100 बच्चे बनाम उनके माता-पिता: 100 घंटे, दो क्यूब और $5,00,000 की होड़

YouTube पर खोलें ↗
अवलोकन

इस वीडियो में मिस्टर बीस्ट (जिमी) और उनकी टीम ने दो विशाल क्यूब बनाए। एक में 100 बच्चे और दूसरे में 100 वयस्क रहे, और ये वयस्क उन्हीं बच्चों के माता-पिता थे। सवाल सीधा था: क्या बच्चे अपने माता-पिता से ज़्यादा देर टिक पाएँगे? नियम यह था कि 100 घंटे बाद जिस क्यूब में सबसे ज़्यादा लोग बचे होंगे, उसी टीम के बचे हुए खिलाड़ी आधा मिलियन डॉलर आपस में बाँटेंगे। इसके बाद के सौ घंटों में टीम ने लालच, भूख, ऊब और छल वाली चुनौतियों से यह परखा कि कौन पहले हार मानता है।

10 मिनट में पढ़ें

शुरुआत: दरवाज़े बंद और दोनों तरफ़ आत्मविश्वास

दरवाज़े बंद होते ही दोनों टीमें अकेली रह गईं। मेज़बानों ने बच्चों से पूछा कि क्या वे वयस्कों के एक समूह से हार जाएँगे। वयस्कों से पूछा कि क्या वे बच्चों के झुंड से पिट जाएँगे। दोनों तरफ़ से जवाब "नहीं!" था। एक वयस्क ने मज़ाक में कहा कि वह "दाता" है, इसलिए इनाम में से थोड़ा बाँट देगा। मेज़बान ने दोहराया कि पैसा सिर्फ़ जीतने वाली टीम के बचे हुए खिलाड़ियों में बँटेगा।

पहला प्रलोभन: एक घंटे बाद $1,000

एक घंटा पूरा होने पर जिमी ने दोनों टीमों को प्रस्ताव दिया: जो अभी बाहर निकलेगा उसे $1,000 मिलेंगे। उन्होंने साफ़ कहा कि जीत के अलावा किसी को पैसा मिलने का यही एकमात्र मौका है, और फ़ैसले के लिए 60 सेकंड दिए। किसी ने कहा कि हज़ार डॉलर काफ़ी पैसा नहीं है, तो किसी ने तुरंत बाहर निकलने का फ़ैसला किया। एक पिता और उसका बेटा, दोनों बाहर आ गए, जिस पर मेज़बान ने कहा "जैसा पिता, वैसा पुत्र"।

सिर्फ़ पहले घंटे में 12 वयस्क और 10 बच्चे बाहर हो गए। बचे हुए बच्चों ने जाने वालों से शिकायत की कि वे उन्हें 88 वयस्कों के सामने कैसे छोड़ गए। वयस्कों की तरफ़ से कहा गया कि अब पता चल गया है कि कौन सच में जीतना चाहता है।

माता-पिता का हस्ताक्षर और बाथरूम की व्यवस्था

माता-पिता से एक काग़ज़ पर हस्ताक्षर करवाए गए। उसमें लिखा था कि अगर बच्चे जीतते हैं तो वे पैसा ज़िम्मेदारी से ख़र्च करेंगे और माता-पिता उसे अपने ऊपर इस्तेमाल नहीं करेंगे। बच्चों को यक़ीन नहीं हो रहा था कि माता-पिता सच में इस पर हस्ताक्षर कर रहे हैं।

इसके बाद क्रिस क्यूब तक बाथरूम ले आए। टीम ने मिलकर एक पोर्टा-पॉटी पहुँचाई। दुर्गंध की वजह से उसमें एक छेद ड्रिल किया गया, जिसे प्रतियोगियों ने "फ़ार्ट पाइप" कहा। इसी दौरान किसी ने दरवाज़ा खोला तो अंदर कोई मौजूद निकला।

पहली रात: ऊब और टाइलें

पाँच घंटे बाद नोलन ने सबको सुबह तक अकेला छोड़ दिया ताकि देखा जा सके कि वे क्या करते हैं। बच्चों ने बताया कि ऊब होने पर उन्हें एहसास हुआ कि क्यूब की टाइलें उतारी जा सकती हैं, और उन्होंने सारी टाइलें उतारनी शुरू कर दीं। इस शरारत के बीच नोलन को अंदर बुलाया गया। उन्होंने पूछा कि ये लोग हमेशा ऐसा क्यों करते हैं, और बच्चों ने जवाब दिया कि ये चीज़ें बहुत मज़ेदार हैं।

अगली सुबह एक बच्चे ने यह देखने की कोशिश की कि कितने वयस्क बचे हैं। मेज़बानों ने इसे धोखा देने की कोशिश माना और कहा कि इसके लिए उसे 500 ग्रैंड से दूर करना होगा। इसके बाद दोनों टीमें 78-78 पर बराबर थीं।

दलिया, टैको बेल और 75 कॉफ़ी

बराबरी तोड़ने के लिए टीम ने प्रतियोगियों को दलिया परोसा। उसमें चीनी नहीं थी और किसी को पसंद नहीं आया। एक प्रतियोगी ने बनाने वाले से कहा कि उसका "खाना पकाने का लाइसेंस" रद्द होना चाहिए। दलिया के बाद कोई बाहर भी चला गया, जिस पर जिमी ने कहा कि "दलिया हमेशा काम करता है"।

फिर नया प्रस्ताव आया। बच्चों से कहा गया कि अगर उनमें से दो बाहर निकलें तो सबको टैको बेल मिलेगा। बच्चों ने मना कर दिया। वयस्कों के बारे में मेज़बान का अनुमान था कि उन्हें कुछ और चाहिए, और वयस्कों ने सचमुच कॉफ़ी और कैफ़ीन की माँग की। शर्त वही थी: दो लोग बाहर निकलें, तो 75 कप कॉफ़ी आएगी। नोलन ने 75 कॉफ़ी का वादा किया और स्टारबक्स पहुँचे, जहाँ कर्मचारी ने हैरानी से पूछा, "75 क्या?"

नोलन के मुताबिक़ बच्चों ने प्रस्ताव ठुकराया था, फिर भी उनमें से कुछ ने बाहर निकलने का फ़ैसला किया। वयस्कों को कॉफ़ी मिली, और एक ने कहा कि अब सब बहुत ख़ुश दिख रहे हैं।

हरा बटन: एक-दूसरे का इलाक़ा सिकोड़ने की दौड़

इसके बाद चुनौती कड़ी की गई। हर क्यूब के सामने एक विशाल बटन रखा गया। अगले 24 घंटों में किसी भी समय यह बटन हरा हो जाता, और जो टीम पहले दबाती, वह दूसरी टीम का इलाक़ा सिकोड़ देती। रंग कब बदलेगा, यह कार्ल के हाथ में था। वयस्कों ने बताया कि उनके पास तीन लोग दौड़ने के लिए तैयार हैं, और कॉफ़ी पीने की वजह से वे जागे हुए भी थे।

कार्ल ने पहले रंग नीला किया ताकि जल्दबाज़ी में कोई बाहर आ जाए। एक प्रतियोगी इसी में फँसकर बाहर निकला और खेल से बाहर हो गया। बच्चों को बताया गया कि उनमें से अब सिर्फ़ 50 बचे हैं। उनका अनुमान था कि वयस्क लगभग 60 होंगे। कार्ल ने कुछ बार और रंग बदलकर आख़िर में बटन हरा किया। मुक़ाबला बेहद क़रीबी रहा और हारने वाले पक्ष को बताया गया कि दूसरी टीम ने उन्हें "बमुश्किल" हराया। दूसरे दिन के अंत तक, मेज़बान के अनुसार, बच्चे पहले ही 18 लोगों से पीछे थे।

पिज़्ज़ा के बदले इलाक़ा

अगला प्रस्ताव यह था: जो टीम अपना वर्ग छोटा करने दे, उसके हर सदस्य को रात के खाने में एक पूरा पिज़्ज़ा मिलेगा। एक तरफ़ से "पिज़्ज़ा, पिज़्ज़ा!" की आवाज़ें आईं, दूसरी तरफ़ से व्यंग्य में "दलिया!" के नारे। इलाक़ा छोटा करते समय मेज़बान ने माफ़ी माँगते हुए कहा कि जिमी उनसे यह करवा रहे हैं। पिज़्ज़ा पाकर एक प्रतियोगी ने कहा कि वह रोने वाला है।

इस सौदे की क़ीमत रात में चुकानी पड़ी। एक प्रतियोगी ने कहा कि दिन में ज़्यादा कुछ नहीं हुआ, लेकिन रात उम्मीद से कहीं ज़्यादा कठिन थी क्योंकि जगह लगातार छोटी हो रही थी। वयस्कों को बताया गया कि उनमें से 60 बचे हैं। बच्चों की संख्या पूछने पर एक का अनुमान था कि अगर उन्हें भी रोज़ वही दलिया मिल रहा है तो शायद 15 बचे होंगे।

माता-पिता से बातचीत

चौथे दिन तक, मेज़बानों के अनुसार, लोग बहुत ज़्यादा ऊब चुके थे। इसलिए बच्चों को सरप्राइज़ दिया गया: अपने माता-पिता से बात करने का मौक़ा। कुछ बच्चों को पता चला कि उनकी माँ अब भी खेल में है। एक बच्चे को बताया गया कि जेसिका अब अंदर नहीं है। माता-पिता ने "शाबाश मेरी बच्ची", "मुझे तुम सब की बहुत याद आती है" जैसी बातें कहीं, और एक ने सलाह दी, "मज़बूत रहो, लाल रेखा से दूर रहो।"

अटैची वाला छल

इसके बाद टीम के "लड़कों" ने शरारत की योजना बनाई: एक अटैची दिखाकर लोगों को बाहर लुभाना। एक प्रतियोगी बाहर आ गया, और अटैची सिर्फ़ एक अटैची निकली। उसे याद दिलाया गया कि जिमी ने कहा था कि हज़ार डॉलर सिर्फ़ एक बार मिलेंगे, उसके बाद कुछ नहीं। अंदर वालों ने टिप्पणी की कि उसमें 10 हज़ार हो सकते थे, लेकिन बाक़ी सभी वीडियो में अटैची ख़ाली ही रही है।

दूसरी बार अटैची में सिर्फ़ $1 रखा गया। मेज़बानों ने पहले से कहा था कि जो इसके लिए निकलेगा वह "सीधा नासमझ" है। फिर भी कोई बाहर आया, और उसने माना कि उसने डॉलर देखा तक नहीं था। एक बच्चा भी इसी चाल में बाहर हुआ। तीसरी बार वयस्कों को ख़ाली अटैची दिखाई गई। बच्चे मान रहे थे कि वयस्क इतने होशियार होंगे कि नहीं फँसेंगे, जबकि मेज़बान को लग रहा था कि "यह शर्मनाक होने वाला है"। बाद की टिप्पणी, कि बच्चे इसमें नहीं फँसे थे, से संकेत मिलता है कि वयस्कों में से कोई इस चाल में आ गया।

गुब्बारे की परीक्षा

वयस्कों ने बताया कि जिमी कल से अंदर नहीं आए हैं, और उन्हें छत पर शोर सुनाई दे रहा था। जिमी क्यूब के ऊपर एक गुब्बारा लेकर पहुँचे थे। प्रतियोगियों से कहा गया था कि वे गुब्बारा न फोड़ें। जो आदेश मानेंगे, उन्हें दंड नहीं मिलेगा। (इस इंतज़ार के दौरान वीडियो में प्रायोजक का विज्ञापन चलता है।)

वयस्कों ने गुब्बारा फोड़ दिया, इसलिए उनका क्यूब सिकोड़ा गया। उनकी शिकायत थी कि नोलन ने गुब्बारा सीधे दीवार पर गिरा दिया था, और उन्होंने इसे नोलन की ग़लती बताया। बच्चों ने भी अपना गुब्बारा फोड़ दिया और उनका क्यूब भी छोटा किया गया। एक टीम को बताया गया कि वह परीक्षा में पास हो गई थी, लेकिन गुब्बारा नीचे आते समय किसी ने लाइन पर पैर रख दिया था। कार्ल ने फ़ुटेज दिखाकर इसकी पुष्टि की। बाहर होने वाले प्रतियोगी ने अपनी टीम से कहा कि उसने उनके लिए और पैसा "कमा" दिया है।

नंबर चुनो, दूसरे का क्यूब बाँटो

अगली चुनौती में दोनों टीमों के एक-एक नेता को 1 से 5 के बीच एक संख्या चुननी थी। यह संख्या तय करती कि दूसरी टीम के क्यूब को कितनी लाइनें विभाजित करेंगी। एक नेता ने 2 चुना और दूसरे ने 3, जिसे मेज़बान ने "ठीक बीच में" कहा। जब बच्चों को दिखाया गया कि वयस्कों ने उनके क्यूब के साथ क्या किया, तो एक की प्रतिक्रिया थी कि "यह इतना बुरा नहीं है"।

मेज़बान के अनुसार ये लाइनें ज़्यादा जगह नहीं घेरतीं, लेकिन इन पर कदम पड़ने से बहुत सारी ग़लतियाँ हो सकती हैं। प्रतियोगियों को बाथरूम जाते समय ख़ास सावधानी बरतने को कहा गया। एक प्रतियोगी हैरान था कि लोग लाइनों को इतनी बार पार क्यों कर रहे हैं।

एक और व्यक्ति के जाने के बाद वयस्क 50 रह गए। मेज़बान ने हिसाब लगाया कि अगर ये सब टिके रहे तो हर एक $10,000 जीतेगा।

शिक्षिका के लिए सरप्राइज़

मेज़बान ने बताया कि ये बच्चे पाँच दिन से स्कूल नहीं गए हैं, इसलिए वे उनकी शिक्षिका के लिए कुछ ख़ास करना चाहते थे। उन्होंने शिक्षिका से छात्रों को "उधार लेने" के लिए माफ़ी माँगी और बताया कि बच्चों ने उन्हें अपनी पसंदीदा शिक्षिका बताया था। फिर उन्होंने शिक्षिका के सामने पैसों का ढेर लगा दिया और कहा कि वह गणित की शिक्षिका के तौर पर उसे गिन लें। शिक्षिका ने बार-बार पूछा कि कहीं मज़ाक तो नहीं हो रहा।

शिक्षिका ने वादा किया कि अगर बच्चे जीतते हैं, तो उनके गणित के छात्रों को साल भर का होमवर्क नहीं मिलेगा। बच्चों को यह ख़बर मिली तो उन्होंने कहा कि अब वे जीतने वाले हैं।

आख़िरी घंटे

चुनौती ख़त्म होने से दो घंटे पहले जिमी दलिया के अलावा कुछ और लाए: अपनी चॉकलेट बार। शर्त यह थी कि जो कहेगा "हर्षे बेकार है", उसे एक बार मिलेगी। ज़्यादातर प्रतियोगियों ने यह कह दिया, हालाँकि एक ने कहा कि उसे हर्षे पसंद है।

99वें घंटे में पता चला कि कोई थोड़ी देर पहले ही बाहर निकला था। उसे पाँच हज़ार डॉलर देने की बात कही गई। मेज़बान ने माना कि जिमी ने इसकी अनुमति नहीं दी थी, लेकिन उनके शब्दों में, बाद में माफ़ी माँग लेना बेहतर है।

आख़िरी 30 मिनट में दोनों तरफ़ उत्सुकता थी। बच्चे "हम जीतेंगे" दोहरा रहे थे। वयस्क प्रार्थना कर रहे थे कि बच्चे उनसे कम हों, और एक ने अनुमान लगाया कि 73 वयस्क बचे हैं। बाहर निकलकर सबसे पहले क्या करेंगे, इस पर एक का जवाब था: "शायद शावर"। एक वयस्क ने अपने बेटे से "सॉरी" कहते हुए वयस्कों की जीत का दावा किया।

नतीजा

उल्टी गिनती के बाद चुनौती आधिकारिक रूप से ख़त्म हुई और सबको क्यूब से बाहर बुलाया गया। विजेता थे वयस्क, और मेज़बान के शब्दों में वे "भूस्खलन" जैसे अंतर से जीते। इसके बाद घोषणा हुई कि पूरे समय टिके रहने वाले हर बच्चे को धन्यवाद के तौर पर एक हज़ार डॉलर दिए जाएँगे। चुनौती का अंत बच्चों और माता-पिता के मिलने से हुआ: कोई अपने पिता को ढूँढ रहा था, किसी ने कहा कि उसे समझ नहीं आ रहा कि कैसा महसूस करे, और माता-पिता "मुझे पता था तुम यह कर लोगे" कहते हुए बच्चों को गले लगा रहे थे।