दुनिया भर में दस स्कूल: मिस्टर बीस्ट की टीम ने घाना से भारत तक क्या बनाया
MrBeast ミスタービーストइस वीडियो में मिस्टर बीस्ट (जिमी) और उनकी टीम दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में दस स्कूल बनाने या उन्हें पूरी तरह नया करने निकलते हैं। शुरुआत में वे बताते हैं कि 20 करोड़ से ज़्यादा बच्चों को स्कूल नसीब नहीं है, इसलिए उन्होंने खुद यह काम उठाने का फैसला किया। उनके मुताबिक योजना सिर्फ इमारतें खड़ी करने तक सीमित नहीं थी। वे बच्चों के खाने का इंतज़ाम भी करना चाहते थे, ताकि बच्चे अवैध मज़दूरी वाले खेतों का शिकार न बनें और उन्हें गंदा पानी न पीना पड़े। वीडियो घाना से शुरू होकर मैक्सिको-क्षेत्र के एक कस्बे, इक्वाडोर, अमेरिका और आखिर में भारत तक जाता है। हर जगह स्कूल के साथ पानी, खाना, आवास, पुल या बस जैसी कोई न कोई ज़रूरत भी जुड़ी हुई दिखती है।
घाना का पहला स्कूल: सरकार ने जिसे गिराने का आदेश दिया था
पहला स्कूल घाना में है। जिमी जिस पुरानी इमारत के सामने खड़े हैं, उसके बारे में वे साफ़ करते हैं कि वह उनकी बनाई नहीं है, बल्कि वही पुराना स्कूल है जिसे बदलना है। उनके अनुसार यह इमारत इतनी खतरनाक थी कि सरकारी अधिकारियों ने खुद इसे ध्वस्त करने का आदेश दे रखा था। टीम ने पुराना ढांचा गिराया और उसकी जगह नया स्कूल बनाया। बच्चों को नया स्कूल दिखाया गया। साथ ही स्कूल के पास एक नया बोरवेल भी खोदा गया।
दूसरा स्कूल: 250 बच्चे, दो नए क्लासरूम और शिक्षकों के लिए घर
दूसरे स्कूल को गिराने की ज़रूरत नहीं थी, इसलिए टीम ने उसे अंदर से पूरी तरह नया कर दिया। सबसे पहले दीवारें पेंट की गईं, फिर नई छत, नई दीवारें और नया फ़र्श लगाया गया। जिमी के मुताबिक यहाँ 250 बच्चे ऐसी हालत में पढ़ने को मजबूर थे। मौजूदा कक्षा को ठीक करने के अलावा दो बिल्कुल नए क्लासरूम भी बनाए गए। बच्चों को पहली बार ये कमरे दिखाए गए तो उनकी भीड़ देखकर जिमी ने कहा कि 250 बच्चों वाली बात झूठ नहीं थी।
वीडियो में यह भी बताया गया कि इनमें से कुछ बच्चों ने ज़िंदगी में कभी किसी खिलौने से नहीं खेला था, और अब वे इधर-उधर घूमकर मज़े कर रहे थे। जिमी का अनुमान है कि इससे स्कूल में उपस्थिति भी बढ़ेगी और बच्चों को पढ़ाई में ज़्यादा मज़ा आएगा।
इसी स्कूल में एक और समस्या सामने आई। प्रिंसिपल ने टीम को बताया कि दो शिक्षक, जोसेफ़ और इम्मानुएल, रोज़ आने-जाने में अपनी तनख्वाह का एक-तिहाई हिस्सा खर्च कर देते हैं और स्कूल पहुँचने में उन्हें एक घंटा लगता है। टीम ने दोनों के लिए स्कूल के पास नए आवास बनाए। दोनों को अलग-अलग अपार्टमेंट मिले, उन्हें कुछ भी साझा नहीं करना पड़ेगा।
नदी का पानी, परजीवी कीड़े और पाँच साल का मुफ़्त लंच
जिमी बताते हैं कि जब टीम पहली बार यहाँ आई थी, तब उन्होंने कुछ ऐसा देखा जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता था। पिछले दस सालों से एक नदी ही यहाँ पीने के पानी का एकमात्र स्रोत थी। वीडियो के अनुसार लगभग 80 प्रतिशत लोगों की आंतों में, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, परजीवी कीड़े हैं। इसलिए यहाँ बोरवेल खोदा गया, ताकि सिर्फ बच्चों को नहीं, बल्कि सभी लोगों को साफ़ पानी मिल सके।
पानी के साथ शौचालय भी बनाए गए, ताकि लोगों को जंगल में न जाना पड़े। वहाँ सिंक भी लगाए गए जहाँ से साफ़ पानी मिलेगा। इसके अलावा एक पूरी तरह सुसज्जित रसोई बनाई गई, ताकि बच्चों को रोज़ दोपहर का खाना मिल सके। जिमी ने घोषणा की कि अगले पाँच साल तक हर दिन सभी छात्रों को मुफ़्त लंच मिलेगा। उन्होंने एक व्यक्ति से कैलेंडर पर कोई तारीख चुनने को कहा। 2030 चुना गया, और जिमी ने कहा कि मई 2030 तक मुफ़्त लंच मिलता रहेगा। यह खबर बच्चों को सुनाई गई तो वे "मिस्टर बीस्ट" के नारे लगाने लगे। जिमी ने इस काम में मदद के लिए रॉकफ़ेलर फ़ाउंडेशन को धन्यवाद दिया।
खर्च के बारे में जिमी बताते हैं कि सिर्फ इस एक परिसर पर, किसी और स्कूल पर नहीं, पाँच लाख डॉलर से ज़्यादा खर्च हो चुके हैं। पूरा ब्लूप्रिंट अभी बाकी है और उसे पूरा करने में उनके अनुमान से दस लाख डॉलर से ज़्यादा लगेंगे। उनका कहना है कि यह स्कूल आने वाली कई पीढ़ियों की ज़िंदगी बदलेगा। इतना काम करने की वजह से स्थानीय लोगों ने उन्हें "चीफ़ ऑफ़ डेवलपमेंट" की उपाधि दी। एक स्थानीय व्यक्ति ने उनसे कहा कि जिमी जो कहते हैं, वो करके दिखाते हैं।
गिरने की कगार पर खड़ी छत और सौर ऊर्जा वाला कुआँ
अगले स्कूल में जिमी ने बच्चों को कमरा खाली करने को कहा और बताया कि यह इमारत उनसे भी पुरानी है और इसकी छत कभी भी गिर सकती है। बच्चे पढ़ रहे हों और छत गिर जाए, यह उन्हें सबसे बुरी स्थिति लगी। इसलिए पुरानी इमारत गिरा दी गई। जिमी के अनुसार इस खतरे से बचने का एक ही रास्ता था, पुराने स्कूल की जगह बिल्कुल नया दो-मंज़िला स्कूल बनाना। स्कूल का आकार दोगुना हो गया। अब इसमें आठ बड़ी, पूरी तरह फ़र्निश्ड कक्षाएँ हैं और 300 से ज़्यादा बच्चे पढ़ सकते हैं।
स्कूल के ठीक बगल में सौर पैनलों से चलने वाला एक कुआँ भी बनाया गया, जिसमें पानी जमा करने की सुविधा है। जिमी ज़ोर देकर कहते हैं कि यह पानी सिर्फ स्कूल के लिए नहीं, आस-पास रहने वाले सभी लोगों के लिए है, क्योंकि उनका मकसद सिर्फ स्कूल बनाना नहीं, लोगों की ज़िंदगी में बदलाव लाना है।
बाल मज़दूरी और फ़ीस्टेबल्स का संदर्भ
यहीं वीडियो घाना के काम को बाल मज़दूरी के सवाल से जोड़ता है। जिमी के अनुसार इन बच्चों को स्कूल देने का मतलब है कि उन्हें अवैध बाल मज़दूरी में नहीं धकेला जाएगा। वे बताते हैं कि फ़ीस्टेबल्स (उनका चॉकलेट ब्रांड) किसानों को इतनी कीमत देने के लिए प्रतिबद्ध है जिससे वे अच्छी ज़िंदगी जी सकें, और अपने खेतों में बाल मज़दूरी का ऑडिट करने के लिए भी। इसी वजह से, वीडियो में कहा गया, उन्होंने घाना में 11 अलग-अलग जगहों पर बच्चों के लिए स्कूल बनाए। (यह संख्या वीडियो के दस स्कूलों वाले ढांचे से अलग है, लेकिन वीडियो में यही कहा गया है।)
बाढ़ और कीचड़ वाली कक्षा की जगह सात नए क्लासरूम
इसके बाद जिमी कहते हैं कि वे सिर्फ बाल मज़दूरी की समस्या पर काम नहीं कर रहे। अगला स्कूल इतना खराब था कि वहाँ पढ़ाई ही संभव नहीं थी। बारिश में कक्षा में बाढ़ आ जाती थी और अंदर पानी भरने से पूरा कीचड़ हो जाता था। अगले कुछ महीनों में टीम ने वहाँ सात क्लासरूम वाला नया स्कूल खड़ा कर दिया, जिसमें बिल्कुल नई डेस्क लगाई गईं। हमेशा की तरह बच्चों को उद्घाटन के दिन तक स्कूल देखने नहीं दिया गया।
यहाँ आठ महीने पहले टीम ने पुराने स्कूल के लिए एक रसोई बनाई थी, और अब से पाँच साल तक हर स्कूल-दिवस पर बच्चों को मुफ़्त लंच मिलेगा। एक व्यक्ति ने जिमी से कहा कि और क्लासरूम चाहिए होंगे क्योंकि बहुत से बच्चों को खाना चाहिए। जिमी का जवाब था कि इसीलिए तो सात बनाए गए हैं।
एक साल पुराना भोजन कार्यक्रम और दस क्लासरूम वाला स्कूल
अगले पड़ाव पर वह स्कूल भोजन कार्यक्रम है जिसे टीम ने एक साल पहले शुरू किया था। जिमी के अनुसार एक साल बाद सब ठीक चल रहा है। हर स्कूल-दिवस पर बच्चों को मुफ़्त लंच मिलता है, और इस कार्यक्रम के कारण स्कूल की उपस्थिति दस प्रतिशत बढ़ गई है।
जिमी बताते हैं कि यहाँ की कक्षा की हालत देखकर उन्हें लगा कि नया स्कूल बनाना ही एकमात्र इलाज है। टीम ने एक, दो या तीन नहीं, पूरे दस क्लासरूम बनाए, और वे स्पष्ट करते हैं कि इन दस क्लासरूम को मिलाकर यह वीडियो के दस स्कूलों में से सिर्फ एक स्कूल गिना गया है। बच्चे "न्यू क्लास!" चिल्लाते हुए अंदर गए। जिमी का कहना है कि अगर ये क्लासरूम न बनते तो बच्चे रोज़ डर के साये में पढ़ते, और अब वे बिना चिंता के पढ़ सकेंगे।
कस्बे का पहला स्कूल: कार से काम करती प्रिंसिपल
इसके बाद टीम एक ऐसे कस्बे में पहुँचती है जहाँ, वीडियो के अनुसार, पूरे कस्बे को मिडिल स्कूल से लेकर हाई स्कूल तक एक ही स्कूल साझा करना पड़ता है। हालत यह थी कि प्रिंसिपल को कार में बैठकर काम करना पड़ता था।
यहाँ निर्माण का तरीका जिमी के लिए भी नया था। हर दीवार अलग से बनाकर फिर उन्हें आपस में जोड़ा गया। जिमी ने माना कि उन्हें उम्मीद थी कि हथौड़े और कीलों से काम होगा। दीवारें जल्दी खड़ी हो गईं, लेकिन एक साथी ने याद दिलाया कि यह अभी सिर्फ ढांचा है और इसमें कंक्रीट भरना बाकी है। फिर जिमी और लगभग 50 स्वयंसेवकों ने मिलकर छत के हिस्से उठाकर ऊपर बिठाए। इस दौरान हँसी-मज़ाक भी चलता रहा, जैसे "फेंकना नहीं, सेट करना है" और यह कि नोलन उतने लंबे नहीं हैं। जिमी ने छत को काफ़ी भारी बताया। उनके अनुसार यह "नेक्स्ट जेन" निर्माण सामग्री है जिसमें कंक्रीट भरा जाएगा, और उसके बाद यह स्कूल कई पीढ़ियों तक मज़बूती से खड़ा रहेगा।
जब बाकी टीम कंक्रीट से दीवारें मज़बूत कर रही थी, तब जिमी ने प्रिंसिपल से बात की। प्रिंसिपल ने पुष्टि की कि वे दस साल से कार से ही काम कर रही हैं क्योंकि उनके पास कोई दफ़्तर नहीं है। टीम ने नए स्कूल के ठीक बगल में उनके लिए एक दफ़्तर बनाया। इसे देखकर प्रिंसिपल भावुक हो गईं। आख़िरी सरप्राइज़ के रूप में एक फ़ुटबॉल मैदान भी बनाया गया। जिमी ने इसमें मदद के लिए टेलीविसा फ़ाउंडेशन को धन्यवाद दिया।
इक्वाडोर: जंगल के भीतर दो ऊँचे स्कूल और नया पुल
जिमी ने इक्वाडोर के स्कूलों को शायद सबसे मुश्किल बताया। ये दो स्कूल घने जंगल में हैं, जहाँ लोगों को सब कुछ खुद करना पड़ता है और, जिमी के अनुसार, कोई मदद नहीं पहुँचती। वहाँ पहुँचने के लिए टीम को दो हवाई यात्राएँ करनी पड़ीं, फिर तीन घंटे नाव से जाना पड़ा और उसके बाद डेढ़ घंटे ऑफ़-रोड सफ़र करना पड़ा।
वहाँ पहुँचकर टीम ने समझा कि बारिश कैसे बच्चों की पढ़ाई रोक देती है। एक शिक्षिका ने बताया कि बारिश में पढ़ाना असंभव था। टिन की छतों पर बारिश के शोर की वजह से किसी की आवाज़ सुनाई नहीं देती थी। पानी घुटनों से ऊपर तक भर जाता था। शिक्षिका का कहना था कि अच्छी परिस्थितियों के बिना छात्र कुछ नहीं सीख सकते।
इसलिए टीम ने दोनों पुराने, जर्जर स्कूलों की जगह दो बिल्कुल नए ऊँचे (एलिवेटेड) स्कूल बनाए, जो खास तौर पर छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किए गए थे। वीडियो के अनुसार अब 50 से ज़्यादा बच्चे बेहतर परिस्थितियों में स्कूल लौट सकेंगे। इसके अलावा बच्चों के रास्ते पर पड़ने वाले खतरनाक लकड़ी के पुल की जगह ठोस धातु का पुल बनाया गया, ताकि उन्हें स्कूल जाते समय डरना न पड़े।
अमेरिका: न्यूरोडाइवर्जेंट बच्चों के लिए खुले में सीखने की जगह
अमेरिका में टीम होप क्रीक एकेडमी पहुँची, जो न्यूरोडाइवर्जेंट ज़रूरतों वाले छात्रों का स्कूल है। स्कूल के एक प्रतिनिधि ने बताया कि वे बच्चों को सुरक्षित माहौल में बढ़ने और उत्कृष्टता हासिल करने का मौका देने की कोशिश करते हैं।
जिमी का तर्क है कि इन छात्रों के लिए सीखने की सबसे अच्छी जगह कक्षा के अंदर नहीं, स्कूल के बाहर है। वे कहते हैं कि डेटा के मुताबिक न्यूरोडाइवर्जेंट बच्चे बंद कमरे की तुलना में खुली जगह और प्रकृति के बीच बेहतर सीखते हैं। इसी आधार पर उन्होंने लोवेज़ के साथ मिलकर एक आउटडोर लर्निंग सेंटर बनाया। वीडियो के अनुसार लाल जैकेट पहने लोग लोवेज़ के कर्मचारी थे जो अपने खाली समय में स्वयंसेवा कर रहे थे। एक सहभागी ने बताया कि यह बच्चों के लिए एक नया माहौल होगा, जो अभी उनके पास नहीं है, जहाँ वे प्रकृति के साथ खेल सकें। यहाँ एक प्ले हाउस भी बनाया गया।
वीडियो में लोवेज़ के बारे में कहा गया कि उसने पिछले वीडियो में बताया गया एक करोड़ वर्ग फ़ुट जगह बदलने का लक्ष्य पूरा किया है, और इस साल वह देशभर में 2,000 से ज़्यादा प्रोजेक्ट और 2,00,000 से ज़्यादा स्वयंसेवी घंटों के लिए प्रतिबद्ध है। तैयार सेंटर देखकर एक शिक्षक ने कहा कि यह बहुत खुला और प्राकृतिक है और कल्पना और रचनात्मकता के लिए पूरी छूट देता है।
भारत: 400 छात्र, छह कमरे, और एक स्कूल बस
आख़िरी स्कूल भारत में है। यह इतना भीड़भाड़ वाला था कि छात्रों के पास पढ़ने की जगह ही नहीं थी। स्कूल की ओर से बताया गया कि उनके पास अपने क्लासरूम नहीं हैं। 400 छात्रों के लिए कुल कितने कमरे हैं, यह पूछने पर जवाब मिला कि छह। टीम ने यहाँ तीन-मंज़िला नया स्कूल बनाया।
वीडियो के अनुसार कई बच्चों को स्कूल पहुँचने के लिए अंधेरे में व्यस्त और खतरनाक सड़कों पर घंटों पैदल चलना पड़ता था। इसलिए, दसवें स्कूल के हिस्से के रूप में, टीम ने एक स्कूल बस भी खरीदकर दी। एक शिक्षिका ने कहा कि वे बहुत खुश हैं क्योंकि अब उनके छात्र, खास तौर पर लड़कियाँ, सुरक्षित रूप से स्कूल आ सकेंगी। बच्चे बस से नए स्कूल गए। स्कूल की ओर से फ़ाउंडेशन का आभार जताया गया कि उसने इतना बड़ा स्कूल बनाकर दिया।
कुल खर्च, पहुँच और आगे की उम्मीद
अंत में जिमी दर्शकों को सीधे संबोधित करते हैं। उनका कहना है कि ये बदलाव इसलिए संभव हुए क्योंकि लोग उनके वीडियो देखते हैं। उनके अनुसार दर्शकों की वजह से टीम इन दस स्कूलों पर तीन मिलियन डॉलर से ज़्यादा खर्च कर पा रही है, और ये स्कूल समय के साथ 18,000 से ज़्यादा छात्रों को शिक्षा देंगे। इसी पैसे से साफ़ पीने के पानी के लिए कुएँ बने और बसें और पुल सुरक्षित बनाए जा सके, जिनसे जिमी के मुताबिक मौजूदा लोगों के साथ आने वाली पीढ़ियों को भी फ़ायदा होगा।
जिमी यह उम्मीद जताकर वीडियो खत्म करते हैं कि यह बस शुरुआत है, उन्हें अभी बहुत कुछ करना है, और वे मिस्टर बीस्ट चैनल के ज़रिए इसी तरह लाखों ज़िंदगियाँ बदलना और बचाना चाहते हैं।
इस वीडियो में, हम दुनिया भर में दस स्कूल बना रहे हैं। अनफॉर्चुनेट्ली, 20 करोड़ से ज्यादा बच्चों को स्कूल नसीब नहीं है, इसलिए मैंने सोचा क्यों ना ये बीड़ा खुद उठाऊँ और उनके लिए स्कूल बनाऊँ। साथ ही उनके खाने का भी इंतज़ाम करूँ, ताकि वो इलीगल लेबर फार्म्स का शिकार होने से बच सकें, और गन्दा पानी भी ना पिएँ।
नहीं, ये रिकॉर्ड मत करो।
पानी मिल गया!
ये वीडियो दुनिया भर के हज़ारों लोगों की ज़िन्दगी बदल देगा।
मिस्टर बीस्ट! मिस्टर बीस्ट!
और ये रहा हमारा पहला स्कूल, घाना में।
इसे हमने बनाया? नहीं, ये पुराना स्कूल है।
मैं ऐसा कभी बना सकता हूँ? नहीं। तुम्हें पता है ना, चैंडलर।
चलो इस खंडहर स्कूल को गिरा दें! हम नया स्कूल बनायेंगे!
ये स्कूल इतना डेंजरस है कि गवर्नमेंट ऑफिशियल्स ने ही इसे ध्वस्त करने का ऑर्डर दिया है।
तुम्हारा टाइम पूरा हुआ।
नए स्कूल में कौन-कौन जाना चाहता है?
स्कूल 1
जाओ अपना नया स्कूल देखो। मज़े करो!
तो कैसा लगा नया स्कूल?
मैं समझ गया। और स्कूल के पास ही, हम नया बोरवेल खोद रहे हैं। इन्हें देखकर मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है। चलो और नए स्कूल बनायें। और ये तो सिर्फ शुरुआत है, अभी तो हमें बहुत सारी ज़िंदगियाँ बदलनी हैं।
अब पिछले स्कूल की तरह, हमें इस स्कूल को डिमोलिश करने की ज़रूरत नहीं।
हाँ, वो मुझे दे दो। छोड़ो।
तो हम इसे पूरा नया बना देंगे। ये बड़े अफ़सोस की बात है कि 250 बच्चों को ऐसी कंडीशंस में पढ़ाई करनी पड़ती थी।
स्कूल 2
और हम ये बदल देंगे। सबसे पहला काम दीवारों को पेंट करना है।
मैं समझ गयी, तुमने छोटे एरियाज मेरे लिए छोड़ दिए ना? हाँ। इसलिए तो तुम यहाँ हो, बेब। मैं अपना रोल समझ गयी।
नयी सीलिंग, नयी दीवारें, नया फ्लोर। सबकुछ ब्रैंड न्यू। हमने ना सिर्फ उनका क्लास रूम ठीक किया, बल्कि हमने उनके लिए दो नए स्कूल भी बनाये ताकि बच्चे पढ़ सकें।
चलो आ जाओ! वो पहली बार नए-नए क्लास रूम्स देखेंगे। चलो जाओ। अरे बाप रे, ये तो बहुत एक्साइटेड हैं!
जब मैंने कहा यहाँ 250 बच्चे पढ़ते हैं तो मैं झूठ नहीं बोल रहा था। अब इनके पास दो ब्रैंड न्यू क्लास रूम्स हैं और इन्हें मन लगाकर पढ़ना है।
तुम लोगों को अपना नया क्लास रूम कैसा लगा? अच्छा? देखो कितने खुश हैं! चलो अंदर चलते हैं।
हम लोग बहुत खुश हैं। अच्छा। और मैं आपकी शुक्रगुज़ार हूँ।
येस, लेट्स गो!
येस, लेट्स गो!
तो इनमें से कुछ बच्चों ने अपने लाइफ में कभी किसी खिलौने से नहीं खेला, और वो यहाँ इधर-उधर घूम रहे हैं और खूब एंजॉय कर रहे हैं। अब न सिर्फ स्कूल अटेंडेंस बढ़ेगी बल्कि बच्चों को और मज़ा आएगा। इस प्रोजेक्ट से हमें बहुत ख़ुशी मिली।
प्रिंसिपल ने हमें बताया कि वो दो टीचर अपने सैलरी का वन थर्ड रोज़ आने-जाने में खर्च कर देते हैं, और उन्हें पहुँचने में भी एक घंटा लग जाता है, जो कि उनके लिए बहुत मुश्किल भरा होता है। और इसलिए, जोसेफ और इम्मानुएल, अपनी आँखों से पट्टी हटा दो, और ये रहा आपका ब्रैंड न्यू होम।
चलो अन्दर। ज़रा देखें तो सही। वाओ! क्या रूम है! येस। सब हमारे लिए? वाओ!
आप लोग ये अपार्टमेंट शेयर नहीं करने वाले। येह! ये तुम्हारा अपार्टमेंट है। और तुम मेरे साथ आओ। ये साइड तुम्हारा है। येस।
आप लोग बहुत बढ़िया टीचर्स हो।
और हमने सिर्फ अपार्टमेंट्स ही नहीं बनाया। जब हम पहली बार यहाँ आये, तो हमने कुछ ऐसा नोटिस किया जो इग्नोर नहीं किया जा सकता था।
नहीं, इसे रिकॉर्ड मत करो।
पिछले दस सालों से ये नदी पानी का एकलौता सोर्स है जहाँ से लोग पानी पीते रहे हैं। और लगभग 80 प्रतिशत यहाँ के लोग, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, उनके इंटेस्टाइन्स में पैरासिटिक वर्म्स हैं। ये जानकर बहुत दुःख हुआ। और इसलिए हमने यहाँ बोरवेल खोदा ताकि ना सिर्फ बच्चों को बल्कि सब लोगों को अच्छा पानी मिल सके।
चैंडलर, जानते हो वो क्या है? वो फ्रेश वाटर है। अब सब लोग साफ़-सुथरा पानी पियेंगे।
हमने बाथरूम भी बनाये ताकि उन्हें जंगल में जाने की ज़रूरत ना पड़े। और यहाँ सिंक्स भी हैं जहाँ उन्हें अपना फ्रेश वाटर मिलेगा।
और हमने किचन भी बनाया, उसे ऐसे कैसे छोड़ देंगे। चलो अन्दर। इस किचन में सबकुछ है, ताकि बच्चों को उनका लंच मिल सके, वो भी रोज़।
मैं आपको बताना चाहता हूँ कि अगले पांच साल तक हर रोज़, हम सभी स्टूडेंट्स को फ्री लंच देंगे।
वाओ! मेरे पास शब्द नहीं हैं कहने के लिए।
इस कैलेंडर से कोई भी डेट चूज़ करो। 2030? 2030 मई तक, हम फ्री लंच देंगे। सच में? ऐसे ही? ऐसे ही। सब कवर्ड है।
मैं बहुत खुश हूँ। मैं बता नहीं सकता। हाँ। मैं उन्हें बताऊँ? हाँ, बताओ। जाओ। मैं भी बताऊँगा। ओके।
अगले पांच साल तक, वो हमें फ्री मील्स देंगे, वो भी हर रोज़!
मिस्टर बीस्ट! मिस्टर बीस्ट!
मैं Rockefeller Foundation को शाउट आउट देना चाहूँगा इतने अच्छे कॉज़ में हमारी मदद करने के लिए।
आप लोगों को मेरा नाम चिल्लाने की ज़रूरत नहीं है, गाइस। मिस्टर बीस्ट! मिस्टर बीस्ट! थैंक यू। प्लीज मत कीजिये। मिस्टर बीस्ट!
हमने एक्चुअली पांच लाख डॉलर से ज्यादा खर्च किए, इस कंपाउंड पर। किसी और स्कूल पर नहीं, सिर्फ इस पर। और अब भी कुछ बाकी है। इस ब्लूप्रिंट को पूरा करने में हमें वन मिलियन डॉलर से ज्यादा लग जायेंगे, ताकि इस स्कूल का भला हो और यहाँ के लोगों का भी। खासतौर पर यहाँ के टीचर्स और बच्चों का। ये स्कूल आने वाले कई जनरेशंस की जिंदगियाँ बदल देगा।
और एक मज़े की बात, क्योंकि हमने यहाँ इतना कुछ किया तो लोगों ने मुझे चीफ ऑफ़ डेवलपमेंट का खिताब दे दिया।
जिमी, जो आप कहते हैं, उसे पूरा करते हैं।
आपको ये सब करने की ज़रूरत नहीं थी लेकिन, शुक्रिया।
ये हमारा अगला स्कूल है। बच्चों, क्या तुम बाहर जा सकते हो? मुझे ये रूम खाली चाहिए। क्योंकि देखिये, ये जो बिल्डिंग है, ये मुझसे भी ज्यादा पुरानी है। और इसकी छत कभी भी गिर सकती है, मान लो वो पढ़ रहे हैं, और अचानक से छत गिर गयी। जो कि बहुत ही बुरी बात होगी। और इसलिए हम इस स्कूल बिल्डिंग को डेमोलिश कर देंगे, क्योंकि मैं नहीं चाहता कोई भी ऐसा हादसा हो जिससे कि बच्चों की जान को खतरा पहुँचे।
और इस डेंजर को अवॉयड करने का एक ही तरीका था, उस पुराने स्कूल को इस ब्रैंड न्यू टू स्टोरी स्कूल से बदल देने का! और हमने स्कूल का साइज़ डबल कर दिया, अब यहाँ 300 से ज्यादा बच्चे पढ़ सकते हैं। अब यहाँ आठ बड़ी-बड़ी क्लासेज हैं, वो भी फुल्ली फर्निश्ड।
थैंक यू, मिस्टर बीस्ट। आपने हमारे बच्चों का ध्यान रखा।
और ठीक स्कूल के बगल में, हमने सोलार पैनलों से चलने वाला एक कुआँ बनाया जिसमें वाटर स्टोरेज की भी सुविधा है। और ये वाटर सिर्फ स्कूल के लिए नहीं, बल्कि आजू-बाजू में रहने वाले सभी लोगों के लिए है। हमारा मकसद सिर्फ स्कूल बनाना नहीं है। हम चाहते हैं कि यहाँ के लोगों के लाइफ में भी अच्छा बदलाव आये।
इन बच्चों को स्कूल प्रोवाइड करने का मतलब होगा उन्हें इलीगल चाइल्ड लेबर में धकेला नहीं जायेगा। फीस्टेबल्स किसानों को अच्छी ज़िन्दगी जीने लायक कीमत देने और अपने खेतों में चाइल्ड लेबर्स का ऑडिट करने के लिए प्रतिबद्ध है। और इसलिए मैंने घाना में 11 अलग-अलग जगहों पर बच्चों के लिए स्कूल बनाये।
थैंक यू।
लेकिन हम सिर्फ चाइल्ड लेबर की प्रॉब्लम ठीक नहीं कर रहे, ये अगला स्कूल इतना ख़राब है कि यहाँ पढ़ाई करना पॉसिबल ही नहीं। ये वो क्लास रूम है जहाँ बच्चे पढ़ते हैं।
बारिश में यहाँ बाढ़ आ जाती है। अच्छा?
बारिश में यहाँ बाढ़ आ जाती है। अच्छा? हाँ, और अन्दर पानी जमा हो जाता है जिससे पूरा कीचड़ हो जाता है।
तो अगले कुछ महीनों में हमने पूरी मेहनत की और एक नया स्कूल खड़ा करके दिया। हमने यहाँ सेवन क्लास रूम्स बनाये हैं। चलो बच्चों का रिएक्शन देखें! सब लोग आ जाओ!
हमेशा की तरह, हमने बच्चों को आज से पहले तक स्कूल देखने ही नहीं दिया। आज वो देखेंगे। वो अपने न्यू क्लास रूम्स को देखकर बहुत खुश हैं। उन्हें ये बहुत पसंद आया। इसलिए हम लोग ये वीडियो बना रहे हैं।
और हमने इस बात का भी ध्यान रखा कि स्कूल में डेस्क एकदम ब्रैंड न्यू होनी चाहिए। और हाँ, आठ महीने पहले, हमने यहाँ पुराने स्कूल के लिए किचन बनाया था। आज से पाँच साल तक, हर स्कूल के दिन हम लोग बच्चों को फ्री लंच भी देने वाले हैं।
हमें और क्लास रूम्स की ज़रूरत पड़ेगी, जिमी। बहुत बच्चों को फ़ूड चाहिए। इसलिए तो सात बनाये। हमने बनाये क्या? हाँ। ये अक्लमंदी थी। चलो नेक्स्ट स्कूल चलें।
ये स्कूल फीडिंग प्रोग्राम है जिसे हमने एक साल पहले स्टार्ट किया था। और आज यहाँ एक साल बाद हम देख रहे हैं कि सबकुछ ठीक चल रहा है। हर स्कूल के दिन बच्चों को फ्री लंच दिया जाता है। और इस मील प्रोग्राम के कारण स्कूल की अटेंडेंस दस प्रतिशत बढ़ गयी है और बच्चे और स्कूल आ रहे हैं।
जब मैंने इस क्लास रूम की हालत देखी थी, समझ गया था हमें कुछ तो करना होगा। और इसका एक ही इलाज था, हमें नया स्कूल खड़ा करना होगा। और हमने सिर्फ एक क्लास रूम नहीं बनाया, दो भी नहीं, तीन भी नहीं, बल्कि पूरे दस क्लास रूम्स बनाये। इन दस क्लास रूम्स को मिलाकर हमने सिर्फ एक स्कूल बनाया है दस में से इस वीडियो में।
चलो बच्चों का रिएक्शन देखें। क्या तुम क्लास रूम देखने के लिए रेडी हो? हाँ! चलो फिर। चलो बच्चों, आ जाओ मेरे साथ। देखो अपना क्लास रूम देखने के लिए कितना एक्साइटेड हैं!
न्यू क्लास! न्यू क्लास! न्यू क्लास! न्यू क्लास! वो मुझे छोड़ ही नहीं रहे। कम ऑन!
अगर हमने ये क्लास रूम्स नहीं बनाये होते तो बच्चे वहाँ रोज़ डर के साये में पढ़ते। और अब हमें खुशी है अब वो बिना किसी चिंता के वहाँ पढ़ाई करेंगे।
तो आप लोगों को नया क्लास रूम पसंद आया? हाँ! उन्हें पसंद आया। अच्छे से पढ़ाई करना। ये मैंने तुम्हारे लिए ही बनाया है।
लेकिन अब भी वर्ल्ड में बहुत से किड्स हैं जिनके पास स्कूल नहीं है। अब हम इस टाउन का पहला स्कूल बनाने जा रहे हैं।
इस पूरे टाउन को एक ही स्कूल शेयर करना पड़ता है, मिडिल स्कूल से लेकर हाई स्कूल तक। हालत ये है कि प्रिंसिपल को कार में बैठकर काम करना पड़ता है। लेकिन अब हम उन्हें एक ब्रैंड न्यू स्कूल बनाकर देंगे।
और हम हर दीवार को अलग-अलग बनाकर और उन्हें आपस में जोड़कर शुरुआत करेंगे। स्कूल बनाने के मामले में, मैंने ये तो नहीं सोचा था। मैंने सोचा था हम हैमर और नेल्स यूज़ करेंगे।
ओके, एक दीवार बन गयी। और ये दूसरी। लेट्स गो! शाबाश! और ये तीसरी दीवार। ये स्कूल बहुत तेज़ी से बन रहा है। ये आउटलाइन है। अभी कंक्रीट भरना है। हम अच्छा स्कूल बनायेंगे, ट्रस्ट मी।
चलो लॉक करो और अब रूफ लाओ। अब मैं और 50 वॉलंटियर्स रूफ को उठाकर ऊपर फेंकेंगे। फेंकना नहीं, सेट करना है। ठीक है ब्रो, जो तुम कहो। थैंक्स। चलो।
ओके! मैं इसे छू भी नहीं रहा। नोलन उतना टॉल नहीं है। जैसा कि आप देख सकते हैं हमने आधी छत बिठा दी।
ऐसा लगता है हम किसी वॉर पर जा रहे हैं। छत उठाओ। संभलकर। ओह गॉड! ये काफी हैवी है। सेकंड रूफ भी सेट हो गयी। हमने कर दिखाया।
ये एक नेक्स्ट जेन बिल्डिंग मटेरियल है जिसे कंक्रीट से भरा जायेगा, जिसके बाद ये स्कूल कई जनरेशन तक मज़बूत खड़ा रहेगा। और जब बॉय्स कंक्रीट से दीवारों को मज़बूत करने लगे, मेरे पास स्कूल के सबसे इंपॉर्टेंट पार्ट के लिए एक सरप्राइज़ था।
आप इस स्कूल की प्रिंसिपल हैं और हमने सुना है आप दस सालों से अपनी कार से ही काम कर रही हैं। हाँ, मैं कार से ही काम कर रही हूँ, क्योंकि हमारे पास ऑफिस नहीं है।
तो हमने उनके ब्रैंड न्यू स्कूल के ठीक बगल में एक ऑफिस बना दिया। ये आपका नया ऑफिस है!
थैंक यू वेरी मच। मुझे रोना आ रहा है। थैंक यू, जिमी। नो प्रॉब्लम। अब आपको कार से काम करने की ज़रूरत नहीं, अब आपके पास नया स्कूल है और खुद का नया ऑफिस भी।
स्कूल तो बन गया लेकिन अब भी एक लास्ट सरप्राइज़ बाकी है। हमने आपके लिए एक शानदार फुटबॉल ग्राउंड भी बनाया है। गो! टेलीविसा फाउंडेशन ने इसे बनाने में हमारी मदद की जिसके लिए बहुत-बहुत शुक्रिया। चलो और स्कूल बनायें।
और अगला स्कूल हमारा शायद सबसे मुश्किल हो जिसके लिए हम जा रहे हैं, इक्वाडोर। इमैजिन कीजिये आप दूर जंगल में रहते हैं जहाँ सबकुछ खुद करना पड़ता है। यही हमारे दो स्कूलों की रिआलिटी है। और क्योंकि इतने घने जंगल में उन्हें कोई मदद नहीं मिल रही है, इसलिए हम वहाँ पहुँचने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं।
हमें दो प्लेन राइड्स लेनी पड़ीं। और अब तीन घंटे की बोट राइड है। उसके बाद डेढ़ घंटा ऑफ रोड जाना है! और जब हम वहाँ पहुँचे, तो पता चला कैसे बारिश इन बच्चों को पढ़ने से रोकती है।
मैं उन्हें बारिश में नहीं पढ़ा पाती थी। ये इम्पॉसिबल था। टिन की छतों के कारण यहाँ किसी की भी आवाज़ सुनना इम्पॉसिबल है। अच्छी कंडीशंस के बिना स्टूडेंट्स कुछ नहीं सीख सकते।
पानी का लेवल कितना हो जाता है? घुटनों के ऊपर चले जाता है। ये डेंजरस है, कहाँ से पढ़ाई होगी फिर?
इसलिए, हमें पुराने जर्जर स्कूलों को दो ब्रैंड न्यू एलिवेटेड स्कूल से बदलना पड़ा जिन्हें खास तौर से डिज़ाइन किया गया था ताकि स्टूडेंट्स सेफ रह सकें। अब 50 से ज़्यादा बच्चे बेहतर कंडीशंस के साथ वापस स्कूल आ सकेंगे। क्या आप लोग खुश हो? हाँ!
और इन स्कूल्स में ज़िंदगी भर के लिए एजुकेशन पाने वाले सैकड़ों स्टूडेंट्स को वेलकम करने के लिए, हमने उनके खतरनाक लकड़ी के पुल को एक सॉलिड मेटल पुल से बदल दिया। और अब इन बच्चों को हर बार स्कूल जाते समय डरने की ज़रूरत नहीं है।
और अब जब इन बच्चों को सीखने के लिए एक मज़ेदार जगह मिल गई है, हम निकल पड़े हैं ऐसा ही कुछ करने के लिए यूनाइटेड स्टेट्स में।
होप क्रीक एकेडमी न्यूरोडाइवर्जेंट ज़रूरतों वाले छात्रों के लिए एक स्कूल है। हम उन्हें एक सेफ एन्वायरनमेंट में ग्रो करने और एक्स्स्लेन्सी पाने के लिए मौका देने की कोशिश करते हैं।
कैसे हैं आप लोग? अच्छे हैं।
और इन स्टूडेंट्स के लिए सीखने के लिए सबसे अच्छी जगह क्लास के अंदर नहीं, बल्कि स्कूल के बाहर है। डेटा से पता चलता है कि न्यूरोडाइवर्जेंट बच्चे कमरे में सीखने की तुलना में ओपन स्पेस में, नेचर के बीच बेहतर सीखते हैं। इसीलिए मैंने इन बच्चों के लिए एक परफेक्ट लर्निंग सेंटर बनाने के लिए Lowe's के साथ साझेदारी की।
लाल जैकेट पहने हुए सब लोग Lowe's के लिए काम करते हैं और इन बच्चों को सीखने और आगे बढ़ने के लिए अपने खाली समय में वॉलंटियरिंग कर रहे हैं।
ये जो हम बना रहे हैं इससे बच्चों को क्या फायदा होगा? ये एक न्यू टाइप का एन्वायरनमेंट होगा जो प्रेज़ेंट्ली उनके पास नहीं है, जहाँ वो नेचर के साथ खेल सकते हैं। बच्चे मदर अर्थ के करीब ही रहेंगे। हाँ।
पिछले वीडियो में हमने बताया था Lowe's एक करोड़ स्क्वेयर फीट की जगह बदलना चाहता था और उसने वो ऐम पूरा भी किया। और इस साल, वो देशभर में 2,000 से ज़्यादा प्रोजेक्ट्स
और 2,00,000 से ज़्यादा वालंटियर अवर्स के लिए कमिटेड हैं।
आने दो। सॉरी, गलती हो गयी। मैंने जानबूझकर किया।
लोगों की मदद करना ये लोव्स की रग-रग में भरा है, वो भी सौ सालों से। इसलिए मैं लोव्स को धन्यवाद कहना चाहता हूँ, हमारे साथ जुड़ने के लिए और दुनिया भर में भलाई करने के प्रति आपकी कमिटमेंट के लिए।
हम प्ले हाउस भी बनायेंगे। उन्हें पसंद आना चाहिए। काफी भारी है।
अगर और जानना चाहते हैं, तो इस क्यूआर कोड को स्कैन करें या डिस्क्रिप्शन में दिए लिंक पर क्लिक करें।
और इस लर्निंग सेंटर को फाइनल टच देने के बाद इन बच्चों को उनकी क्लास में लाने का टाइम आ गया था।
बच्चे बहुत एक्साइटेड हैं। शानदार तोहफा है! ये बहुत खुला-खुला, नैचुरल है, और इमैजिनेशन और क्रिएटिविटी के लिए पूरी-पूरी छूट देता है।
थैंक यू, मिस्टर बीस्ट! डब्ल्यू मिस्टर बीस्ट!
और अपने आखिरी स्कूल के लिए, हम जा रहे हैं इंडिया। एक स्कूल जो इतना ओवरक्राउडेड है कि स्टूडेंट्स के पास पढ़ने के लिए जगह ही नहीं है।
हमारे पास खुद के क्लासरूम नहीं हैं।
आपके स्कूल में 400 स्टूडेंट्स हैं तो फिर टोटल क्लासरूम्स कितने हैं? छह। छह क्लासरूम्स?
तो हमने उन्हें तीन मंजिला नया स्कूल बनाकर दिया।
और क्योंकि इनमें से कई बच्चों को स्कूल पहुँचने के लिए अंधेरे में बिजी और डेंजरस रोड पर से घंटों तक पैदल चलते आना पड़ता है…
स्कूल 10
हमने बस गिफ्ट की। सही सुना, हमने उन्हें एक स्कूल बस खरीद के दी।
मैं बहुत खुश हूँ, क्योंकि मेरी स्टूडेंट्स, स्पेशली लड़कियाँ, सेफली आ सकेंगी।
ऑलराइट गाइस, हम आपके नए स्कूल जा रहे हैं। आप लोग तैयार हो? हाँ! हाँ!
मुझे बहुत मज़ा आ रहा है! लेट्स गो! येह!
सभी स्टूडेंट्स का कहना है कि वो अपने नए स्कूल को लेकर बहुत एक्साइटेड हैं। मैं आपके फाउंडेशन की बहुत आभारी हूँ। उन्होंने हमें इतनी बड़ी स्कूल बनाकर दी।
हुर्रे!
मैं बस इतना ही कहूँगा, मुझे इन चीजों में बहुत ज़्यादा महारत हासिल नहीं है, लेकिन मैं तहे दिल से… ओह, वो देखिए कितना प्यारा बच्चा है। मैं तहे दिल से आपका शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ।
हम इन बच्चों की लाइफ नहीं बदल पाते, उन टीचर्स की भी नहीं। लेकिन यहाँ रहने वाले सब लोगों की ज़िंदगियाँ बदली हैं क्योंकि आप लोग हमारे वीडियोस देखते हैं, और तब ऐसा कुछ होता है।
आपकी वजह से हम इन दस स्कूलों पर तीन मिलियन डॉलर से ज़्यादा खर्च कर पा रहे हैं, जो समय के साथ 18,000 से ज़्यादा स्टूडेंट्स को एजुकेट करेंगे।
आपके ही कारण हम फ्रेश ड्रिंकिंग वाटर की प्रॉब्लम को सॉल्व करने हेतु कुएँ बनवा सके और बसों और पुलों को भी सेफ बना सके, जिससे ना सिर्फ इन लोगों को, बल्कि आने वाली जनरेशंस को भी फायदा होगा।
मैं उम्मीद करता हूँ ये बस शुरुआत है, मुझे अभी बहुत कुछ करना है। आई होप कि मिस्टर बीस्ट चैनल के थ्रू हम ऐसे ही लाखों ज़िंदगियाँ बदल सकें, बचा सकें। और इसके लिए मैं आप लोगों का बहुत शुक्रगुज़ार हूँ। थैंक यू सो मच।
हम अपने पार्टनर टी-मोबाइल का भी शुक्रिया अदा करना चाहेंगे जिनकी मदद से ये वीडियो पॉसिबल हुआ, और इस बात के लिए भी जो वो एजुकेशन सेक्टर में अपने प्रोजेक्ट 10 मिलियन द्वारा कर रहे हैं।
सब्सक्राइब करके आपने उनका जीवन बदल दिया।
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