा ही लग रहा है। अहसास होने पर दिल टूट जाएगा, लिटरली। सच कहूँ तो ये सीरियस है।
मेरे खयाल से अगले दो-तीन घंटों में वो डोर खुल जाएगा, तो आखिरी खाने के मज़े लेता हूँ। फिर तो मैं यहाँ से चला।
क्या उसने आखिरी खाना कहा? लगता तो है। दुःख की बात है, क्योंकि अभी चौबीस घंटे बचे हैं।
अब किसी भी पल वो उस दरवाज़े से आएँगे। तो थोड़ी सफाई कर लेता हूँ, यहाँ थोड़ी गंदगी है। मैं सफाई करने का बहाना कर रहा हूँ, पर सच कहूँ, मैं बोर हो गया हूँ।
मुझे लगा था ये प्रयोग करने के बाद मुझे और मानसिक स्पष्टता मिल जाएगी। शायद खुद के बारे में कुछ सीख पाऊँगा। लेकिन असल में मैं साथ एक स्किल लेकर जा रहा हूँ कि कन्वेयर बेल्ट के डोर में चीज़ों को कैसे फेंका जा सकता है। या शायद नहीं।
ऐसा बिल्कुल नहीं हो सकता कि चौबीस घंटों से ज़्यादा बचे हों। मैं यहाँ पर और चौबीस घंटे नहीं रह सकता। मेरी हद हो चुकी है, पर कोई फर्क नहीं पड़ता। चौबीस घंटे बचे ही नहीं हैं। बिल्कुल भी नहीं। मैं मानने से इनकार करता हूँ। तो अब किसी भी पल, अब किसी भी पल।
वक्त बिताने के लिए मैं गिनती शुरू रखता हूँ। 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 20, 21, 22।
5422, 5423, 5424, 5425।
कसम से मैंने वहाँ बाहर कुछ आवाज़ सुनी।
मैं हूँ दुखी। मैं हूँ दुखी। मैं हूँ दुखी। मैं हूँ दुखी। मुझे यहाँ रहना नहीं है। मुझे यहाँ से बाहर निकालो। मैं यहाँ रहना नहीं चाहता।
ये शायद ही इंसान है। वो बेड पर लेटा है, आँखें ढकी हुई हैं। कोई उत्तेजना नहीं। तुम ऐसा बिल्कुल भी नहीं देखना चाहोगे।
वो कैसे बर्ताव करेगा? वो एक नया इंसान होगा? मुझे फिक्र है कि वो ऐसा इंसान होगा जो कुछ भी करने के काबिल नहीं है। हमने आज तक उस पर इतना प्रेशर नहीं डाला जितना इस वीडियो में डाला है, क्योंकि उसका ह्यूमन कॉन्टैक्ट पूरी तरह से तोड़ दिया गया है।
एकदम आराम से, जैसे कि एक बच्चे को जगा रहे हो।
बस दस मिनट्स बचे हैं। चलो तैयार होते हैं।
थैंक यू। आपको कामयाबी मिले।
मैं मरने वाला हूँ।
दस, नौ, आठ, सात, छह, पाँच, चार।
एक मिनट, मैंने पैंट्स नहीं पहनी हैं।
तीन, दो, एक।
हे भगवान। अरे, जिमी।
सॉरी, मैं बस पैंट्स पहन रहा था। बाहर इतना उजाला नहीं है।
क्या हाल है, दोस्त?
सिर थोड़ा हल्का पड़ गया है। ये अजीब है, पर इस चैलेंज के बाद इंसानों से कैसे मिलते हैं, मैं भूल गया हूँ।
कहाँ जा रहे हो?
अच्छा लग रहा है। आँखों के सामने वो ब्राइट लाइट नहीं है तो। वो सीलिंग सच में कमाल की है।
बहुत दिनों बाद तुम्हें इतना खुश देख रहा हूँ।
सच कहूँ, मुझे लग रहा था कि वो चौबीस घंटे कभी भी खत्म नहीं होंगे।
मेरे पीछे बाहर आओ।
मुझे सूरज को देखना है। हे भगवान। बाहर तो अँधेरा है। बाहर की दुनिया देखकर अच्छा लग रहा है।
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